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काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट के तार भारत से जुड़े:200 लोगों की जान लेने वाला फिदायीन 5 साल पहले दिल्ली में पकड़ा गया था, 12 आतंकी संगठनों से जुड़ा था

काबुलएक महीने पहले
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तालिबान के कब्जे के बाद काबुल एयरपोर्ट पर 26 अगस्त को हुए फिदायीन हमले में करीब 200 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में अब नए-नए खुलासे हो रहे हैं। रविवार को जानकारी सामने आई कि ब्लास्ट करने वाले फिदायीन हमलावर को 5 साल पहले भारत से डिपोर्ट किया गया था। यह दावा इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) से जुड़ी एक मैगजीन में किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फिदायीन हमलावर का नाम अब्दुल रहमान अल लोगरी था।

मैगजीन में बताया गया कि उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। वह कश्मीर में भारत सरकार की कार्रवाई के विरोध में हिंदुओं को निशाना बनाना चाहता था। मैगजीन ने दावा किया है कि अब्दुल अफगानिस्तान ब्लास्ट को मिलाकर 250 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका था।

रॉ ने अमेरिकी सेना के हवाले किया था
आतंकी संगठन की मैगजीन के मुताबिक अब्दुल अफगानिस्तान से आकर दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में किराए पर कमरा लेकर रह रहा था। 2017 में सिक्योरिटी एजेंसियों को उसके इस्लामिक स्टेट से जुड़े होने की जानकारी मिली थी।

सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर अफगानिस्तान डिपोर्ट कर दिया था। यहां अमेरिकी सेना ने अब्दुल को हिरासत में लेकर उससे कड़ी पूछताछ की थी। उससे मिली जानकारी के बाद सर्च ऑपरेशन चलाकर US फोर्स ने IS के कई ठिकानों को तबाह किया था।

पाकिस्तान में ली थी आतंक की ट्रेनिंग
मैगजीन में कहा गया है कि काबुल एयरपोर्ट के जरिए बहुत से अफगानी ब्यूरोक्रेट्स देश छोड़कर जा रहे थे। इन लोगों ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मदद की थी। इसलिए अब्दुल को एयरपोर्ट पर ब्लास्ट करने के लिए कहा गया था।

अब्दुल से अमेरिकी एजेंसियों ने 2018 में पूछताछ की थी। उस समय उसकी उम्र 20 साल थी। वह अफगानिस्तान के एक अमीर व्यापारी का बेटा था। अब्दुल इस्लामिक स्टेट के 12 आतंकी संगठनों से जुड़ा था। उसे पाकिस्तान में आतंक की ट्रेनिंग दी गई थी।

दिल्ली में आतंकी हमले के इनपुट मिले थे
रॉ को अब्दुल पर उस वक्त शक हुआ, जब अफगानिस्तान के एक बैंक खाते में दुबई से अचानक 50 हजार डॉलर डलवाए गए। इस दौरान ही अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने भारत को दिल्ली में संभावित आतंकी हमले का इंटेलिजेंस इनपुट दिया। मैगजीन में किए गए दावों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्वीकार तो नहीं किया, लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया है।

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