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बगहा में 12 KG का अजगर पकड़ाया:पीपल के पेड़ पर चढ़ा था 9 फीट का अजगर, 2 घंटे कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

बगहाएक महीने पहले
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अजगर को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित मदनपुर क्षेत्र में छोड़ दिया।  - Money Bhaskar
अजगर को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित मदनपुर क्षेत्र में छोड़ दिया। 

बगहा नगर के मलकौली स्थित वार्ड नं 02 में सोमवार सुबह अजगर सांप को वन विभाग के द्वारा रेस्क्यू किया गया। यह रेस्क्यू लगातार 2 घंटे तक चला। 2 घंटे कड़ी मशक्कत के साथ अजगर को किसी तरह पकड़ा गया। इलाके में 9 फीट का अजगर घुस गया था। करीब 12 किलो वजनी अजगर कई दिनों से पीपल के पेड़ के इर्द-गिर्द दिखाई दे रहा था। लेकिन कुछ ही समय में गायब हो जाता था। अजगर के बार-बार निकलने और दिखने से लोगो के अंदर डर बन गया था। रविवार की शाम अजगर को पीपल के पेड़ के पास देखा गया। जिसके बाद लोगों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन विभाग की टीम जब तक इस स्थान पर पहुंचती तब तक अजगर पीपल के पेड़ पर चढ़ गया था।

अजगर के पेड़ पर चढ़ जाने के कारण हुई परेशानी

शहर में आया अजगर पीपल के पेड़ पर चढ गया था। वन विभाग की टीम ने बताया कि पीपल के पेड़ पर चिड़ियों का बसेरा है। उनके अंडे व चिड़िया को आहार बनाने के लिए पीपल के पेड़ को अजगर अपना बसेरा बनाया हुआ था। वन विभाग के कर्मियों ने लोगों से कहा कि वन्यजीव को देख उसके साथ छेड़छाड़ ना करें तथा इसकी सूचना तत्काल वन कार्यालय को दें। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि लोग सजग और सतर्क रहें। रेस्क्यू किया गया अजगर को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित मदनपुर क्षेत्र में छोड़ दिया।

विगत 3 महीने में एक दर्जन जंगली जानवरों को किया गया है रेस्क्यू

भीषण गर्मी तथा लगातार हो रही बारिश के कारण वाल्मीकिनगर के रिहायशी इलाकों में वन्यजीवों के निकलने का सिलसिला जारी है। रिहायशी इलाके में कभी अजगर तो कभी मगरमच्छ आए दिन दिखाई दे जाते हैं । जिससे लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। लोगों के अंदर भय व्याप्त हो जाता है। विगत तीन महीने में वीटीआर से बाहर आए एक दर्जन मगरमच्छों को रेस्क्यू कार सुरक्षित गंडक नदी में छोड़ा गया है। रामनगर, बगहा व भैरोगंज के विभिन्न पोखरा से इन मगरमच्छों का सफल रेस्क्यू किया गया। बताते चलें कि जैसे ही बारिश की सीजन शुरू होती है उसके साथ ही जंगली जानवर व जीवों का पलायन रिहायशी इलाकों की तरफ होने लगता है। यह सिलसिला जाड़े का सीजन तक चलता है।

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