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चैरिटी या चिट फंड?:आई बैंक के लिए 22 लाख मिला, 4 साल बाद लाैटाया; फर्जीवाड़ा और लापरवाही से है पुराना नाता

मुजफ्फरपुर9 महीने पहलेलेखक: धनंजय मिश्र
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चैरिटी के नाम पर मोतियाबिंद का नि:शुल्क ऑपरेशन करने के दावे करने वाला जूरन छपरा रोड 2 स्थित आई हॉस्पिटल का फर्जीवाड़ा और लापरवाही से पुराना नाता है। अस्पताल प्रबंधन ने तत्कालीन कमिश्नर से आई बैंक स्थापना के नाम पर दबाव बनवा कर स्वास्थ्य विभाग से 22 लाख रुपए लिए। सिविल सर्जन डॉ रामयश राम और एसीएमओ सह अंधापन डीपीएम डॉ यूएल मंडल ने जब आई हॉस्पिटल को बिना पुख्ता कागजात के रुपए देने से इनकार कर दिया। तब कमिश्नर ने इन दोनों अधिकारियों को तलब कर लिया। कमिश्नर के दबाव के बाद विभाग ने आई हॉस्पिटल को 22 लाख रुपए दे दिए।

लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने लाइसेंस मिलने के बाद भी आई बैंक स्थापित नहीं किया। तब स्वास्थ्य विभाग ने रुपए वापस करने काे दर्जनों चिट्ठियां लिखी। इस बीच कमिश्नर का तबादला हो गया। स्वास्थ्य विभाग ने रुपए वापस करने काे दबाव बढ़ा दिया। अंतत: 4 साल बाद आई हॉस्पिटल ने स्वास्थ्य विभाग को 22 लाख रुपए लौटा दिए। लेकिन, इस राशि पर बैंक से मिले ब्याज के रुपए अस्पताल ने हड़प लिए।

स्वयंसेवी संस्था से हाेती है फंडिंग, अब हाेगी जांच
बताया जाता है कि आई हॉस्पिटल को चैरिटी के नाम पर देश-विदेश के स्वयंसेवी संस्थानों से अनुदान मिलता है। नि:शुल्क सर्जरी के नाम पर कितने स्वयं सेवी संस्थानों से फंड मिला, इसकी भी जांच हाेगी। सीएस ने कहा कि अस्पताल में 3 साल में ऑपरेशन वाले सभी मरीजों और संबंधित मामलों की जांच हाेगी। अस्पताल के स्टाफ और उनकी सैलरी जांच के दायरे में है। हालांकि, आई हॉस्पिटल के सचिव दिलीप जालान ने बाहरी फंडिंग से इनकार किया है।

सरकारी मदद लेेने में भी बरती जा रही गड़बड़ी
नि:शुल्क ऑपरेशन वाले मरीजों के फर्जी नाम-पते पर स्वास्थ्य विभाग से अनुदान लेने का खुलासा दैनिक भास्कर ने 23 अक्टूबर को किया था। 2000 से अधिक मरीजों के फर्जी नाम-पते के कारण तब स्वास्थ विभाग ने अनुदान रोक दिया।

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