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आजादी का उत्सव:नर्मदेश्वर कुटी में ही आजादी की लड़ाई के लिए बनती थी योजनाएं

मधुबनी2 महीने पहले
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मधवापुर में ध्वस्त हाे रहा स्वाधीनता सेनानियों का संघर्ष स्थल बाबा नर्मदेश्वर स्थान कुटी। - Money Bhaskar
मधवापुर में ध्वस्त हाे रहा स्वाधीनता सेनानियों का संघर्ष स्थल बाबा नर्मदेश्वर स्थान कुटी।
  • 1942 में स्वतंत्रता सेनानियों ने मधवापुर थाने काे फूंक दिया था

हमारा देश स्वतंत्रता दिवस के 75वें वर्ष काे आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है। आम अवाम को तिरंगा से परिचित कराने के लिए 13 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन, भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित मधवापुर की भावी पीढ़ी इस बात से अनभिज्ञ हैं कि ब्रिटिश हुकूमत को परास्त कर देश को आजादी दिलाने में यहां की धरती एवं महापुरुषों, सपूतों की कितनी अहम भूमिका रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे यहां के बाबा नर्मदेश्वर स्थान कुटी की पहचान धार्मिक के साथ ऐतिहासिक स्थल के रूप में भी है। इसी कुटी को अपनी शरणस्थली बनाकर धकजरी निवासी पं. गणेश चंद्र झा के नेतृत्व में 1942 में इलाके के दर्जनों सपूतों ने स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई को अंजाम दिया था। यहीं से ब्रिटिश हुकूमत के क्रूर सिपाहियों ने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में ठूंसा था। इससे पहले बारी-बारी से सबके घर को आग के हवाले कर परिजनों को प्रताड़ित किया गया था। इन स्वतंत्रता सेनानियाें ने ब्रिटिश हुकूमत काे डराया : रामपुर के कमलाकांत मिश्र (वैद्यजी), हरिकांत मिश्र, खेदारू ठाकुर, महावीर मिश्र, मधवापुर के सुबदारी साह, वासुदेव साह, मो. यासीन, मुकुंद लाल दास, गणेश प्रसाद गुप्ता, शीतल प्रसाद गुप्ता, बिहारी के तेजनारायण लाल दास, वासुकी के राम प्रकाश चौधरी जैसे विभूतियाें अंग्रेज सरकार काे हिला कर रख दिया था। इन सेनानियों ने 1942 में ब्रिटिश हुकूमत के सामने मधवापुर थाने को जलाया था। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत के इशारे पर इन लोगों के घर और खलिहान को जलवा दिया और सबको जेल में ठूंस दिया गया था।

शतक पूरा कर चुके सबसे बुजुर्ग झींगुर झा ने बताया कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस तो यहां के लोग जश्न की तरह मनाते हैं। लेकिन, इस धरती के महत्व से भावी पीढ़ी आजतक बेखबर है। बताया कि मधवापुर की यह कुटी ऐतिहासिक है। लेकिन, इसके महत्व और अस्मिता को आज के युवक नहीं समझ रहे हैं। बल्कि, उनलोगों के उत्तराधिकारी भी नहीं समझ रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से इस स्थल को वीर महापुरुषों के संघर्ष स्थल के रूप में चिह्नित व घोषित कर देश के लिए कारावास की सजा काट कर बलिदान देने वाले उन महापुरुषों की याद में इसे विकसित करने मांग की है। इन्होंने पंचायत के युवा पीढ़ी से राष्ट्रीय पर्व व उन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर नमन करने की अपील की है।

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