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  • In 1895, The British Viceroy Lord Elgin Had Done Pind Daan In Gaya, The Viceroy Had Also Visited The Mahabodhi Temple, Took Information About The Temple Dispute Going On At That Time.

पितृपक्ष विशेष:1895 में अंग्रेज वायसराय लार्ड एल्गिन ने गया में किया था पिंडदान, वायसराय ने महाबोधि मंदिर का भी किया था भ्रमण, उस समय चल रहे मंदिर विवाद की ली जानकारी

गयाएक महीने पहलेलेखक: राजीव कुमार
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गया की सड़कों पर 30 मार्च 1895 को लार्ड एल्गिन की बग्घी की सवारी को देखते नागरिक - Money Bhaskar
गया की सड़कों पर 30 मार्च 1895 को लार्ड एल्गिन की बग्घी की सवारी को देखते नागरिक
  • आबनूस की लकड़ी और चांदी से बने संदूक में अभिनंदन पत्र भेंट किया गया

मृत्यु के बाद आत्मा के अस्तित्व को कुछ विचारक मानते हैं, तो कुछ नहीं। सनातन धर्म में आत्मा की सत्ता को स्वीकार किया जाता है व कई कर्मकांड उससे संबंधित हैं। उन्हीं कर्मकांडों में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति पिंडदान है। इसके पीछे आत्मा की सत्ता को स्वीकार करते हुए, उसकी मुक्ति की कामना है।

अंग्रेज सहित अन्य कई देश के श्रद्धालु भी इस आस्था को मानते हैं और कई बार उन्हें गया में पूर्वजों के लिए अनुष्ठान करते देखा जाता है। आजादी से पहले अंग्रेज वायसराय लार्ड एल्गिन ने गया में अपने पूर्वजों की मुक्ति को पिंडदान किया था। 31 मार्च 1895 को विष्णुपद मंदिर परिसर में यह अनुष्ठान हुआ था।

यह उनकी निजी यात्रा थी, जिसका मकसद अपने पूर्वजों के लिए अनुष्ठान करना व गया के मंदिरों को देखना था। वे दो दिनों की यात्रा पर 30 मार्च 1895 को गया पहुंचे थे। गया के तत्कालीन डीएम डीजे मैकफर्सन के आवास पर उनका अभिनंदन किया गया था, जिसमें नगर निगम के तत्कालीन उपाध्यक्ष नंद किशोर लाल ने अभिनंदन पत्र पढ़ा था।

यह गया जिला के सभी नागरिकों की ओर से भेंट किया गया था। अपने संबोधन के दौरान लाल ने हिंदु-मुस्लिम के संबंधों का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने डीएम मैकफर्सन की प्रशंसा करते हुए कहा कि धार्मिक विवादों का प्रायः निपटारा होता है। दोनों समुदायों के बीच सहिष्णु संबंधों का जिक्र किया गया।

इस मौके पर गया के तत्कालीन डीएम के अलावा प्रमंडलीय आयुक्त इलियट, बोधगया महंत कृष्ण दयाल गिरि सहित अन्य सम्मानित नागरिक मौजूद थे। आबनूस की लकड़ी व चांदी से बने संदूक में अभिनंदन पत्र भेंट किया गया था। इसपर गया के ऐतिहासिक मंदिरों की आकृति थीं। उक्त अभिनंदन पत्र को तत्कालीन गया नगर निगम के उपाध्यक्ष नंद किशोर लाल ने लिखा व पढ़ा था।

महाबोधि मंदिर का किया मुआयना
30 मार्च 1895 के दोपहर को ही नागरिक अभिनंदन के बाद वायसराय लार्ड एल्गिन ने बोधगया में महाबोधि मंदिर का निरीक्षण किया। वे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच समय निकालकर महाबोधि मंदिर किसी भी संभावित धार्मिक भेदभाव के आरोप को रोकने गए थे। महंत कृष्ण दयाल गिरि ने वहां उनका स्वागत किया, जो गया से ही उनके साथ आए थे।

धर्मपाल-मठ विवाद का उठा मुद्दा
नगर पालिका के उपाध्यक्ष लाल ने बोधगया मठ व अनागारिक धर्मपाल के बीच चल रही कानूनी लड़ाई का जिक्र किया। लाल नगरपालिका के उपाध्यक्ष के साथ अनागारिक धर्मपाल के कानूनी सलाहकार भी थे। अनागारिक धर्मपाल महाबोधि मंदिर मुक्ति को लेकर बोधगया मठ से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। लाल ने अपने नागरिक संबोधन के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाकर इस कानूनी विवाद की जानकारी दी थी।

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