पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61143.010.36 %
  • NIFTY18200.40.12 %
  • GOLD(MCX 10 GM)473800.04 %
  • SILVER(MCX 1 KG)646780.63 %

5 साल में सिर्फ एक ट्रैफिक सिग्नल लगा:स्मार्ट सिटी में बिहार में सबसे पहले शामिल हुआ था भागलपुर, अब काम पूरा करने को मिला दो साल का एक्सटेंशन

भागलपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
स्मार्ट रोड न बनने और ट्रैफिक सिग्नल में देरी से रोज शहर में जाम लग रहा है। लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हाे रहा है। - Money Bhaskar
स्मार्ट रोड न बनने और ट्रैफिक सिग्नल में देरी से रोज शहर में जाम लग रहा है। लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हाे रहा है।
  • संवर रहा सैंडिस,अब दो साल में पूरे शहर को स्मार्ट बनाने की बड़ी चुनौती

शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल हुए 5 साल पूरे हो गए, लेकिन स्मार्ट सिटी कंपनी विकास के नाम पर एक कदम भी नहीं चल सकी। कंपनी ने 5 साल में 2,240 करोड़ के 23 प्रोजेक्ट के टेंडर निकाले, लेकिन एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका। स्मार्ट राेड, रीवर फ्रंट, पार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल, वेंडिंग जाेन, फुटपाथ व स्मार्ट स्कूल जैसे काम फाइलों में भी कैद हैं। टेंडर के खेल और खींचतान में जिम्मेदारों ने पूरा समय गुजार दिया।

डेढ़ साल कोरोना की भेंट चढ़ा तो पांच साल में 2.35 करोड़ खर्च कर जिम्मेदारों ने जो पांच काम किए, वे भी देखरेख न हाेने से बर्बाद हो गए। अब स्मार्ट सिटी के अफसरों का कहना है कि योजना के लिए 1,309 करोड़ मिले हैं। इसमें 952 करोड़ के टेंडर निकाले गए हैं। ड्रेनेज का काम बुडको कर रहा है। चार जगहों पर पार्किंग के टेंडर अगस्त में तय हुए। स्मार्ट रोड का टेंडर कोर्ट में अटका था। अब टेंडर खुला है।

अफसरों के इन दावों के बीच शहर की स्मार्टनेस गायब है। दरअसल, भागलपुर बिहार का पहला जिला है, जिसे 2016 में केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया था। 5 साल पहले शहर जहां था, अब भी वहीं खड़ा है। न ट्रैफिक सुधरा और न ही वेंडिंग जोन बने। कहने को तिलकामांझी चौक पर सिग्नल लाइट ही लगी। कचहरी चौक पर लगाया गया लाइट ट्रायल में है। इसे चालू नहीं किया गया है। सैंडिस कंपाउंड में करीब आधा दर्जन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। हालांकि दो साल मिले एक्स्टेंसन के बाद अफसरों को 2023 तक पेंडिंग प्रोजेक्ट के पूरे होने की उम्मीद है।

2023 तक काम नहीं हुआ तो लौट जाएगी प्रोजेक्ट की राशि
सैंडिस कंपाउंड में खराब ईंट से बन रही सड़क का मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने स्मार्ट सिटी कंपनी के चेयरमैन का जिम्मा कमिश्नर से हटाकर नगर विकास के प्रधान सचिव को दे दिया। प्रधान सचिव ने पहली मीटिंग में ही पाया कि नाले खुले हैं। ड्रेनेज बदहाल हैं। गंदगी व जाम की समस्या है।

स्मार्ट सिटी के लिए ड्रेनेज सिस्टम, स्मार्ट सड़क, स्मार्ट पार्किंग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, चौराहों पर शौचालय, रोशनी, स्मार्ट हेल्थ सिस्टम, बेहतर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए योजना बनाने को कहा था। अब 2023 तक यदि प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो राशि लौटनी तय है। इसलिए नये सिरे से सभी काम हो रहे हैं।

ये तो पांच साल में बर्बाद हो गए
1. ओपन जिम : 30 लाख में सैंडिस, बूढ़ानाथ, लाजपत, चिल्ड्रेन पार्क में बच्चों के लिए झूले खरीदे गए, लेकिन देखरेख के अभाव में बर्बाद हो गए।
2. वाईफाई : 32 लाख से लाजपत पार्क और तिलकामांझी में लगाया वाईफाई खराब हो गया।
3. एलईडी स्क्रीन : 1.20 करोड़ से 8 जगहों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, पर रखरखाव के अभाव में सभी बंद पड़े हैं।
4. बायो टॉयलेट : 2.86 लाख में 22 बायो-टॉयलेट बनाए, लेकिन 6 लाख के एनारॉबिक बैक्टीरिया का उपयोग नहीं किया। ये कीड़े मर गए।
5. ट्रॉली : 50 लाख से 329 ट्रॉली मंगाई, गोदाम में पड़े-पड़े ये भी खराब हो गए।

ये काम तो शुरू भी नहीं हाे सके
1. स्मार्ट रोड: स्मार्ट रोड बनाने के लिए तीन बार योजना बनी, लेकिन काम नहीं हो सका।
2. रिवर फ्रंट : रिवर फ्रंट की दो बार योजना बनी। तीसरी बार में टेंडर तय हुआ।
3. ड्रेनेज: गंदे पानी के निकास के लिए ड्रेनेज भी अब तक नहीं बन सका।
4. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट : इसके लिए निगम ने करोड़ों के उपकरण खरीदे। प्रशासन ने डंपिंग ग्राउंड भी दिए, फिर भी मैनेजमेंट नहीं हो सका।
5. वेंडिंग जोन : चार जगहों पर 4.62 करोड़ से वेंडिंग जोन बनने थे। जगह तय हुई। टेंडर भी हुए, पर काम शुरू नहीं हुआ।

ये 5 काम होंगे पर चुनौतियां भी हैं
1. सीईओ के इस्तीफे के बाद नए अफसर की तैनाती नहीं हुई। नगर आयुक्त प्रभार में हैं। निगम के दायित्व के चलते उनका पूरा योगदान यहां नहीं होगा।
2. स्मार्ट सिटी के लिए सड़कों की चौड़ाई बढेगी। लेकिन अतिक्रमण, बिजली के खंभे और पेड़ को हटाने में आने वाली परेशानियों का आलन नहीं किया गया है।
3. सैंडिस कंपाउंड में करोड़ों से हुए सुंदरीकरण काम की मॉनिटरिंग कैसे होगी? कैसे खूबसूरती बरकरार रहेगी, इसका प्लान नहीं बना।
4. 2.62 करोड़ से ई-टॉयलेट बनेंगे, 5 साल पहले जैसे हाल न हो, इस पर स्मार्ट सिटी बोर्ड ने योजना नहीं बनाई
5. 4.62 करोड़ से 4 जगहों पर स्ट्रीट वेंडिंग जोन बनेंगे, बाकी जगहों पर क्या व्यवस्था हो, इसका प्लान नहीं बना। मेन रोड को जाम से मुक्ति मिलने में संशय।

  • स्मार्ट सिटी का काम अब दिखेगा। बोर्ड ने आईटी सेवा व ई-गवर्नेंस के लिए 197 करोड़ से कंट्रोल एंड कमांड सेंटर साफ्टवेयर का कार्यादेश कंपनी को दिया है। ट्रिपल-सी की योजना की निगरानी डीएम कर रहे हैं। बरारी पुल घाट पर लेजर शो समेत रीवर फ्रंट बनाने का काम 183 करोड़ से वात्सल्य कंपनी को दिया गया है। - प्रफुल्लचंद्र यादव, एमडी, स्मार्ट सिटी
खबरें और भी हैं...