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अब पटना AIIMS में हाइटेक होगी सर्जरी:AIIMS में चंद मिनटों में होगा किडनी की पथरी का ऑपरेशन, शरीर से नहीं बहेगा अधिक खून; यूरोलॉजी विभाग में नई लेजर मशीन इंस्टॉल

पटना2 महीने पहले
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पटना AIIMS में कई आधुनिक नई मशीनों का शुभारंभ किया गया है।

पटना AIIMS के यूरोलॉजी विभाग में अब 4K विजन सर्जरी होगी। ऑपरेशन के दौरान अधिक खून नहीं निकलेगा, जिससे अधिकतर मरीजों को खून चढ़ाने की जरूरत भी नहीं होगी। इतना ही नहीं किडनी में पथरी का ऑपरेशन भी चंद मिनटों में हो जाएगा और अस्पताल से छुट्‌टी भी समय से मिल जाएगी। 4K विजन हाइटेक मशीनों के इंस्टॉलेशन के बाद इस सुविधा का रविवार को शुभारंभ हो गया है।

कई नई मशीनों का शुभारंभ
यूरोलॉजी विभाग में इंस्टॉल मशीनों में 120 वॉट हॉल्मियम लेजर मोजेज तकनीक के साथ इंट्राऑपरेटिव अल्ट्रसाउंड मशीन, लिथोक्लास्ट मास्टर, 4K इंडोविजन सिस्टम, 4K रिकॉर्डिंग तकनीक वाली मशीन शामिल है। इन सभी मशीनों का शुभारंभ पटना AIIMS के निदेशक डॉक्टर प्रोफेसर प्रभात कुमार सिंह ने किया है।

देश के सरकारी संस्थान की पहली मशीन
इंट्राऑपरेटिव अल्ट्रसाउंड मशीन:
इस मशीन से प्रॉस्टेट की एन्यूक्लीयसन सर्जरी की जाती है और मरीजों को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। यह मशीन मोजेज टेक्नॉलोजी के साथ AIIMS में लगाई गई है जो देश में पहली बार किसी सरकारी संस्थान में लगी है। इस विधि से सर्जरी के दौरान मरीजों का खून भी कम बहता है जिससे उन्हें खून चढ़ने की नौबत कम आती है।

4K एंडोविजन सिस्टम: इस मशीन से जटिल सर्जरी को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से करने में काफी मदद मिलती है। डॉक्टर को अच्छा विजन मिलने से सर्जरी बहुत सुरक्षित होती है। इससे मरीजों को भी खतरा कम रहता है।

लिथोक्लास्ट मास्टर: ये मशीन बिहार की पहली मशीन है। यह किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में नहीं थी। यह मशीन किडनी के पथरी को एंडोस्कोपिक तरीके से तोड़ने के काम आती है। इस मशीन की खासियत यह है कि एक साथ ही पत्थर को मैकेनिकल और अल्ट्रसाउंड तरीके से तोड़ने के साथ-साथ टुकड़ों को शरीर से बाहर भी निकल देती है। इस से सर्जरी में समय की काफी बचत होती है। इसमें मरीज को अधिक समय तक बेहोश नहीं रहना पड़ता है।

पूर्वोत्तर भारत की पहली एडवांस मशीन
यूरोलॉजी विभाग में एक एडवांस अल्ट्रसाउंड मशीन भी लगाई गई है जो पूर्वोत्तर भारत के किसी सरकारी संस्थान में अब तक नहीं लगी है। इस मशीन से प्रॉस्टेट की 12 या इससे ज़्यादा कोर की बायॉप्सी होती है। यह मशीन तीनों एक्सिस में प्रॉस्टेट को एक साथ दिखती है जिससे प्रॉस्टेट कैंसर के मरीज़ को बहुत कम खतरे के साथ बायोप्सी हो जाती है। इस मशीन में फ़्लेक्सिबल लाइप्रोस्कोपी की भी व्यवस्था है जो किडनी कैंसर के मरीजों में किडनी हटाने के काम आती है। इस मशीन से बहुत ही आसानी से ट्यूमूर को किडनी के साथ निकला जाता है जिससे मरीजों को विशेष परेशानी नहीं हो।

मूत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कमलेश गुंजन ने बताया कि इन मशीनों के आ जाने से प्रदेश में पहली बार किसी संस्थान में मोजेज टेक्नोलॉजी द्वारा HOLEP, MOLEP, RIRS की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही लोग लेजर लिथॉट्रिप्सी , USG गाइडेड पार्सीयल नेफ़्रेक्टोमी, 12 कोर प्रास्टेट बायोप्सी सरकारी में भी करा पाएंगे। निदेशक डॉ पी के सिंह ने बताया कि पहले इन सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली NCR जाना पड़ता था।

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