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बिहार में शराब पर रार:JDU को छोड़ सभी दल पीने-पिलाने के पक्ष में, मांझी बोले- PM कृषि कानून वापस ले सकते हैं तो CM शराबबंदी क्यों नहीं?

पटना5 महीने पहले
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नालंदा में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत के बाद बिहार में एक बार फिर शराबबंदी कानून का विरोध शुरू हो गया है। विपक्षी पार्टी RJD और कांग्रेस के साथ-साथ नीतीश सरकार की सहयोगी HAM भी इसे लेकर हमलावर है। समय-समय पर BJP भी कानून की समीक्षा करने की मांग कर चुकी है।

लोगों की मौत से नाराज HAM सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा है, 'मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस पर विचार करना चाहिए। जब PM कृषि कानून को वापस ले सकते हैं तो बिहार सरकार शराबबंदी कानून वापस क्यों नहीं ले सकती?' वहीं, RJD ने कहा है, 'बिहार में शराबबंदी कानून फेल है। मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।'

मांझी बार-बार इस कानून को वापस लेने की मांग करते रहे हैं

HAM के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने अपने बयान में मांझी को कोट करते हुए कहा है, 'मांझी बार-बार इस कानून को वापस लेने की मांग करते रहे हैं। जब केंद्र सरकार कृषि कानून को वापस ले सकती है तो बिहार सरकार इस कानून को वापस क्यों नहीं ले सकती?'

HAM की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार पूरे जोश के साथ शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए समाज सुधार अभियान चला रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार का यह अभियान कोरोना की वजह से स्थगित है, लेकिन शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए लगातार सरकार मद्य निषेध कानून को और सख्त बना रही है।

RJD ने कहा- पुनर्विचार करें मुख्यमंत्री

वहीं, RJD प्रवक्ता भाई विरेंद्र ने कहा, 'रोज जहरीली शराब बिहार में बन रही है, लोग सेवन भी कर रहे हैं। मौत भी हो रही है। सैकड़ों मौतें जहरीली शराब से हुई है और मुख्यमंत्री टुकुर-टुकुर देख रहे हैं। वे जिद पर अड़े हैं। शराबबंदी कानून पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और पुनर्विचार करना चाहिए।'

प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव कहते हैं, 'बिहार में पूरी तरह से शराबबंदी कानून फेल है। जब नीतीश कुमार के गृह जिले में ऐसा हाल है तो बाकी जिलों का क्या हाल होगा, यह किसी से छुपा नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए।'

गलत बयान देने वाले उस बड़े अफसर की गिरफ्तारी होनी चाहिए

संजय जायसवाल ने लिखा है कि नालंदा जिले में जहरीली शराब से 11 मौतें हो चुकी हैं। परसों मुझसे जहरीली शराब पर जदयू प्रवक्ता ने प्रश्न पूछा था। आज मेरा प्रश्न उस दल से है कि क्या इन 11 लोगों के पूरे परिवार को जेल भेजा जाएगा? क्योंकि अगर कोई जाकर उनके यहां सांत्वना देता तो आपके लिए अपराध है। अगर शराबबंदी लागू करना है तो सबसे पहले नालंदा प्रशासन द्वारा गलत बयान देने वाले उस बड़े अफसर की गिरफ्तारी होनी चाहिए। क्योंकि प्रशासन का काम जिला चलाना होता है ना कि जहरीली शराब से मृत व्यक्तियों को अजीबोगरीब बीमारी से मरने का कारण बताना है। यह साफ बताता है कि प्रशासन स्वयं शराब माफिया से मिला हुआ है और उनकी करतूतों को छुपाने का काम कर रहा है।

BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल।
BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल।

समय-समय पर BJP का भी रहा है अलग रूख

शराबबंदी कानून पर समय-समय पर BJP के नेता भी बयान देते रहे हैं। गोपालगंज और बेतिया में हुई शराबकांड पर नवंबर 2021 में BJP प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने भी शराबबंदी कानून पर निशाना साधा था। उन्होंने पुलिस प्रशासन और शराब माफिया के गठजोड़ का खुलासा करते हुए शराबबंदी कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। हालांकि, तब राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने शराबबंदी कानून के पक्ष में बयान देकर मामले को ठंडा किया था।

वहीं, शुक्रवार को अपने फेसबुक पोस्ट में डॉ. जायसवाल ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की बात कही है। पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि सरकार को शराबबंदी की समीक्षा करनी चाहिए। सरकार हाथ पर हाथ रख कर बैठी है और शराब माफिया प्रदेश में अपना अवैध कारोबार फैला रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'जिस तरीके से शराबबंदी कानून को लागू किया गया वो हास्यास्पद है। गरीब लोगों को जेल में बंद किया जा रहा है और शराब का काला कारोबार करने वाले लोगों तक पुलिस पहुंच नहीं पा रही है। शराबबंदी कानून सिर्फ कागजों में सीमित दिखाई पड़ रही है। इस कानून में कई त्रुटियां हैं।'

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी मैदान में कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फैसले में आप सभी साथ दें। जिसमें भाजपा भी शामिल है। भाजपा विधायक दल के लोग नीतीश कुमार के इस फैसले के साथ हैं। दोनों हाथ उठाए थे सदन में। संकल्प खा रहे हैं किरिया खा रहे हैं। आप संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हैं आपको इस भूमिका में आना चाहिए कि यह शराबबंदी कैसे सफल होगा। आपको कार्यशाला करना चाहिए। अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करते। प्रधानमंत्री ने ये बात उस समय कही थी जब प्रदेश में महागठबंधन की सरकार थी और उन्होंने कहा था कि सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए। आपको आलोचना के लिए नहीं रखा गया है। समीक्षा के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।

कांग्रेस बोली- तिगुनी कीमत पर बिके शराब

नालंदा में हुई मौत के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा एक बार फिर से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग दुहराई है। उन्होंने कहा है कि शराब कंट्रोल नहीं हो रही है तो शराबबंदी खत्म हो और तिगुनी कीमत पर बिके। इसे पैसे से कल कारखाने लगाए जाएं और रोजगार दिए जाएं।