पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61313.570.15 %
  • NIFTY18306.90.28 %
  • GOLD(MCX 10 GM)479960.3 %
  • SILVER(MCX 1 KG)61497-0.1 %

आंदोलन वापसी के ऐलान में देरी की इनसाइड स्टोरी:जाट आंदोलन-मंदसौर गोलीकांड में वादाखिलाफी से किसान आशंकित, केस वापसी पर सरकार की शर्त से बिगड़ी बात

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: मनीष शर्मा
  • कॉपी लिंक

दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को मंगलवार को खत्म करने की सारी तैयारी हो चुकी थी, मगर ऐन समय पर केंद्र सरकार के लिखित प्रस्ताव में शामिल एक शर्त से बात बिगड़ गई। किसान आंदोलन के 375वें दिन केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया कि आंदोलन वापसी के तुरंत बाद यूपी और हरियाणा में किसानों पर दर्ज सारे केस वापस ले लिए जाएंगे। यहीं से किसान संगठन बिफर गए। हरियाणा के जाट आंदोलन और मध्यप्रदेश के मंदसौर गोलीकांड में हुए कड़वे अनुभव का हवाला देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार से दो टूक कह दिया कि यह शर्त मंजूर नहीं है।

हरियाणा के जाट आंदोलन और मध्यप्रदेश के मंदसौर गोलीकांड में कई किसानों पर केस दर्ज हुए। तब दोनों राज्यों की सरकारों ने ये केस वापस लेने का ऐलान किया था। इसके बाद किसानों ने अपने आंदोलन खत्म कर दिए। मगर हुआ उल्टा। एक भी केस वापस नहीं हुआ और किसान आज भी तारीखें भुगत रहे हैं। दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों की मंगलवार को घर वापसी में भी सबसे बड़ा पेंच केस वापसी का ही फंसा।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की मीटिंग पर इस पर घंटों मंथन हुआ। आखिर में केंद्र सरकार को अपने प्रस्ताव में संशोधन के लिए 24 घंटे का समय देते हुए आंदोलन वापसी की घोषणा को बुधवार दोपहर तक के लिए टाल दिया गया। किसान नेताओं ने कहा कि पुलिस केस वापसी के लिए सरकार समय सीमा तय करे। सिर्फ सैद्धांतिक मंजूरी से बात नहीं बनेगी। इसी मांग पर प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

जाट आंदोलन के बाद लड़ रहे देशद्रोह के मुकदमे
हरियाणा में 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन हुआ। रोहतक में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। इसके बाद कई लोगों पर देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हो गए। इनमें से 70 केस CBI के पास चल रहे हैं, जबकि कई केस जिला कोर्ट में पेंडिंग हैं। कई लोगों की तो जमानत तक नहीं हुई।

हरियाणा सरकार की ओर से बनाई एक कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जाट आंदोलन के दौरान दर्ज तकरीबन 3 हजार केस पेंडिंग है। सरकार के केस वापस लेने की घोषणा के बावजूद लोग तारीखें भुगत रहे हैं। हरियाणा के किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी साफ कहते हैं कि अभी केस वापस नहीं हुए तो जाट आंदोलन की तरह बाद में भुगतना पड़ेगा। तब तो सरकार भी सुनवाई नहीं करती।

मंदसौर गोलीकांड: मुआवजा और सरकारी नौकरी मिली लेकिन केस आज भी लड़ रहे
मध्यप्रदेश के मंदसौर में जून 2017 में गोलीकांड हुआ। पुलिस की फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई। मध्यप्रदेश से ही ताल्लुक रखने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेता शिवकुमार कक्का ने कहा कि मंदसौर गोलीकांड में 12 किसानों को गोली लगी। उनमें से 6 शहीद हो गए। सरकार ने 7 दिन के अंदर एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया। परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी और घायलों को 25-25 हजार रुपए दिए।

जब 2018 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तो विधानसभा में तत्कालीन गृहमंत्री ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार किसानों के सभी केस वापस लेती है, लेकिन उसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की बदौलत राज्य में तख्तापलट हो गया और भाजपा की सरकार बन गई। नतीजतन किसान आज भी केस भुगत रहे हैं।

मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग के बाद किसान नेता।
मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग के बाद किसान नेता।

यह चाहते हैं किसान

  • किसानों पर दर्ज केस वापस हों। केंद्र सरकार इसका ठोस आश्वासन दे। केंद्र राज्यों को लिखित हिदायत और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दे।
  • MSP पर बनने वाली कमेटी में कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके संगठनों के प्रतिनिधि शामिल न हों।
  • आंदोलन में जान गंवाने वाले 700 से ज्यादा मृतक किसानों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके लिए पंजाब मॉडल अडॉप्ट किया जाए।
सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को हुई मीटिंग में तय हुआ कि आंदोलन पर अंतिम फैसला बुधवार दोपहर 2 बजे होगा।
सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को हुई मीटिंग में तय हुआ कि आंदोलन पर अंतिम फैसला बुधवार दोपहर 2 बजे होगा।

केस वापसी के मुद्दे पर पंजाब के किसान संगठन भी एक राय
किसान आंदोलन में शामिल पंजाब के 32 में से ज्यादातर संगठन चाहते थे कि तीन खेती कानूनों की वापसी के बाद आंदोलन खत्म किया जाए। इसे लेकर तैयारी भी शुरू हो गई। दिल्ली बॉर्डर से कुछ किसान लौट भी आए और ज्यादातर इसकी तैयारी में बैठे हैं।

मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग में हरियाणा के संगठनों का कहना था कि राज्य में 48 हजार किसानों पर केस दर्ज हैं। अगर आंदोलन सिर्फ भरोसे पर खत्म किया गया तो उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी। मीटिंग में जब केस वापसी पर केंद्र सरकार का सशर्त वाला प्रस्ताव पहुंचा तो पंजाब के किसान संगठनों ने भी कह दिया कि केस वापसी के ठोस आश्वासन के बगैर उठना ठीक नहीं होगा।