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प्रदूषण का कहर:पिछले साल 365 में 93 दिन शहरवासियों ने सांसों में हवा नहीं, जहर लिया

मुजफ्फरपुर4 महीने पहलेलेखक: राजपाल कुमार
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वर्ष 2021 में मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा 93 दिन व पटना में 67 दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स( एक्यूआई) 200 से 500 के बीच रहा। - Money Bhaskar
वर्ष 2021 में मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा 93 दिन व पटना में 67 दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स( एक्यूआई) 200 से 500 के बीच रहा।

वर्ष 2021 में मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा 93 दिन व पटना में 67 दिन ऐसे रहे, जिस दौरान लोग जहरीली हवा में सांस लेते रहे। वहीं, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में 71 दिन, कोलकाता में 53 दिन और हावड़ा में 51 दिन वायु गुणवत्ता खराब थी। इन दिनों में इन शहरों की वायु गुणवत्ता खराब व बेहद खराब श्रेणी की रही। इस दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स( एक्यूआई) 200 से 500 के बीच रहा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा जारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

2020 में लॉकडाउन के कारण पीएम 2.5 के स्तर में गिरावट देखी गई थी। लेकिन, 2021 में पीएम 2.5 के वार्षिक स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। जिससे प्रदूषण का स्तर दोबारा बढ़ गया। पूर्वी भारत में 2021 में सर्वाधिक प्रदूषित शहर पश्चिम बंगाल का दुर्गापुर रहा। यहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। मुजफ्फरपुर में पीएम 2.5 का वार्षिक औसत 78 और पटना में 73 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।

शाम में बढ़ जाती है नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा
रिपोर्ट के मुताबिक, सभी शहरों में शाम 6 से रात 8 बजे के बीच नाइट्रोजन डाइऑक्साइड(एनओ2) की मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई। मुजफ्फरपुर और आसनसोल में दोपहर की तुलना में शाम को इसके स्तर में 3 से 3.5 गुना की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसा दोपहर बाद भीड़-भाड़ बढ़ने व वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण हुआ। हालांकि, दिसंबर में मुजफ्फरपुर, हावड़ा और हाजीपुर में एनओ2 की मात्रा में कमी दर्ज की गई।

सर्दियों में इसलिए बढ़ता है प्रदूषण
नवंबर की शुरुआत में उत्तर भारत को अपनी चपेट में लेने वाली शीतकालीन धुंध दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में पूर्व की ओर बढ़ना शुरू कर देती है। जिसका असर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर पड़ता है। इस समय स्थानीय प्रदूषण जो पहले से ज्यादा होता है, उसमें मिलने से प्रदूषण और बढ़ जाता है।

धूल कण व धुएं को करना होगा नियंत्रित
सीएसई के मुताबिक, प्रदूषण कम करने को मुजफ्फरपुर को वार्षिक पीएम 2.5 स्तर में 49 फीसदी कटौती करनी होगी। वहीं, शहर में बेतरतीब हो रहे निर्माण के कारण उड़ते धूल, नाले से निकले गाद, गिट्‌टी-सीमेंट की खुले में ढुलाई, ईंट-भट्‌टा व कल-कारखानों से निकलने वाले धुएं, 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना होगा।

नए साल में शहर का प्रदूषण स्तर लगातार बेहद खराब कैटेगरी में
नए साल में लगातार शहर का प्रदूषण स्तर खराब श्रेणी में रहा है। रविवार को नए साल के 16वें दिन भी शहर का एक्यूआई यानी प्रदूषण स्तर 250 से अधिक दर्ज किया गया। इससे पहले 15 जनवरी को एक्यूआई 280 दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी प्रदूषण स्तर का खराब, बेहद खराब व गंभीर श्रेणी में होना सामान्य लोगों के लिए भी खतरनाक है। इस श्रेणी का वायु प्रदूषण गंभीर हृदय और श्वसन संबंधी बीमारी, हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालने के अलावा शरीर में ऑक्सीजन की कमी का कारण तक बन सकती है। लोग अवसाद के शिकार भी हो सकते हैं।

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