पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57858.150.64 %
  • NIFTY17277.950.75 %
  • GOLD(MCX 10 GM)486870.08 %
  • SILVER(MCX 1 KG)63687-1.21 %
  • Business News
  • Local
  • Bihar
  • Bhagalpur
  • Mayor Said Municipal Commissioner Has Met With Rival Councilors; Prafulla Belle Working According To The Rules Of The Corporation

नगर निगम की राजनीति फिर गरमाई:मेयर ने कहा-विराेधी पार्षदाें से मिले हुए हैं नगर आयुक्त; प्रफुल्ल बाेले-निगम के नियम के हिसाब से कर रहे हैं काम

भागलपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अविश्वास प्रस्ताव का पत्र लेतीं मेयर सीमा साहा। उनके साथ बैठे पार्षद सदानंद चाैरसिया व दिनेश तांती। - Money Bhaskar
अविश्वास प्रस्ताव का पत्र लेतीं मेयर सीमा साहा। उनके साथ बैठे पार्षद सदानंद चाैरसिया व दिनेश तांती।

मेयर सीमा साहा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी के बीच नगर निगम की राजनीति राेज गरमा रही है। शुक्रवार काे मेयर ने पार्षदाें द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन की काॅपी काे रिसीव किया। नगर आयुक्त प्रफुल्ल चंद्र यादव ने एक दिन पहले भी काॅपी उन्हें भेजी थी, लेकिन उन्हाेंने वापस कर दिया था। शुक्रवार काे उन्हाेंने निगम के एक्ट के साथ काॅपी मांगी, जाे उन्हें दे दी गई। मेयर ने काॅपी लेने के बाद नगर आयुक्त व अविश्वास प्रस्ताव लगाने वाले पार्षदाें की अगुवाई करने वाले संजय सिन्हा पर आराेपाें की झड़ी लगा दी।

उन्हाेंने संजय सिन्हा काे दागी बताया। फिर कहा कि नगर आयुक्त पिछले तीन महीने से हमारे खिलाफ राजनीति कर रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में उनका भी हाथ है। वे विराेधी पार्षदाें से मिले हुए हैं। उन्हें पहचानने में हमने भूल कर दी। जबकि नगर आयुक्त का कहना है कि उन्हाेंने वही किया है जाे निगम का एक्ट कहता है।

मेयर के किसी भी आराेप पर उन्हें काेई जबाव नहीं देना है। मेयर सीमा साहा दावा है कि अभी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। 9 जून 2017 काे मेयर का चुनाव हुआ था। 9 दिसंबर, 2020 काे ही हमने विश्वास मत हासिल किया था। इस हिसाब से 10 दिसंबर से हमने फिर से काम ही शुरू किया है। चुनाव से छह माह पूर्व यह नहीं लाया जा सकता है। इस मामले वह अपने वकील से मशविरा करेंगी कि कब इस पर बैठक बुलानी हाेगी।

माेल-भाव हुआ शुरू, पार्षदाें काे मिलने लगा ऑफर
जानकार सूत्राें के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक से पहले पार्षदाें से माेल-भाव का खेल भी शुरू हाे गया है। कुछ पार्षदाें काे सत्ता पक्ष की ओर से एक लाख रुपए तक का ऑफर मिला है। इसके बाद कुछ विराेधी पार्षदाें का मन डगमगाने लगा है।

शुक्रवार काे नगर निगम स्थित मेयर चैंबर में सत्ता पक्ष के पार्षदाें में सदानंद चाैरसिया, अनिल पासवान, दिनेश तांती और प्रतिनिधि दीपक साह के अलावा एक दंत चिकित्सक भी दिखे। कहा जा रहा है कि पिछले साल अविश्वास प्रस्ताव आने पर दंत चिकित्सक के पास पार्षदाें काे झारखंड व बंगाल में आवभगत करने की जिम्मेदारी थी।

चुनाव में छह माह रहे ताे ला सकते हैं अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव मामले में एक्ट यही कहता है कि निगम के चुनाव में छह माह से ज्यादा वक्त रहे तभी यह लगाया जा सकता है। इसके लिए 15 दिन के अंदर विशेष बैठक बुलानी हाेगी। सदन में पार्षदाें काे बहुमत साबित करना हाेगा। -राजेश झा राजा, एडीएम

आराेप - कमीशनखाेरी करते हैं पार्षद संजय सिन्हा : सीमा साहा
मेयर ने विराेधियाें की अनुवाई करने वाले पार्षद संजय सिन्हा पर आराेप लगाया कि जब तक वह स्थायी समिति में रहे तब तक कमीशनखाेरी करते रहे। सवा दाे साल तक यह चला। हमसे जाे भी मिलने आता, उसे बाहर ही राेक कर कमशीन तय कर लेते थे। इसका पता चला उन्हें स्थायी समिति से हटा दिया। ट्रेड लाइसेंस घाेटाले का मैंने खुलासा किया था, लेकिन इसमें नगर आयुक्त ने कुछ नहीं किया। संजय सिन्हा की भी फाइल खाेजने के लिए लाेगाें काे लगाया है।

प्रत्यारोप - ट्रांसफर-पाेस्टिंग की कीमत तय करती हैं मेयर : संजय
पार्षद संजय सिन्हा ने मेयर के आराेपाें पर कहा कि उन्हाेंने हमें स्थायी समिति से नहीं हटाया। मैंने खुद ही त्याग पत्र दे दिया था। मेयर के साथ सवा दाे साल रह कर देख लिया था कि यहां सिर्फ भ्रष्टाचार की ही बातें ही जाती हैं। उन्हाेंने आराेप लगाया कि निगम में टैंकर से लेकर मजदूर घाेटाले में मेयर का हाथ है। मेयर निगमकर्मियाें के ट्रांसफर पाेस्टिंग की कीमत भी तय करती हैं। ट्रेड लाइसेंस घाेटाले का मेयर ने खुलासा जरूर किया पर दाेषियाें काे बचाने की काेशिश में भी लगी रहीं।

खबरें और भी हैं...