पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

MLC चुनाव में धन बल वाले 'हाथी' की खोज!:हर सीट पर 5 से 10 करोड़ रुपए तक का खेल, समझिए पीछे की पूरी कहानी

पटना4 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
  • कॉपी लिंक

बिहार में विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होना है। इसमें पर्दे के पीछे से एक उम्मीदवार की बोली 10 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा तक लग रही है। इस चुनाव में जीते हुए उम्मीदवार विधान पार्षद यानी MLC बनेंगे। विधान परिषद में 5 तरह के प्रतिनिधि चुने जाते हैं। विधान परिषद में 27 सदस्य विधान सभा क्षेत्र से आते हैं जिनके वोटर विधायक होते हैं। स्नातक क्षेत्र से 6 सदस्य चुने जाते हैं। शिक्षक निर्वाचन से 6 सदस्य चुने जाते हैं। राज्यपाल के कोटे से 12 सदस्य आते हैं। यहां 24 सदस्य स्थानीय प्राधिकार से चुने जाते हैं। स्थानीय निकायों से चुने जाने वाले MLC का चुनाव वार्ड सदस्य, जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य वोट से करते हैं। इसी 24 सीटों पर चुनाव होना है। बता दें कि विधान परिषद में सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि विधान सभा प्रतिनिधि का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। इस रिपोर्ट में विधान परिषद की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव पर हम बात करेंगे।

विधान परिषद चुनाव में खर्च की सीमा निर्धारित नहीं
स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों को MLC चुनना है और यह चर्चा जोरों से है कि पार्टियां इसके लिए धन-बल से मजबूत उम्मीदवार तलाश रही हैं। बता दें कि विधानसभा या लोक सभा चुनाव में खर्च करने की सीमा भले निर्धारित है। लेकिन, विधान परिषद और राज्य सभा चुनाव में खर्च की सीमा पर कोई बात नहीं की गई है। शायद यह समझा गया होगा कि इसमें तो किसी तरह का खर्च ही नहीं होगा। लेकिन, जो खेल हो रहा है वह गजब का है और पर्दे के पीछे कोई खेल होगा तो ज्यादा बड़ा होगा।
इस बार तो धन बल का रिकॉर्ड ही जैसे टूट रहा
चुनाव आयोग प्रतिबद्ध है कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हो और किसी तरह के धनबल का अवैध खेल इसमें न हो लेकिन खिलाड़ी तो खिलाड़ी हैं। भास्कर ने स्थानीय निकाय के जरिए 24 सीटों पर होने वाले चुनाव में प्रतिनिधियों को चुने जाने की राजनीति के अंदर झांका तो दिखा कि धन का बड़ा कारोबार चल रहा है। खेल पहले भी होते थे लेकिन इस बार तो जैसे शायद ही कोई प्रतिनिधि हो जो धन बल के बिना चुना जाए। 5 करोड़ से 10 करोड़ के बीच डीलिंग हो रही है।

पर्दे के पीछे एक वोट की कीमत कितनी?
चर्चा यह है कि एक वोट की अवैध कीमत 10 हजार रुपए है। वार्ड सदस्य, जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य सभी को अवैध रूप से 10-10 हजार रुपए एक-एक वोट के लिए दिए जा रहे हैं। वोट की कीमत प्रतिद्वंद्वी के हिसाब से बढ़ भी रही है। एक क्षेत्र में लगभग 4500 जनप्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे और वोट करेंगे। यह संख्या कहीं थोड़ा कम थोड़ा ज्यादा हो सकती है। जीत के लिए आधे जनप्रतिनिधियों के वोट चाहिए। यानी लगभग 2300 वोट। चूंकि कैंडिडेट को यह मालूम नहीं होता कि उसके कंफर्म वोटर कितने हैं, कोई धोखा तो नहीं देगा इसलिए वह सभी 4500 को अपने पक्ष में करने की कोशिश करने में लगा है। यानी यहां 10 हजार को 2300 से गुणा करने की बजाय 4500 से गुणा करना होगा। गुणा करने पर होता है- 4 करोड़ 50 लाख रुपए। अब लाइजनर पर होने वाले खर्च और पार्टी से टिकट लेने के खर्च को इसमें जोड़िए। यह खर्च लगभग 5 करोड़ रुपए से ज्यादा तक पहुंच जाएगा। यानी एक मजबूत उम्मीदवार पर्दे के पीछे 5 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है। यह इतने गुपचुप तरीके से है कि किसी को हवा भी नहीं लगेगी न कोई सबूत छोड़ने की गलती की जाएगी।

पूरे चुनाव पर 4 अरब रुपए खर्च हो सकते हैं
24 सीटों पर चुनाव होना है। एक उम्मीदवार पांच करोड़ खर्च करता है तो 24 कैंडिडेट का खर्च हुआ 24 गुणा 5 करोड़ रुपए, यानी एक अरब 20 करोड़ रुपए। 24 जगहों पर बड़ी पार्टियों के तीन -तीन उम्मीदवार की गिनती ही करें तो यह होगा 72, यानी चुनाव में खर्च पर 3 अरब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। छोटी पार्टियों के खर्चे को भी मिला लें तो कम से कम 4 अरब रुपए तो पहुंच ही जाएगा। ये पूरा हिसाब- किताब कई लोगों से ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत पर आधारित है। कोई इस पर खुल कर बोलने को तैयार नहीं। सब पर्दे के पीछे हो रहा है।

खबरें और भी हैं...