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खुशी अपहरण कांड:एसएसपी की दलील से कोर्ट असंतुष्ट सीबीआई को रिकॉर्ड सौंपने का आदेश

मुजफ्फरपुर2 महीने पहले
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मासूम खुशी फाइल फोटो। - Money Bhaskar
मासूम खुशी फाइल फोटो।

बहुचर्चित नवरूणा कांड के बाद सीबीआई जल्द ही मुजफ्फरपुर में खुशी अपहरण कांड की जांच का जिम्मा संभालेगी। लक्ष्मी चौक के निकट से ट्रेस लेस हुई पांच साल की मासूम खुशी अपहरण कांड की शुक्रवार काे हाईकोर्ट ने सुनवार्ई के बाद अगली तिथि पर सीबीआई के वकील काे बुलाया है। अपहृत खुशी के अधिवक्ता काे हाईकोर्ट ने सीबीआई और सेंट्रल सीएफएसएल काे इस मामले में प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया है।

14 अक्टूबर तक खुशी के अधिवक्ता सीबीआई काे इस मामले से जुड़े कागजात साैंपेंगे। ब्रह्मपुरा थाने के लक्ष्मी चौक स्थित सब्जी विक्रेता राजन साह की पुत्री खुशी के अपहरण कांड की हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई की। अधिवक्ता ओम प्रकाश कुमार ने खुशी कुमारी का पक्ष रखा। जबकि, मुजफ्फरपुर एसएसपी वर्चुअल सुनवाई के दाैरान उपस्थित हुए।

अपहृता के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि एसएसपी मुजफ्फरपुर द्वारा आजतक सिर्फ कागजी कार्रवाई की जा रही है। लगभग 3 महीने से सिर्फ पोलीग्राफी टेस्ट का बहाना बना कर कोर्ट का समय बर्बाद किया जा रहा है।

पिछले दिनाें कोर्ट काे बताया था कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जिसमें संदिग्ध राहुल कुमार की आवाज है। वह अपहृत खुशी के बारे में जानता है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि ऑडियो क्लिप एसएसपी को दिया जाए। एसएसपी ऑडियो की पुष्टि कर कार्रवाई करें। लेकिन, एसएसपी द्वारा हाईकोर्ट में फाइल रिकॉर्ड में ऑडियो क्लिप का कोई उल्लेख नहीं है।

तीन माह से पोलीग्राफी टेस्ट का पुलिस दे रही दलील

14 तक काेर्ट में कागजात मुहैया करवाने का निर्देश, 17 काे सुनवाई

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हार्डकोर्ट ने पुलिस को बनाया था प्रतिवादी

मामले की सुनवाई के बाद हार्डकोर्ट ने पाया कि इस कांड का उद्भेदन अब मुजफ्फरपुर पुलिस से संभव नहीं दिख रहा। पूर्व में हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस काे प्रतिवादी बनाया था, सीबीआई काे नहीं। अब काेर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई और सीएफएसएल काे प्रतिवादी बनाया जाएगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि 14 अक्टूबर तक सभी कागजात सीबीआई को मुहैया करवाई जाए एवं 17 अक्टूबर काे सीबीआई के वकील भी कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।

दाे लाेगाें के पोलीग्राफी टेस्ट कराने की मिली थी अनुमति
ब्रह्मपुरा पुलिस के अनुरोध पर काेर्ट बैरिया के फल विक्रेता राहुल कुमार और जेल में बंद अमन कुमार के पोलीग्राफी टेस्ट की अनुमति दी थी। काेर्ट के आदेश के बावजूद संदिग्धों का पुलिस पोलीग्राफी टेस्ट नहीं करा सकी है।

यह है मामला
पिछले साल सरस्वती पूजा के दिन खेलते-खेलते खुशी ट्रेस लेस हाे गई। ब्रह्मपुरा थाने में इसकी प्राथमिकी दर्ज हुई। पुलिस की कार्यशैली से असंतुष्ट हाेने पर राजन साह ने पटना हाइकोर्ट के अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार के माध्यम से हाइकोर्ट में याचिका दायर किया था।

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