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बिहार उपचुनाव: जीत-हार के मायने:JDU और RJD के लिए जीत है जरूरी, कांग्रेस में युवा बिग्रेड की साख दांव पर

पटना10 महीने पहले
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बिहार विधानसभा की दो सीटों तारापुर और कुशेश्वरस्थान पर उपचुनाव के नतीजे प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। नतीजों के बाद बिहार की राजनीतिक पार्टियां आगे के लिए अपनी रणनीति तय करेंगी। उपचुनाव में RJD और JDU की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी है तो भाजपा और जदयू की दोस्ती और कांग्रेस की साख की भी परख होगी। जिन दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, वे पहले JDU के पास ही थीं।

JDU के लिए उपचुनाव के मायने
नीतीश कुमार की पार्टी JDU के लिए तो ये सबसे अहम है। वजह है कि बिहार विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से JDU पहले से कमजोर है। जीत सुनिश्चित करने के लिए जदयू के मंत्री संजय झा, अशोक चौधरी समेत तमाम नेता इन दोनों सीटों पर कैंप कर रहे हैं।

अगर हार मिली तो क्या...?
अगर इन दोनों सीटों पर JDU हारती है तो पार्टी के विधायकों की संख्या 43 से घटकर 41 हो जाएगी। BJP के प्रति उसका अविश्ववास और बढेगा, क्योंकि इसका मतलब ये है कि BJP अपने वोट JDU की तरफ टर्न नहीं कर सकी। इसका सीधा असर दोनों पार्टियों के संबंधों पर आनेवाले दिनों में दिख सकता है।

RJD के लिए उपचुनाव के मायने
75 सीटों वाली RJD के लिए संख्या बल के लिहाज से ये उपचुनाव ज्यादा अहम नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार और उनकी पार्टी से उनकी पुरानी जीती हुई सीटें छीनना उसके लिए बड़ी जीत साबित हो सकती है। वजह ये है कि तेजस्वी यादव इस जीत से अपना फायदा करें ना करें, JDU का बड़ा नुकसान कर सकते हैं।

RJD जीतती है तो क्या....?
उपचुनाव में अगर RJD जीतती है तो कांग्रेस को संदेश जाएगा कि बिहार की राजनीति में RJD को कांग्रेस की नहीं, बल्कि कांग्रेस को RJD की जरूरत है। इसके अलावा कांग्रेस के कन्हैया कुमार से मिल रहे यंग फेस चैलेंज के भ्रम को भी वे तोड़ सकते हैं। तेजस्वी यादव के लिए अपने बड़े भाई तेजप्रताप से विवाद से हो रहे नुकसान के आकलन का भी ये बेहतर मौका है। वजह ये है कि तेजप्रताप उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

कांग्रेस के लिए उपचुनाव के मायने
बिहार में 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में उतरी थी। 11 साल बाद फिर से उसने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा चेहरों के जरिए बिहार में नई संभावनाएं तलाशने में जुटी है। कुशेश्वरस्थान से 2020 चुनाव में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, हालांकि तब राजद के साथ वो गठबंधन में थी। इस बार दोनों ही सीटों पर कांग्रेस जीत से ज्यादा अपनी ताकत आंकने के लिए उतरेगी। नतीजों में अगर कांग्रेस की स्थिति संतोषजनक रही तो इसका श्रेय कांग्रेस युवा बिग्रेड को जाएगा और वो आनेवाले समय में भी राजद के सामने मजबूती से खड़ी हो पाएगी, लेकिन अगर वोट नहीं मिले तो फिर से उसे राजद की तरफ ही मुड़ना होगा।

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