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पीएचईडी मंत्री ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र:जब हर घर नल का जल पहुंच गया तो केंद्र ने प्रस्ताव मांगा, बिहार ने कहा- हमें आपके पैसे की जरूरत नहीं

पटना6 महीने पहलेलेखक: कैलाशपति मिश्र
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पीएचईडी मंत्री डॉ.रामप्रीत पासवान - Money Bhaskar
पीएचईडी मंत्री डॉ.रामप्रीत पासवान

हर घर नल का जल योजना... बिहार में 2016 से चल रही है, केंद्र सरकार ने इसे 2019 से शुरू किया। केंद्रीय योजना जब तक देश में परवान चढ़ती, उससे पहले राज्य की योजना लगभग पूर्ण हो चुकी है। केंद्र ने देश के दूसरे राज्यों की तरह ही बिहार से जल जीवन मिशन के लिए कई बार प्रस्ताव मांगा। राज्य सरकार का हर बार जवाब रहा-राज्य के हर घर में नल का जल पहुंच चुका है। शेष कुछ बचा नहीं बचा है। लिहाजा योजना के लिए राशि की जरूरत नहीं है।

वर्तमान पीएचईडी मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान ने केंद्र को पत्र लिखकर कह दिया है कि राज्य को इस मद में राशि की जरूरत नहीं है। मंत्री ने बताया कि सरकार, हर घर नल जल योजना के तहत 25,904 करोड़ खर्च कर चुकी है। पंचायती राज विभाग ने 15011 करोड़ और पीएचईडी ने 10892.63 करोड़ व्यय किया है। पीएचईडी मंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य में जल-जीवन-हरियाली मिशन की शुरुआत की गई है।

परंपरागत जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, सौर ऊर्जा का उपयोग, जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त, वर्षा जल का संचयन और टपकन सिंचाई योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पर राज्य सरकार करीब 24,524 करोड़ खर्च करेगी। तत्कालीन पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलकर आठ हजार करोड़ इस योजना के तहत देने का आग्रह किया था।

क्या है मंत्री के पत्र का मजमून

पीएचईडी मंत्री डॉ.रामप्रीत पासवान ने केंद्रीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य सरकार ने नल जल योजना को उच्च प्राथमिकता के आधार पर अपने संसाधन से पूरा कर लिया है। जल जीवन मिशन शुरु होने से पहले राज्य के सभी गांवों व वार्डों के हर घर नल का जल पहुंच चुका है। इसलिए जल जीवन मिशन के लिए कोई योजना नहीं बची है। इसलिए इस मद में पैसे की भी जरूरत नहीं है। वर्ष 2015 में बिहार में मात्र 2 फीसदी परिवारों तक ही शुद्ध पेयजल की उपलब्धता थी, जो आज बढ़कर करीब 98-99 फीसदी हो गया है।

केंद्रीय जल जीवन मिशन स्कीम

जल जीवन मिशन स्कीम वैसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है जहां अभी भी पानी की समस्या है। वहां 2024 तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए 2019 को योजना शुरू हुई। योजना पर 3.50 लाख करोड़ खर्च होगा। इसमें केंद्र-राज्य के खर्च का अनुपात 60:40 का है।

राज्य सरकार अपनी राशि से यह योजना पहले ही पूरी कर चुकी है

राज्य सरकार अपनी राशि से हर घर नल का जल योजना पूरी कर चुकी है। ऐसी स्थिति में केंद्र की योजना को लेना उचित नहीं था। इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र को यह पत्र भी लिखा है। केंद्रीय योजना के तहत राज्यांश के रूप में 40% राशि राज्य सरकार को देना पड़ता।

-डॉ. रामप्रीत पासवान, पीएचईडी मंत्री, बिहार