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जल संरक्षण का कार्य:नालों में बारिश के पानी को सहेजने बनाए स्टोरेज सेंटर

दुर्गएक महीने पहले
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जिले सहित प्रदेश के ऐसे नाले जिसमें बरसात के दिनों में पानी होता है, उसे सहेज कर इसका उपयोग खेती-बाड़ी व निस्तारी जल के रूप में उपयोग करने का कार्य को बढ़ावा मिला है। नरवा कार्यक्रम अंतर्गत नाला बंधान कर जल संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। जिसकी वजह से जिले में भूजल स्तर औसत 9.34 प्रतिशत बढ़ा है। दुर्ग जिले में 196 बड़े नाले हैं। इसके उपरान्त भी जल आपूर्ति के लिए प्रर्याप्त नहीं है। इसका मुख्य वजह समुचित तरीके से सहेजने की दिशा में सार्थक प्रयास नहीं होना है।

नरवा कार्यक्रम अंतर्गत विस्तृत कार्य योजना तैयार कर कार्य प्रारंभ किया गया। सर्वप्रथम ऐसे नरवा का चिन्हांकन किया गया, जिसमें पानी की उपलब्धता के आधार पर इसे सार्थक बनाया जाए। इस आधार पर प्रथम चरण में 29 नालों पर बंधान का कार्य किया गया। इसके परिणामस्वरूप जिले में जल संरक्षण के कार्य उत्साहजनक परिणाम सामने आए है। विशेषज्ञों का मानना है कि नरवा योजना के संभावित परिणाम अच्छे हैं। लेकिन ज्यादा पानी सहेजने की जरुरत है। नरवा योजना की कार्ययोजना को भी विस्तृत करना जरुरी है।

इस तरह बढ़ा भूजल स्तर
प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक जिला दुर्ग के अंतर्गत नरवा कैचमेंट में औसत भू-जल स्तर 19.07 मी. में प्राप्त होता था वहीं आज 17.29 मीटर प्राप्त होने लगा है। जिसकी औसत जल वृद्धि 9.34 प्रतिशत है। इसी प्रकार पहले किसान 492.65 हेक्टेयर में सिंचाई कर पाते थे वहीं 565.97 हेक्टेयर हो गया है। इस तरह 73.32 हेक्टेयर औसत फसल रकबे में वृद्धि हुई है। किसानों द्वारा पिछले वर्ष की तुलना में 502.82 क्विंटल अधिक उत्पादन अर्जित किया है। इसी तर्ज पर चिन्हांकित नालों में जल संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

हसदा, चिखला में बनाया सबसे बड़ा स्टोरेज सेंटर
धमधा ब्लॉक के हसदा और चिखला में सबसे बड़ा स्टोरेज सेंटर बनाया गया है। बारिश के दिनों में नाले के माध्यम से बहकर आने वाले पानी को यहां स्टोर किया जाता है। इसके बाद सिंचाई में उपयोग किया जाता है। इस पानी से भूजल स्तर पर रिचार्ज हो रहा है। इसी तरह की प्लान पाटन के कई गांवों में भी तैयार किया गया है। इसका भी समुचित उपयोग हो रहा है।

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