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US धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट:भारत समेत 56 देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर अमेरिका चिंतित; सूडान, उजबेक्सितान और तुर्कमेनिस्तान में सुधरे हालात

वॉशिंगटनएक महीने पहले
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अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटोनी ब्लिंकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा 'धार्मिक स्वतंत्रता एक खुले विचार वाले और स्थिर समाज का प्रमुख आधार है। इसके बिना लोग अपने देश की सफलता में पूर्ण तौर पर योगदान देने में सक्षम नहीं होते हैं। - Money Bhaskar
अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटोनी ब्लिंकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा 'धार्मिक स्वतंत्रता एक खुले विचार वाले और स्थिर समाज का प्रमुख आधार है। इसके बिना लोग अपने देश की सफलता में पूर्ण तौर पर योगदान देने में सक्षम नहीं होते हैं।

अमेरिका ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता 2020 (International Religious Freedom Report 2020) रिपोर्ट जारी की है। USCIRF ने रिपोर्ट में दुनियाभर के 200 देशों और उनके क्षेत्रों में धार्मिक स्वतंत्रता की समीक्षा को आधार बनाया। साथ ही भारत समेत 56 देशों में अल्पसंख्यकों से हो रहे भेदभाव पर चिंता जाहिर की। इसके अलावा सूडान, उजबेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर हालात सुधाऱने को सकारात्मक कदम बताया।

इस रिपोर्ट में सरकारों की नीतियों को भी शामिल किया, जिनमें किसी भी तरह की धार्मिक आस्था और धार्मिक संप्रदायों, व्यक्तियों के अधिकारों का उल्लंघन होता है। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी नीतियों को भी शामिल किया गया।' US के स्टेट डिपार्टमेंट ने यह रिपोर्ट इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक्ट ऑफ 1998 के तहत जारी की।

ब्लिंकन बोले- मानव अधिकारों के सम्मान के बिना धार्मिक स्वतंत्रता अधूरी

  • अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटोनी ब्लिंकन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट की जानकारी देते हुए कहा,' मानव अधिकारों के सम्मान के बिना धार्मिक स्वतंत्रता को पूरी तरह से महसूस नहीं किया जा सकता है और जब सरकारें अपने लोगों के स्वतंत्र रूप से विश्वास और पूजा करने के अधिकार का उल्लंघन करती है, तो यह सभी लोगों को खतरे में डाल देता है।'
  • उन्होंने कहा, 'धार्मिक स्वतंत्रता एक खुले विचार वाले और स्थिर समाज का प्रमुख आधार है। इसके बिना लोग अपने देश की सफलता में पूर्ण तौर पर योगदान देने में सक्षम नहीं होते हैं। जब भी मानव अधिकारों को नकारा जाता है, तो तनाव का कारण बनता है। यही विभाजन को जन्म देता है। ब्लिंकन ने प्यू रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया में अभी 56 देशों में अधिकांश लोग इस तरह के अधिकार से वंचित हैं।'

रिपोर्ट में भारत में अल्पसंख्यकों से भेदभाव पर जताई चिंता

रिपोर्ट में भारत का जिक्र भी है। इसमें भारत में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की हत्याओं, हमले, भेदभाव और कार्रवाई पर चिंता जाहिर की गई। ब्लिंकन ने बताया कि अमेरिकी और भारत के समकक्षों के बीच CAA, विश्वास आधारित NGO की समस्याओं और मुस्लिमों ने कोरोनावायरस फैलाया जैसे मुद्दे पर चर्चा चल रही है।

इससे पहले भारत ने अमेरिका की तरफ से जारी इसी तरह की पिछली रिपोर्ट को नकार दिया था। तब भारत सरकार की तरफ से किसी भी तरह की लोकस स्टैंडी (सुने जाने के अधिकार) के न होने की बात कही गई थी।

'ईरान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, प्रताड़ना और गिरफ्तारी जारी''

इसके अलावा ब्लिंकन ने ईरान का जिक्र करते हए कहा, 'वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, प्रताड़ना और गिरफ्तारी जारी है। इनमें बहाई, ईसाई, यहूदी, पारसी, सुन्नी और सूफी मुस्लिम धर्म के लोग शामिल हैं। इधर, म्यांमार में सैन्य तख्तापलट करने वाले नेता रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार के जिम्मेदार हैं। इनमें अधिकांश मुस्लिम और दुनियाभर में अन्य धर्म के लोग शामिल हैं। इसके अलावा सउदी अरब दुनिया में एक ऐसा अकेला देश है, जहां चर्च नहीं है। जबकि वहां लाखों की संख्या में ईसाई रहते हैं।'

उन्होंने कहा, 'चीन में लगातार धार्मिक अभिव्यक्ति का अपराधिकरण होता है। वहां लगातार उइगर मुसलमानों और अन्य धर्म के अल्पसंख्यकों के लोगों के खिलाफ मानव अधिकारों का उल्लंघन और नरंसहार जैसे अपराध जारी है। उन्होंने वहां के सेंट्रल ग्रुप ऑफ प्रिवेंटिंग एंड डीलिंग विथ हेरेटिकल रिलिजन ऑफ चेंग्दू के पूर्व निदेशक यू हुई पर भी प्रतिबंध लगा रखे हैं।'

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