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राष्ट्रपति का बिहार दौरा:20 अक्टूबर को पटना आएंगे कोविंद, राष्ट्रपति बनने पर कहा था- ये बिहार की धरती का कमाल है

पटना10 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ CM नीतीश कुमार।- फाइल

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बिहार के विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए 20 अक्टूबर को आ रहे हैं। राष्ट्रपति का ये बिहार का दूसरा दौरा है। इससे पहले वे नवंबर 2017 में कृषि रोड मैप के उद्घाटन के लिए पटना पहुंचे थे। उसके ठीक 4 साल बाद रामनाथ कोविंद पटना आ रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रामनाथ कोविंद का बिहार से गहरा लगाव रहा है, क्योंकि राज्य के सर्वोच्च पद से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक की यात्रा उन्होंने बिहार से ही की है।

नीतीश ने किया था समर्थन
जब बिहार के राज्यपाल के तौर पर रामनाथ कोविंद काम कर रहे थे, उस समय बिहार में महागठबंधन की सरकार थी। 21 जून 2017 को जब NDA नेतृत्व ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की घोषणा की तो उन्हें पहली बधाई और समर्थन देने वाले शख्स नीतीश कुमार ही थे। उस समय बिहार का महागठबंधन की सरकार थी।

CM नीतीश कुमार उसके नेता थे और RJD के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे। उस समय रामनाथ कोविंद NDA के उम्मीदवार थे, लेकिन नीतीश कुमार तुरंत फूल लेकर राजभवन पहुंचे और उनके लिए अपनी पार्टी के समर्थन की घोषणा कर दी थी।

क्या बोले थे कोविंद
राज्यपाल रहते हुए रामनाथ कोविंद ने विपरीत परिस्थितियों में भी राजभवन और सरकार के रिश्ते को सहज बनाए रखा। यही वजह रही थी कि नीतीश कुमार विपक्ष में रहते हुए भी उनका सम्मान करते थे। बिहार से जाते जाते रामनाथ कोविंद बस इतना ही कहा था कि मैं इस समय कुछ और नहीं कहूंगा, ये बिहार की धरती का कमाल है। मैं बिहार के विकास की कामना करता हूं और यहां के लोगों को बधाई देता हूं।

बिहार की संस्कृति और त्योहारों से जुड़े थे
राज्यपाल रहते वह अक्सर कहा करते थे कि मैं भी बिहारी हूं। राज्यपाल के रूप में काम करते हुए मुझे बिहार के हर वर्ग से जो स्नेह मिला, उसे मैं जीवनभर याद रखूंगा। बिहारीपन ही मेरी पहचान है। अगस्त, 2015 से पहले उनका बिहार से खास वास्ता नहीं था। लेकिन यहां राज्यपाल की भूमिका निभाते हुए उनमें बिहार के इतिहास, संस्कृति, खान-पान, लोकजीवन और तीज-त्योहार अपनाने की छटपटाहट दिखती थी।

रामनाथ कोविंद राज्यपाल के तौर पर पूरे राज्य में खूब घूमते थे ताकि जल्द से जल्द यहां रम जाएं। खास तौर पर बिहार के राजभवन में ही उनको जीवन की सबसे बड़ी खुशी मिली थी कि उन्हें NDA के तरफ से राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया गया था। बाद में वो देश के राष्ट्रपति बने।