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तालिबानी हुकूमत:तालिबानी राज में काबुल यूनिवर्सिटी की पहली क्लास; युवतियों को बुर्के में बुलाया, शरिया कानून की शपथ दिलाई

नई दिल्लीएक महीने पहले
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तालिबान शरिया कानून को लागू करने को लेकर किस कदर हावी है, इसका नजारा शनिवार को काबुल यूनिवर्सिटी में देखने को मिला। तालिबान के नेताओं ने यहां शरिया को लेकर एक लेक्चर का आयोजन किया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 300 युवतियां शामिल हुईं। सभी युवतियां सर से पांव तक बुर्के से ढकी हुईं थीं।

लेक्चर में मौजूद हर युवती के हाथ में तालिबान का झंडा था।
लेक्चर में मौजूद हर युवती के हाथ में तालिबान का झंडा था।
कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 300 युवतियां शामिल हुईं।
कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 300 युवतियां शामिल हुईं।
बुर्के से ढंकी एक महिला अपने बच्चे को लेकर कार्यक्रम में पहुंची।
बुर्के से ढंकी एक महिला अपने बच्चे को लेकर कार्यक्रम में पहुंची।

हर हाथ में तालिबानी झंडा
युवतियों को शरिया कानून मानने के लिए शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान हर युवती के हाथ में तालिबान का झंडा भी था। तालिबान ने अपने शासन में महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ये ड्रेस कोड जारी किया है। इससे पहले कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्लास के दौरान भी लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग बैठने का फरमान जारी किया है।

कई युवतियों के चेहरे पूरी तरह से ढके हुए थे।
कई युवतियों के चेहरे पूरी तरह से ढके हुए थे।

लेक्चर दे रही महिला भी संगीनों के साए में
यूनिवर्सिटी में लेक्चर दे रही महिला भी सर से पांव तक बुर्के से ढकी हुई थी। उसके सामने ही तालिबानी लड़ाके खड़े थे। पॉडियम के पास और हॉल के गेट पर भी तालिबानी लड़ाकों का पहरा था।

लेक्चर दे रही महिला भी सर से पांव तक बुर्के से ढकी थी। उसके नजदीक ही तालिबानी लड़ाका खड़ा था।
लेक्चर दे रही महिला भी सर से पांव तक बुर्के से ढकी थी। उसके नजदीक ही तालिबानी लड़ाका खड़ा था।

प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर तालिबान की क्रूरता
अफगानिस्तान पर तालिबान के काबिज होने के बाद सबसे ज्याद परेशानी महिलाओं और बच्चों को है। खासकर काम और पढ़ाई करने वाली महिलाएं अपने हक और हुकूक को लेकर बंदूक के नोक पर खड़ी हैं। कुछ दिन पहले महिलाओं ने लगातार प्रदर्शन भी किए थे। इन पर तालिबानियों ने गोलियां और कोड़े बरसाए थे। कई महिलाओं को बंदूक के बट से चेहरे पर वार किया गया था।

काबुल की सड़कों पर शनिवार को सैकड़ों महिलाओं ने तालिबान के समर्थन में प्रदर्शन किया।
काबुल की सड़कों पर शनिवार को सैकड़ों महिलाओं ने तालिबान के समर्थन में प्रदर्शन किया।
कुछ दिनों पहले एक कॉलेज क्लास की तस्वीर जारी हुई थी। इसमें युवतियों और युवकों के बीच पर्दा डाल दिया गया। तालिबान ने ये व्यवस्था अस्थाई तौर पर की थी। उनका फरमान है कि महिला-पुरूष साथ पढ़ाई नहीं कर सकते हैं।
कुछ दिनों पहले एक कॉलेज क्लास की तस्वीर जारी हुई थी। इसमें युवतियों और युवकों के बीच पर्दा डाल दिया गया। तालिबान ने ये व्यवस्था अस्थाई तौर पर की थी। उनका फरमान है कि महिला-पुरूष साथ पढ़ाई नहीं कर सकते हैं।

पाकिस्तान और चीन को तालिबान का डर
अफगानिस्तान में तालिबानी राज के बीच पाकिस्तान और चीन को अपने यहां मौजूद विद्रेाही संगठनों से खतरा महसूस होने लगा है। दोनों देशों ने तालिबान से इन संगठनों को पनाह न देने की अपील की है। इस संगठनों में पाकिस्तान स्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और चीन में उइगर और पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) शामिल हैं।

पाकिस्तान सरकार की पहल पर पाकिस्तान, चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने 8 सितंबर को वर्चुअल मीटिंग के जरिए अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के बीच अफगान मुद्दे पर बैठक की थी। जहां टीटीपी और बीएलए को पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के रूप में प्रतिबंधित किया गया है, वहीं ईटीआईएम चीन के लिए खतरा है।

काबुल स्थिति राष्ट्रपति भवन में शनिवार को तालिबानी झंडा लहरा रहा था।
काबुल स्थिति राष्ट्रपति भवन में शनिवार को तालिबानी झंडा लहरा रहा था।

आईएसआईएस और अल कायदा भी शामिल
इन उग्रवादी संगठनों के अलावा, जोंडोल्लाह, जो ईरान में धमकी देने वाला एक उग्रवादी संगठन है, को भी बयान में प्रतिबंधित किया गया है। संयुक्त बयान में कहा गया, दोहराया गया है कि आईएसआईएस, अल कायदा, ईटीआईएम, टीटीपी, बीएलए, जोंडोल्लाह और ऐसे अन्य आतंकवादी संगठनों को अफगानिस्तान के क्षेत्र में पैर जमाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अफगानिस्तान में हथियार लिए तालिबानी सड़कों पर पहरा दे रहे हैं। फोटो हेरात शहर की है।
अफगानिस्तान में हथियार लिए तालिबानी सड़कों पर पहरा दे रहे हैं। फोटो हेरात शहर की है।

रूस ने पंजशीर समर्थक ताजिकिस्तान को बख्तरबंद वाहन और सैन्य उपकरण भेजे
रूस ने पंजशीर के सहयोगी ताजिकिस्तान को 12 बख्तरबंद वाहन और सैन्य उपकरणों का जखीरा भेजा है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान में मेजर जनरल येवगेनी सिंडाइकिन ने कहा कि तजाकिस्तान की दक्षिणी सीमा के पास बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए हम अपने राज्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

तालिबान के साथ लड़ाई में पंजशीर के लड़ाकों को ताजिकिस्तान समर्थन देता आया है। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह और नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद मसूद के ताजिकिस्तान में शरण लेने की खबरें थीं।

ताजिकिस्तान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बहिष्कार की मांग की
अफगानिस्तान में पंजशीर की सेना के खिलाफ तालिबान का समर्थन करने वाले पाकिस्तान के खिलाफ ताजिकिस्तान के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान इमरान खान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।

तालिबान का पंजशीर को छोड़कर पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा था, इसे लेकर उसने अपने सरकार की घोषणा को भी दो बार टाल दिया था। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ फैज हमीद काबुल पहुंचे थे। इसके दूसरे दिन ही तालिबान ने पंजशीर पर हमले किए थे। पंजशीर के लड़ाकों ने आरोप लगाया कि उस पर पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों ने हमला किया है। इसमें उसके दो बड़े नेता मारे गए। इस हमले के विरोध में राजधानी काबुल समेत ताजिकिस्तान में भी विरोध हुए।

तालिबान ने 9/11 हमले की बरसी पर सरकार के जश्न का कार्यक्रम टाला
अमेरिका पर आतंकी संगठन अलकायदा के हमले (9/11) की आज 20वीं बरसी है। पहले ऐसी खबर थी तालिबान आज ही अपनी सरकार बनाने के जश्न का कार्यक्रम रखेगा, लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि तालिबान ने इसे टाल दिया है। इससे पहले रूस ने कहा था कि अगर तालिबान ने 9/11 की बरसी पर कार्यक्रम रखा तो वह शामिल नहीं होगा।

अमेरिका ने अफगानिस्तान की उड़ानें रोकीं
अमेरिका पहुंचे कुछ शरणार्थियों में खसरा फैलने के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से आने वाली उड़ानें फिलहाल रोक दी हैं। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की सिफारिश पर ये फैसला लिया गया है। इससे पहले अमेरिका ने बताया था कि बीते 3 दिन में काबुल से अमेरिकियों समेत 250 लोगों को निकाला गया है। इन्हें कतर की उड़ानों से दोहा लाया गया था और वहां से कई लोग अमेरिका पहुंच रहे हैं।

दिल्ली में अफगानी बच्चों ने लगाए तालिबान मुर्दाबाद के नारे
तालिबानी हुकूमत और उसकी दरिंदगी के खिलाफ काबुल ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली में रह रहे अफगानियों ने भी शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन किया। इसमें काफी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। वे पंजशीर में तालिबान से लड़ने वाले अहमद मसूद का समर्थन और तालिबान-पाकिस्तान का विरोध करते नजर आए। प्रदर्शनकारी हाथो में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर तालिबान मुर्दाबाद, अफगानिस्तान तालिबानियों की जगह नहीं है, हम आजादी चाहते हैं, अफगानिस्तान जख्मी है, पाकिस्तान आतंकियों को शरण देता है और पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगें जैसे नारे लिखे थे।

दिल्ली में हुए प्रदर्शन में एक अफगानी बच्चा तालिबान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए दिखा।
दिल्ली में हुए प्रदर्शन में एक अफगानी बच्चा तालिबान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए दिखा।
प्रदर्शनकारी पंजशीर में तालिबानी से जंग लड़ने वाली रेजिस्टेंस फोर्स का समर्थन करते हुए भी दिखे। वे रेजिस्टेंस फोर्स के नेता अहमद मसूद की फोटो लिए हुए थे। एक बच्चा मसूद की फोटो वाली टी-शर्ट पहने और अफगानी झंडा ओढ़े हुए नजर आया।
प्रदर्शनकारी पंजशीर में तालिबानी से जंग लड़ने वाली रेजिस्टेंस फोर्स का समर्थन करते हुए भी दिखे। वे रेजिस्टेंस फोर्स के नेता अहमद मसूद की फोटो लिए हुए थे। एक बच्चा मसूद की फोटो वाली टी-शर्ट पहने और अफगानी झंडा ओढ़े हुए नजर आया।
दो बच्चे अफगानिस्तान का झंडा थामे हुए नजर आए। इनमें से एक बच्चा अफगानी सैनिकों जैसी वर्दी पहने हुए था।
दो बच्चे अफगानिस्तान का झंडा थामे हुए नजर आए। इनमें से एक बच्चा अफगानी सैनिकों जैसी वर्दी पहने हुए था।

अफगानी महिलाएं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ फैज हामिद की फोटो लेकर प्रदर्शन कर रही थीं, उनका कहना था कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है, आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह है। पाकिस्तान अफगानियों की हत्याएं करना बंद करे।

पाकिस्तान विरोधी तख्तियां लिए हुए प्रदर्शन करते हुए अफगानी युवा।
पाकिस्तान विरोधी तख्तियां लिए हुए प्रदर्शन करते हुए अफगानी युवा।

अमरुल्लाह सालेह के भाई का शव नहीं दे रहा तालिबान, कहा- इसे सड़ जाना चाहिए
अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के बड़े भाई रोहुल्लाह की हत्या के के बाद तालिबान अब उनका शव नहीं द रहा। रोहुल्लाह के भतीजे इबादुल्ला सालेह ने बताया कि तालिबान ने गुरुवार को उनके चाचा को मार दिया था और जब उनका शव मांगा तो तालिबानियों ने देने से इनकार कर दिया। तालिबान ने कहा कि हम उसे दफनाने नहीं देंगे, उसका शरीर सड़ जाना चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने रोहुल्लाह सालेह को पंजशीर घाटी में ही मौत के घाट उतार दिया गया था। तालिबानियों ने सालेह को पहले कोड़ों और बिजली के तार से पीटा, उसके बाद गला काट दिया। बाद में तड़पते सालेह पर दनादन गोलियां बरसा दीं।

बताया जा रहा है कि रोहुल्लाह सालेह पंजशीर से काबुल जाने की फिराक में थे। तालिबानियों को इसकी खबर लग गई और उन्होंने सालेह को घेरकर बंदी बना लिया और फिर बेरहमी से मार दिया। उनकी हत्या की खबर शुक्रवार शाम को सामने आई। हालांकि तालिबान ने सफाई दी है कि रोहुल्लाह की हत्या नहीं की गई, बल्कि वे जंग में मारे गए हैं।

पंजशीर के दो बड़े नेताओं को भी मार चुका है तालिबान
तालिबान ने कुछ दिनों पहले पंजशीर पर जीत का दावा किया था। उसने पाकिस्तानी वायुसेना की मदद से पंजशीर के दो बड़े नेताओं को मार दिया था। तालिबान ने नॉर्दर्न अलायंस के कमांडरों और विद्रोहियों के प्रवक्‍ता फहीम दश्‍ती और पंजशीर के शेर कहे जाने वाले जनरल अहमद शाह मसूद के भतीजे जनरल वदूद की हत्या कर दी थी।

ब्रिटेन की चेतावनी- तालिबान राज में फिर से हो सकते हैं 9/11 जैसे हमले
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबानियों के आने के बाद से दुनिया में 9/11 जैसे आतंकी हमलों का खतरा बढ़ेगा। MI5 के डायरेक्टर जनरल कैन मैकेलम ने बीबीसी से खास बातचीत में कहा कि तालिबान के आने के बाद सबसे ज्यादा खतरा ब्रिटेन को हो सकता है, क्योंकि अब नाटो की सेना भी अफगानिस्तान से जा चुकी है।

तालिबान को चीन-पाकिस्तान समेत 6 देशों ने समावेशी सरकार बनाने को कहा
अफगानिस्तान के 6 पड़ोसी देशों- चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज ने बताया, ' इन देशों ने तालिबानी नेताओं से एक समावेशी सरकार बनाने और ISIS, अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों को पैर जमाने की अनुमति नहीं देने की अपील की है।

तालिबान की दरिंदगी के शिकार 4 लोगों की मौत
अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन थम नहीं रहे हैं। ऐसे में विरोध को दबाने के लिए तालिबान दरिंदगी दिखा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर तालिबान हिंसक तरीके अपना रहा है, उन्हें हथियारों और कोड़ों से पीटा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के मुताबिक तालिबानी क्रूरता के शिकार 4 लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं।

तालिबानी सोच- महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना, वे मंत्री नहीं बन सकतीं
अफगानिस्तान में अपने अधिकारों और नई सरकार में अपनी भागीदारी के लिए तालिबान से लड़ रहीं महिलाओं का प्रदर्शन तेज हो गया है। महिलाओं का प्रदर्शन काबुल से बढ़कर उत्तर-पूर्वी प्रांत बदख्शां पहुंच गया है। वहां भी कई महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। इस बीच तालिबान ने महिलाओं को लेकर बेतुका बयान दिया है। तालिबानी प्रवक्ता सैयद जकीरूल्लाह हाशमी ने कहा- 'एक महिला मंत्री नहीं बन सकती है। महिलाओं के लिए कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है। उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। उनका यही काम है। महिला प्रदर्शनकारी अफगानिस्तान की सभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं।'

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