पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्‍कर एक्सक्‍लूसिव:मिट्टी की मजबूती पर रिसर्च करेगा एमआईटी, ताकि तेज भूकंप में भी घर ढहें नहीं

मुजफ्फरपुर4 महीने पहलेलेखक: प्रशांत कुमार
  • कॉपी लिंक
अति संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में स्थित मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार इलाके की मिट्टी की मजबूती के लिए एमआईटी अब रिसर्च करेगा।(फाइल फोटो) - Money Bhaskar
अति संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में स्थित मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार इलाके की मिट्टी की मजबूती के लिए एमआईटी अब रिसर्च करेगा।(फाइल फोटो)

अति संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में स्थित मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार इलाके की मिट्टी की मजबूती के लिए एमआईटी अब रिसर्च करेगा। अधिक तीव्रता वाले भूकंप में भी यहां मकानों-निर्माणों को गिरने-ढहने से बचाने के लिए मिट्टी के कणों का आपस में मजबूत पकड़ बनाने की तकनीक पर शोध होगा। इसके लिए संस्थान की ओर से डिजास्टर रेजीलिएंट एंड रिसर्च फाउंडेशन से करार होगा। इसके लिए एमआईटी से प्रपोजल भेजा जा चुका है। संस्था के अर्थक्वेक सेफ्टी क्लीनिक के इंचार्ज प्रो. विजय कुमार ने बताया, जिले में कई स्थानों की मिट्टी का लिक्युफैक्शन एनालिसिस किया गया।

इस प्रक्रिया में मिट्टी का स्टैंडर्ड पेनिट्रेशन टेस्ट हुआ। जांच के लिए जमीन के अंदर सीधे 55-60 फीट तक नीचे छेद करते हुए 10-10 मीटर पर मिट्टी निकालकर इसका नमूना लिया गया। अध्ययन में पाया गया कि अधिकतर स्थानों की मिट्टी ऐसी है कि अगर 8 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो वहां की मिट्टी पानी की तरह बह जाएगी, जिससे जान-माल का इतना नुकसान होगा, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि नदी के किनारे स्थित होने के कारण मिट्टी में हमेशा पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इस मिट्टी के दो कणों के बीच में मजबूती अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में अधिक तीव्रता वाले भूकंप के झटके में दो पार्टिकल अलग हो जाएंगे और खाली जगह में पानी चला जाएगा। इसकी मात्रा इतनी अधिक होगी कि मिट्टी इस दबाव को नहीं सहन कर सकेगी और यह पानी पूरे मिट्टी को बहाकर ले जाएगा।

प्रोजेक्ट में फाइनल के बच्चे शामिल होंगे

  • संस्थान से करार होने के बाद एमआईटी को भूकंप से लेकर अन्य आपदाओं से जुड़ी अद्यतन अध्ययन की जानकारी आसानी से मिलेगी। कारण कि वहां रिसर्च और विदेशी संस्थानों से मिलकर प्रोजेक्ट पर काम होते हैं।
  • इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर के बच्चे भी आपदा खासकर भूकंप से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर सकेंगे। उन्हें इसके लिए बेहतर संसाधन, संभावनाएं और उपकरण मिल सकेंगे।
  • वहां के एक्सपर्ट को एमआईटी बुलाकर रिसर्च टीम मिलकर नई तकनीक पर काम कर सकेगी।

भास्कर नाॅलेज... अति संवेदनशील क्षेत्र में ये शामिल
उत्तर बिहार, अंडमान नीकाेबार द्वीप समूह, उत्तराखंड, गुजरात के कुछ हिस्से, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर का कुछ हिस्सा व पूर्वाेत्तर भारत शामिल है।

अभी रिसर्च करने में हो रही हैं ये परेशानियां
एमआईटी के अर्थक्वेक सेफ्टी क्लीनिक में फिलहाल इतने उपकरण या मॉडर्न टेक्नोलॉजी की सुविधा उपलब्ध नहीं है जिससे किसी जमीन या स्ट्रक्चर वाले जमीन का सिस्मिक डाटा यानी भूकंपीय डाटा हासिल किया जा सके। माइक्रोट्रेमर, डायनेमिक एनालिसिस में जरूरत पड़ने वाले यंत्र एसएएसएआई नहीं है।

निर्माण की मजबूती के लिए अभी इन तकनीक का लिया जा रहा है सहारा
प्रो. विजय कुमार ने बताया, निर्माण की मजबूती के लिए फिलहाल दो तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पहला है पाइलिंग। इसमें जमीन के अंदर पाइलिंग होती है। दूसरा सॉयल एस्टेबलाइजेशन। इसमें मिट्टी में अन्य दूसरे तरह के मैटेरियल मिलाकर इसको मजबूत बनाया जाता है। इस पर भी एमआईटी में प्रो. आकाश प्रियदर्शी के नेतृत्व में काम कराया जा रहा है। इसमें दो स्थानों की मिट्टी को मिलाकर टेस्ट किया गया। इसमें मिट्टी की मजबूती सामने आई थी।

खबरें और भी हैं...