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खुद से एक-एक ईंट जोड़कर बनाया आशियाना:पति के जाने के बाद 5 बच्चों का पालन-पोषण किया, एक बेटे और बेटी की शादी भी करवाई

मधुबनी2 महीने पहले
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अपने हुनर से नजमुल राजमिस्त्री बन गई।  - Money Bhaskar
अपने हुनर से नजमुल राजमिस्त्री बन गई। 

मधुबनी की नजमुल आज लोगों के मिसाल बन गई है। वह न सिर्फ पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रही है। एक-एक ईंट जोड़कर न सिर्फ उसने अपना आशियाना खड़ा किया। बल्कि 5 बच्चों का भरण-पोषण कर परिवार चला रही है। 2007 में पति के जाने के बाद वह टूट चुकी थी। छोटी-छोटी बार पर फफक पड़ती थी। लेकिन पांच बच्चों का मुंह देख खुद को संभाला। इसके बाद घर से बाहर निकली और मजदूरी करने लगी। दुनिया-समाज की परवाह किए बिना वह रोज काम पर जाती। धीरे-धीरे अपने हुनर से वह राजमिस्त्री बन गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भवण निर्माण में मजदूरी करते-करते लोग उसके हुनर का कायल हो गए। उसे और अधिक काम मिलने लगा। पति का सपना था कि परिवार पक्के के मकान में रहे। लेकिन समय से पहले वह दुनिया छोड़ चला गया। पति के सपने को पूरे करने के लिए नजमुल खातून के पास पैसे नहीं थे। राजमिस्त्री का काम कर पैसे तो आ जाते थे लेकिन यह कमाई पांच बच्चों के पालन पोषण और पढ़ाई-लिखाई पर खर्च हो जाती थी।

इसके बावजूद नजमुल हार नहीं मानी। खुद से अपने पति का सपना पूरा करने का वादा किया। इसके बाद खुद से एक-एक ईंट जोड़ी। देखते ही देखते बना दिया अपना आशियाना। इसके बाद एक बेटे और एक बेटी की शादी भी की। अब बेटा भी परिवार चलाने में मदद करता है। वह काम छोड़ने के लिए कहता भी है लेकिन नजमुल नहीं मानती।

यही मकान नजमुल खातून ने खुद से बनाया।
यही मकान नजमुल खातून ने खुद से बनाया।

नजमुल खातून ने बताया कि मेरी शादी 15 वर्ष की उम्र में ही हो गई थी। इसके बाद वह अपने ससुराल आई उसके पति पंवरिया का काम करता था। वह एक कलाकार था वह नाचता गाता था, इसमें उसे ₹50 से लेकर ₹100 तक काम आता था। 2007 में अचानक मेरे पति की तबीयत खराब हो गई और उसी वर्ष उनका देहांत हो गया। इसके बाद मैं रोती बिलखती रहती था। घर वालों ने भी मेरा साथ नहीं दिया और बोलने लगा कि तुम काम करो। बच्चे का भरण पोषण कैसे करोगी। इसके बाद मैं लेबर का काम करने के लिए घर से बाहर निकली। कुछ वर्षों तक लेबर का काम की उसके बाद मैं राजमिस्त्री का काम करना शुरू कर दिया। राजमिस्त्री के काम से ही मैंने अपने बच्चे का भरण पोषण किया एक बेटी और एक लड़के का शादी भी की। उन्होंने कहा कि कौन कहता है कि महिलाएं परिवार नहीं चला सकती हैं। अगर साहस और हिम्मत हो महिलाएं भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं।