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ब्रिटेन में कोरोना के चलते परीक्षाएं रद्द:अब ग्रेडिंग शिक्षकों के हाथ में; अमीर माता-पिता अच्छे नंबर के लिए दबाव डाल रहे, केस की धमकी दे रहे

लंदन2 महीने पहले
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यह दावा ब्रिटेन में शिक्षा के लिए काम करने वाले सटन ट्रस्ट की रिपोर्ट में किया गया है।  - Money Bhaskar
यह दावा ब्रिटेन में शिक्षा के लिए काम करने वाले सटन ट्रस्ट की रिपोर्ट में किया गया है। 
  • सटन ट्रस्ट की रिपोर्ट में दावा- हर पांच में से एक शिक्षक से अभिभावकों ने संपर्क किया

दुनियाभर में कोरोना के कारण स्कूलों में परीक्षाएं नहीं हो पाईं। इसलिए बोर्ड ने बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर ग्रेडिंग देने का फैसला लिया है। ब्रिटेन के स्कूलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पर इससे वहां के स्कूल टीचरों के लिए नई समस्या खड़ी हो गई है। अमीर परिवारों के लोग अपने बच्चों को बढ़िया नंबर और बेहतर ग्रेडिंग देने के लिए शिक्षकों पर दबाव डाल रहे हैं। इससे सामान्य परिवारों के बच्चों का नुकसान हो रहा है। यह दावा ब्रिटेन में शिक्षा के लिए काम करने वाले सटन ट्रस्ट की रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हर पांच में से एक शिक्षक ने स्वीकार किया है कि उन्हें अभिभावकों की तरफ से इस तरह का दबाव झेलना पड़ा। हाई स्कूल, हायर सेकंडरी और यूनिवर्सिटी स्तर तक टीचर इसे लेकर तनाव में हैं। सर्वे में 3200 टीचरों को शामिल किया गया था। 23% निजी और 17% सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने कहा कि बच्चों के नंबर बढ़ाने के लिए माता-पिता ने उनसे संपर्क किया।

यह गलत है, इसके बावजूद कुछ अभिभावकों ने कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीचरों पर यह दबाव समृद्ध इलाके के स्कूलों में ज्यादा देखने को मिला है। यहां पर 17% शिक्षकों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जबकि निचले तबके के इलाकों में यह आंकड़ा 11% ही रहा। ब्रिटेन की हेड टीचर्स यूनियन एएससीएल के प्रमुख ज्योफ बार्टन ने कहा कि शिक्षकों का अभिभावकों के दबाव में आना संभव नहीं है। छात्रों के ग्रेड उनके प्रदर्शन पर आधारित होते हैं न कि उनके माता-पिता के रसूख के बूते पर।

रिपोर्ट के मुताबिक 50% ज्यादा छात्र चिंतित हैं कि ग्रेडिंग प्रणाली से अच्छी यूनिवर्सिटी में प्रवेश की उनकी कोशिशों पर नकारात्मक असर होगा। टीचर्स यूनियन के नेता पॉल व्हाइटमैन का कहना है कि अभिभावक आश्वस्त रहें कि बच्चों के साथ अन्याय नहीं होगा। बल्कि उन्हें तो शिक्षकों का मनोबल बढ़ाना चाहिए कि इतनी विषम परिस्थितियों में भी वे बच्चों के भविष्य के लिए जुटे हुए हैं। वहीं, शिक्षा विभाग का दावा है कि बच्चों को जो सिखाया गया है, उसी के आधार पर ग्रेडिंग होगी। यह ध्यान रखा गया है कि बच्चों को उतना सीखने को नहीं मिला, जितना सामान्य दिनों में मिलता।

अमेरिका और ईयू के लोगों के लिए क्वारेंटाइन खत्म, भारत के लिए बरकरार

ब्रिटेन | ब्रिटेन की सरकार ने टीके की दोनों डोज ले चुके अमेरिकियों और यूरोपीय यूनियन के लोगों के लिए अनिवार्य क्वारेंटाइन खत्म कर दिया है। लेकिन भारत और अन्य देशों को लाल सूची में ही रखा है। यानी भारतीयों को वैक्सीन के दोनों खुराक ले लेने के बावजूद ब्रिटेन जाने पर 10 दिन क्वारेंटाइन में रहना होगा।

क्वारेंटाइन रहने का खर्च करीब 1.8 लाख रुपए संबंधित व्यक्ति को खुद उठाना होगा। खबरों के मुताबिक यह फैसला दो अगस्त से लागू होगा। इस निर्णय को लोगों ने भेदभाव वाला बताया है। ब्रिटेन के परिवहन मंत्री ग्रांट शैप्पस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सिस्टम में भारत अब भी रेड लिस्ट में है। अगली समीक्षा अगले हफ्ते के मध्य में की जाएगी।