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खुद खाने को अन्न नहीं, बेजुबानों का कैसे भरे पेट:सहरसा में बाढ़ ने आवागमन से जीवनयापन तक सब कुछ किया प्रभावित; ना खाने को अन्न है, ना पलायन करने के लिए नाव

सहरसा3 महीने पहले
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सहरसा के नवहट्टा प्रखंड स्थित दैहारी टोल में आई बाढ़।

कोशीवासियों के जीवन में बाढ़ उनके बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बन गया है। इस साल भी कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिल रहा है। जहां कोशी नदी के ओवरफ्लो होने से तटबंध के अंदर बसी एक बड़ी आबादी प्रभावित हो गई है। गांव व घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। वहीं बाढ़ पीडितों का हाल जानने के लिए न तो जिला प्रशासन आए व न ही कोई जनप्रतिनिधि।

दरअसल सहरसा के नवहट्टा प्रखंड स्थित दैहारी टोल में आई बाढ़ से न सिर्फ आवागमन प्रभावित हुआ बल्कि घरों व खेतों में पानी घुसने से इन के जीवनयापन पर भी असर पड़ा है। इस बाढ़ ने कई किसानों के खेतों का फसल बर्बाद कर दिया तो कई घरों में रखा अनाज भी डूबकर बर्बाद हो गया। इससे न सिर्फ पीड़ितों के समक्ष भोजन की समस्या आई है बल्कि माल मवेशियों के लिए चारा की भी समस्या उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है और लोग त्राहिमाम कर रहे है।

मौके पर मौजूद ग्रामीण कामेश्वर यादव ने कहा कि बाढ़ का पानी अब हमारे घरों तक घुस चुका है लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रशासन के तरफ से कोई मदद तो दूर कोई देखने भी नहीं आया है। सरकार से हमारी मांग है कि तत्काल नाव की व्यवस्था किया जाय जिससे परिवार को लेकर ऊंचे स्थल पर पहुंचा जा सके। साथ ही खाने पीने की भी अन्य मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है।

वहीं राजेन्द्र यादव ने अपना दर्द सुनाते हुए कहा कि हम पहले कटाव और अब बाढ़ का शिकार बन गए है। हम कटाव होने पर ऊंचे स्थान पर आये लेकिन अब यहां भी बाढ़ आने के बाद हम अब कहां जाए। अनाज के अभाव में भोजन की भी किल्लत हो गयी है। ग्रामीण सह समाजसेवी प्रशांत यादव की माने तो यह इलाका केदली पंचायत का दैहारी टोला है जहां से व्यापक पैमाने पर दूध का उत्पादन होता था। लेकिन आज स्थिति उलटा पड़ गया, पहले कटाव व अब बाढ़ ने हमारा जीना मुहाल कर रखा है।

ऐसे में वहां मौजूद बाकि लोगों का कहना है कि कोशी के मुख्य धारा में गांव विलीन हो चुका है। मवेशियों के लिये चारा का अभाव है। प्रखंड में न तो BDO है न ही CO है। बिछावन से लेकर चारा तक सब पानी मे सड़ चुका है। इन लोगों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि नाव के साथ समुचित राहत मुहैया करवाया जाय। साथ ही आपदा मद से मिलने वाली सहायता भी शीघ्र उपलब्ध करवाने की मांग इन लोगों ने उठाई हैं।