पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61765.590.75 %
  • NIFTY18477.050.76 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47184-1.49 %
  • SILVER(MCX 1 KG)62935-0.03 %
  • Business News
  • Local
  • Bihar
  • Bihar Panchayat Election; Lack Of Opponents Exposed In Package Of 1.75 Lakh, Small Pack For Social Media Promotion

पंचायत चुनाव: इमेज बनाने-बिगाड़ने के पैकेज, VIDEO:विधानसभा-लोकसभा चुनाव की तरह होगा सोशल मीडिया वार; दिल्ली और यूपी से आईं चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियां

पटनाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बिहार पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इस बार प्रचार-प्रसार और इमेज बिल्डिंग का काम लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तर्ज पर किया जा रहा है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश की चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियां पूरा जिम्मा ले रही हैं। इससे पंचायत चुनाव में डिजिटल यानी सोशल मीडिया वार तय है। इसके लिए पद के हिसाब से पैकेज तैयार किए गए हैं। प्रत्याशियों की जरूरत और मांग के हिसाब से मोबाइल टैरिफ की तरह और पैकेज को टॉपअप किया जा सकता है। इन एजेंसियों ने पूरे बिहार में अपनी टीम और नेटवर्क तैयार कर लिया है।

चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियां विरोधियों की कमियां उजागर करने और संबंधित प्रत्याशी का प्रमोशन करने के लिए 1.75 लाख रुपए के पैकेज ले रही हैं। हालांकि, यह प्रत्याशी के बजट पर भी निर्भर करता है। कम बजट वाले प्रत्याशी छोटा पैकेज लेकर लेकर सिर्फ सोशल मीडिया प्रमोशन करा रहे हैं। बड़े बजट वाले प्रत्याशी चुनाव में फतह के लिए कई तरीके अपना रहे हैं। जाहिर है पंचायतों में एजेंसियों की चुनावी रणनीति पर प्रत्याशी दांव लगा रहे हैं। एजेंसियां भी क्षेत्र और उनकी जरूरत के हिसाब से चुनावी रणनीति तैयार कर प्रत्याशियों को दे रही हैं।

फिजिकल से डिजिटल की तरफ बढ़े
आजकल ज्यादातर हाथों में स्मार्टफोन है। शहर की तरह गांवों के भी अधिकतर लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। यही कारण है कि 2021 का पंचायत चुनाव भी फिजिकल से डिजिटल की तरफ बढ़ रहा है। प्रत्याशी भी मतदाताओं से सीधे मिलने के बजाय सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। कोरोना काल में यह दूरी मजबूरी है, लेकिन इवेंट कंपनियां इसे अवसर के रूप में देख रही हैं।

कम बजट वालों के लिए भी बड़ा पैकेज
एक चुनाव मैनेजमेंट एजेंसी के राहुल रंजन बताते हैं कि पंचायत चुनाव में हर पद और प्रत्याशी के बजट को ध्यान में रखकर पैकेज तैयार किया गया है। वोटर के साथ बातचीत से लेकर चुनाव में प्रचार की रणनीति तक का पूरा पैकेज है।

पटना के ब्लू टैक ई कॉम प्राइवेट लिमिटेड एजेंसी के एमडी राहुल रंजन का कहना है कि वह लगभग 12% काम उठा चुके हैं। एक लाख से लेकर 2 लाख तक का पैकेज है। कम बजट वालों को भी निराश नहीं किया जाता है। उन्हें उनके बजट के हिसाब से पैकेज और प्रमोशन दिया जा रहा है।

राहुल का कहना है कि वह बेसिक पैकेज में चुनाव प्रक्रिया की पूरी जानकारी के साथ मैनेजमेंट करते हैं, जबकि मेगा पैकेज में टक्कर देने वाले प्रत्याशी की खामियों की पूरी पोल खोली जाती है।

किस पद के प्रत्याशी के लिए कितने का पैकेज

मुखिया1.20 लाख रुपए
पंचायत समिति सदस्य1.50 लाख रुपए
जिला पार्षद1.75 लाख रुपए

1.75 लाख के पैकेज में विरोधी खेमा में सेंधमारी
चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियों का कहना है कि 1.75 लाख रुपए के पैकेज में वह प्रत्याशियों के विरोधियों के खेमे में अपना आदमी लगाते हैं। वह विरोधियों की कमी पता करता है। इसके बाद इन कमियों को पंचायत क्षेत्र में उजागर करते हैं। इसके साथ प्रमोशन और इलेक्शन का हर तरह का मैनेजमेंट इस पैकेज में होता है। राहुल रंजन बताते हैं कि उनके पास 3 बड़े पैकेज हैं। इन्हें जरूरत के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है। 1.75 लाख रुपए का पैकेज अधिकतर पंचायतों में पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें पूरा चुनाव मैनेजमेंट और प्रमोशन देखने के साथ-साथ विरोधियों की कमियां भी उजागर की जाती हैं। ज्यादातर प्रत्याशी इसी पैकेज को चुन रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों ने इसमें प्रमोशन का पैकेज अलग से एड कराया है।

1.75 लाख के पैकेज में A से Z तक सुविधा

  • चुनावी प्रक्रिया की पूरी जानकारी और पूरा प्रबंधन।
  • आचार संहिता की जानकारी और उसके उल्लंघन से बचाने का मैनेजमेंट।
  • पंचायत के हर मतदाता का पूरा डेटा और मूड की पूरी जानकारी।
  • कम खर्च में चुनाव जीतने का पूरा मैनेजमेंट।
  • पोलिंग बूथ की जानकारी से लेकर निर्णायक मतदाता की गणित समझाना।
  • प्रत्याशी की छवि को निखारना और उनके लिए भाषण लिखना।
  • प्रचार सामग्री का निर्माण और छपाई से लेकर कॉन्टेंट तैयार करना।
  • विपक्षी प्रत्याशियों की कमी उजागर कर उसे ट्रेंड कराकर छवि धूमिल करना।
  • चुनाव जीतने के लिए पंचायत की पूरी गणित को समय-समय पर बताना।
  • सोशल मीडिया पर हर दिन किसी टॉपिक पर माहौल बनाना।

पांच साल में दो गुना हो गया बजट
पंचायत चुनाव में बजट दो गुणा हो गया है। 2016 में एक लाख में मुखिया का चुनाव निपटाने वाले प्रत्याशियों का इस बार का बजट ढाई से तीन लाख रुपए तक पहुंच गया है। प्रचार के ट्रेंड के साथ चुनाव का पूरा तरीका बदल गया है। अब सोशल मीडिया प्रमोशन के साथ प्रचार का मॉर्डन तरीका नहीं अपनाने वाले इस बार लड़ाई में खुद को पीछे महसूस कर रहे हैं। पटना के नौबतपुर के रहने वाले राकेश लगातार तीन बार से सरपंच के लिए किस्मत आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि 15 साल पहले 20 हजार में चुनाव लड़ लिए थे लेकिन अब यह बजट 3 लाख पहुंच रहा है। मधुबनी के चंद्रिका प्रसाद का कहना है कि अब चुनाव का ट्रेंड बदल गया है, अब तो सब हाईटेक प्रचार का खेल है जिसके लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।

खबरें और भी हैं...