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  • The Work Load Is High, Not Getting Finished In Time And You Are Troubled By It, Then You Are Not Alone; But Leaving The Job Is Also No Cure

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वर्क फ्रॉम होम और बच्चों की देखभाल बढ़ा रहा तनाव:काम का बोझ ज्यादा है, समय रहते खत्म नहीं हो रहा और इससे परेशान हैं, तो आप अकेले नहीं हैं; लेकिन जॉब छोड़ना भी कोई इलाज नहीं

एक महीने पहले
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वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की प्रोफेसर कीरा शाब्राम कहती हैं कि इस समस्या से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले खुद के प्रति संवेदनशीलता बरतने कि आवश्यकता है। - Money Bhaskar
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की प्रोफेसर कीरा शाब्राम कहती हैं कि इस समस्या से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले खुद के प्रति संवेदनशीलता बरतने कि आवश्यकता है।

अगर आपको लगातार काम जल्दी करने के ई-मेल आ रहे हैं, आपको कम संसाधन में ज्यादा काम करना पड़ रहा और आप लगातार इस कश्मकश में हैं कि कौन सा काम पहले करें, या आप को रोज लगता है कि समय पूरा हो रहा है लेकिन काम खत्म ही नहीं हो रहा, तो समझ लीजिए आप अकेले नहीं है। मौजूदा महामारी के कारण घर पर रहते हुए काम करने के साथ साथ बच्चों की देखभाल, वो भी तब, जब घर पर काम करने वाले भी छुट्टी पर हों, तो ऐसे में कई लोगों का दिमाग फ्राई हो रहा है।

इसे बर्नआउट कहते हैं और ये चिड़चिड़ेपन के साथ दिल की बीमारियों को जन्म देता है। हालांकि इसका मेडिकल जांच में पता नहीं चल पाता, लेकिन फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने साल 2019 में इसे आधिकारिक तौर पर काम से ताल्लुक रखने वाली समस्या की संज्ञा दी है।

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की प्रोफेसर कीरा शाब्राम कहती हैं कि इस समस्या से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले खुद के प्रति संवेदनशीलता बरतने कि आवश्यकता है। काम के बीच में ब्रेक लेते रहें ताकि मन काम से भटक सके। रोज 5 मिनट का मेडिटेशन भी बड़ा कारगर सिद्ध होता है।

सबसे महत्वपूर्ण है अपने बॉस से बात करके समस्या साझा करना। बॉस एक व्यक्ति है और कंपनी एक संस्था। बॉस को ही कंपनी मानना सही नहीं है। अपने सहकर्मियों के साथ खुलकर चर्चा करना भी काफी लाभदायक हो सकता है। एक-दूसरे की मदद करने के लिए तत्परता के कारण लोगों में विश्वास जगता है कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद के लिए लोग हैं और ये बहुत बड़ा इलाज है।
अपने काम से दूरी, थकान और निराशा का घेरना ही बर्नआउट
बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के हेल्दी वर्कप्लेसेज सेंटर की शोधकर्ता क्रिस्टीना मसलाच इस समस्या पर सबसे पहले शोध करने वाले विषेशज्ञों में से एक हैं और इन्होंने ही इसे परिभाषित भी किया है। उनके अनुसार जब कोई कर्मचारी काम से दूर होने लगता है, उसे थकान महसूस होने लगे, निराशा घेर ले और काम अर्थहीन लगने लगे, बर्नआउट का शिकार माना जाएगा। मलसाच कहती हैं कि अक्सर कर्मचारी जब प्रताड़ित होते हैं, तब वे बर्नआउट के शिकार हो जाते हैं। कुछ लोग नौकरी छोड़ कर भाग खड़े होते हैं, जो सही नहीं है।