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तालिबानी हुकूमत:कतर के विदेश मंत्री काबुल पहुंचे, तालिबानी कब्जे के बाद किसी देश के मंत्री की यह पहली अफगान यात्रा

एक महीने पहले
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अमेरिका और तालिबान के बीच मध्यस्थता करने वाले कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी रविवार अचानक काबुल पहुंचे। थानी ने सबसे पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद से लंबी बातचीत की। इसके बाद वे पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और उसके बाद नेशनल रिकन्सीलेशन काउंसिल के मुखिया अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिलने पहुंचे। माना जा रहा है कि कतर के जरिए अमेरिका और दुनिया की बड़ी ताकतें तालिबान पर समावेशी सरकार के लिए दबाव बनाना चाहती हैं।

थानी ने तालिबानी सरकार के विदेश मंत्री और अन्य अफसरों से भी लंबी बातचीत की। अमेरिका साफ कर चुका है कि वो अफगानिस्तान सरकार के फंड्स ब्लॉक करके नहीं रखना चाहता, लेकिन नई हुकूमत को तय करना होगा कि फंड्स का सही इस्तेमाल हो। अमेरिका के पास 9 बिलियन डॉलर हैं। आईएमएफ ने 440 मिलियन डॉलर फ्रीज कर दिए हैं। तालिबान की नई हुकूमत को पाकिस्तान समेत अब तक किसी देश ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। 1996 में जब तालिबान की पहली हुकूमत आई थी तब सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान ने उससे मान्यता दी थी।

मुश्किल में अफगान पायलट
अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद भागकर उज्बेकिस्तान पहुंचे पायलट्स ने वहां से भी भागना शुरू कर दिया है। यह लोग पिछले 1 महीने उज्बेकिस्तान के कैंप में रह रहे थे।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये वह पायलट हैं, जिन्हें अमेरिका ने ट्रेन किया था।

अमेरिका और तालिबान के बीच हुई डील के बाद कई अफगानी पायलट अफगानिस्तान में ही छूट गए थे। बाद में वे भागकर उज्बेकिस्तान पहुंच गए। इनमें से ज्यादातर फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, अफगानी पायलटों को डर है कि, उज्बेकिस्तान सरकार उन्हें तालिबान के हवाले कर सकती है। ऐसा होने पर तालिबानी उन्हें मार डालेंगे।

तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से 46 विमानों में सवार होकर 585 अफगानी नागरिक उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। ये विमान उज्बेकिस्तान की सरकार के कब्जे में हैं। तालिबान इन पायलट्स को वापस करने की अपील उज्बेकिस्तान की सरकार से कर चुका है।

अफगानिस्तान की महिला बॉक्सर को छोड़ना पड़ा देश
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद दर्द भरी कई कहानियां सामने आ रही हैं। अब अफगानिस्तान की महिला बॉक्सर सीमा रेजाई का मामला सामने आया है, जिन्हें अपना पैशन फॉलो करने के लिए देश छोड़ना पड़ा। वे अफगानिस्तान में लाइटवेट बॉक्सिंग चैंपियन रह चुकी हैं।

तालिबान ने उन्हें अफगानिस्तान छोड़ने या मरने के लिए तैयार रहने की धमकी दी थी। स्पुतनिक को दिए इंटरव्यू में सीमा ने बताया कि तालिबान की धमकी मिलने के बाद परिवार ने भी उनका सपोर्ट करना छोड़ दिया था। सभी डरे हुए थे, इसलिए उन्होंने देश छोड़ने का फैसला किया।

तालिबान को जब पता चला कि एक महिला खिलाड़ी को पुरुष कोच ट्रेनिंग दे रहा है तो उन्होंने सीमा को जान से मारने की धमकी दी।
तालिबान को जब पता चला कि एक महिला खिलाड़ी को पुरुष कोच ट्रेनिंग दे रहा है तो उन्होंने सीमा को जान से मारने की धमकी दी।

तालिबान ने जब काबुल पर कब्जा किया, तब सीमा कोच के साथ बॉक्सिंग की ट्रेनिंग कर रही थीं। महिला खिलाड़ी को पुरुष कोच ट्रेनिंग दे रहे थे, इसलिए तालिबान ने उनके घर धमकी भरे खत भेजने शुरू कर दिए। खत में उन्होंने लिखा कि अफगानिस्तान में रहना है तो बॉक्सिंग छोड़नी होगी या मरना होगा।

सीमा ने बताया कि वे फ्लाइट में सवार होकर कतर चली गईं। अब इंतजार कर रही हैं कि अमेरिका उन्हें वीजा देकर अपने यहां बुला ले। वे 16 साल की उम्र से बॉक्सिंग कर रही हैं।

ISI प्रमुख ने चीन के इंटेलिजेंस चीफ से मुलाकात की

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद ने अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर चीन समेत कुछ दूसरे देशों की खुफिया एजेंसी के प्रमुखों से मुलाकात की है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से न्यूज एजेंसी PTI ने यह खबर दी है। पाकिस्तानी अखबार पाकिस्तान ऑब्जर्वर के मुताबिक ISI चीफ ने चीन के अलावा रूस, ईरान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के इंटेलिजेंस चीफ से भी मुलाकात की है।

ISI चीफ की इस मुलाकात की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार बनवाने में पाकिस्तान का ही हाथ माना जा रहा है। वहां सरकार के ऐलान से पहले ISI चीफ ने काबुल का दौरा भी किया था और ऐसी रिपोर्ट थीं कि उनके दखल से ही तालिबानी सरकार में आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के सदस्यों को अहम पदों पर बिठाया गया था। उधर पंजशीर की लड़ाई में भी पाकिस्तान ने तालिबान का साथ दिया था।

तालिबान की क्रूरता जारी, युवक को सड़क पर गोली मारी
तालिबानियों ने पंजशीर में एक युवक को उसके घर से निकालकर सड़क पर दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला। अफगानिस्तान के न्यूज पोर्टल के मुताबिक तालिबान का आरोप है कि यह युवक पंजशीर के नॉर्दर्न अलायंस की सेना में शामिल था। हालांकि, मृतक का दूसरा साथी तालिबानियों को उसका ID कार्ड दिखाता रह गया, लेकिन वे नहीं माने और उसकी जान ले ली।

इससे पहले तालिबानियों ने पंजशीर पर कब्जे का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह पंजशीर छोड़ कर भाग गए हैं। वहीं पंजशीर के लड़ाकों ने कहा था कि अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। नॉर्दर्न अलायंस और रेजिस्टेंस फोर्स के मुखिया अहमद मसूद ने कहा था कि पंजशीर पर तालिबान के कब्जे का दावा झूठा है। हमारे लड़ाके अभी भी उनका सामना कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी एक हफ्ते पहले एक वीडियो जारी कर पंजशीर से भागने की बात का खंडन किया था। उन्होंने कहा था कि वे आखिरी सांस तक तालिबान के खिलाफ लड़ते रहेंगे। इससे पहले तालिबानियों ने उनके बड़े भाई की पंजशीर में हत्या कर दी थी। तालिबानियों ने उनके परिवार को शव देने से भी मना कर दिया। तालिबान ने कहा कि उसका शव सड़ जाना चाहिए।

तालिबानी राज में काबुल यूनिवर्सिटी की पहली क्लास; युवतियों को बुर्के में बुलाया
तालिबान शरिया कानून को लागू करने को लेकर किस कदर हावी है, इसका नजारा शनिवार को काबुल यूनिवर्सिटी में देखने को मिला। तालिबान के नेताओं ने यहां शरिया को लेकर एक लेक्चर का आयोजन किया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 300 युवतियां शामिल हुईं। सभी युवतियां सर से पांव तक बुर्के से ढंकी हुई थीं।

इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी की 300 छात्राएं शामिल हुईं।
इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी की 300 छात्राएं शामिल हुईं।

हर हाथ में तालिबानी झंडा
युवतियों को शरिया कानून मानने के लिए शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान हर युवती के हाथ में तालिबान का झंडा भी था। तालिबान ने अपने शासन में महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ये ड्रेस कोड जारी किया है। इससे पहले कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्लास के दौरान भी लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग बैठने का फरमान जारी किया है।

बुर्के से ढंकी एक महिला अपने बच्चे को लेकर कार्यक्रम में पहुंची।
बुर्के से ढंकी एक महिला अपने बच्चे को लेकर कार्यक्रम में पहुंची।

लेक्चर दे रही महिला भी संगीनों के साए में
यूनिवर्सिटी में लेक्चर दे रही महिला भी सिर से पांव तक बुर्के से ढंकी हुई थी। उसके सामने ही तालिबानी खड़े थे। पॉडियम के पास और हॉल के गेट पर भी तालिबानियों का पहरा था।

लेक्चर दे रही महिला भी सिर से पांव तक बुर्के से ढंकी थी। उसके नजदीक ही तालिबानी खड़ा था।
लेक्चर दे रही महिला भी सिर से पांव तक बुर्के से ढंकी थी। उसके नजदीक ही तालिबानी खड़ा था।

पाकिस्तान और चीन को तालिबान का डर
अफगानिस्तान में तालिबानी राज के बीच पाकिस्तान और चीन को अपने यहां मौजूद विद्रेाही संगठनों से खतरा महसूस होने लगा है। दोनों देशों ने तालिबान से इन संगठनों को पनाह न देने की अपील की है। इस संगठनों में पाकिस्तान स्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और चीन में उइगर और पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) शामिल हैं।

पाकिस्तान सरकार की पहल पर पाकिस्तान, चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने 8 सितंबर को वर्चुअल मीटिंग के जरिए अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के बीच अफगान मुद्दे पर बैठक की थी। जहां TTP और BLA को पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के रूप में प्रतिबंधित किया गया है, वहीं ETIM चीन के लिए खतरा है।

काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन पर शनिवार को तालिबानी झंडा लहरा रहा था।
काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन पर शनिवार को तालिबानी झंडा लहरा रहा था।

रूस ने पंजशीर समर्थक ताजिकिस्तान को बख्तरबंद वाहन और सैन्य उपकरण भेजे
रूस ने पंजशीर के सहयोगी ताजिकिस्तान को 12 बख्तरबंद वाहन और सैन्य उपकरणों का जखीरा भेजा है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान में मेजर जनरल येवगेनी सिंडाइकिन ने कहा कि तजाकिस्तान की दक्षिणी सीमा के पास बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए हम अपने राज्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

तालिबान के साथ लड़ाई में पंजशीर के लड़ाकों को ताजिकिस्तान समर्थन देता आया है। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह और नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद मसूद के ताजिकिस्तान में शरण लेने की खबरें थीं।

ताजिकिस्तान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बहिष्कार की मांग की
अफगानिस्तान में पंजशीर की सेना के खिलाफ तालिबान का समर्थन करने वाले पाकिस्तान के खिलाफ ताजिकिस्तान के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान इमरान खान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।

तालिबान का पंजशीर को छोड़कर पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा था, इसे लेकर उसने अपने सरकार की घोषणा को भी दो बार टाल दिया था। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ फैज हमीद काबुल पहुंचे थे। इसके दूसरे दिन ही तालिबान ने पंजशीर पर हमले किए थे। पंजशीर के लड़ाकों ने आरोप लगाया कि उस पर पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों ने हमला किया है। इसमें उसके दो बड़े नेता मारे गए। इस हमले के विरोध में राजधानी काबुल समेत ताजिकिस्तान में भी विरोध हुए।

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