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  • If The Agreement Is Reached, Jews Will Become A Minority In Israel, Everything That Is Necessary To Know About The Dispute Between Israel And Palestine.

भास्कर एक्प्लेनर:समझौता हुआ तो इजरायल में अल्पसंख्यक हो जाएंगे यहूदी, इजरायल-फिलीस्तीन के बीच विवाद को लेकर वह सब कुछ, जो जानना जरूरी है

3 महीने पहले
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इजरायल बनने के बाद 7 लाख फिलीस्तीनी रिफ्यूजी हो गए। ये 70 लाख हो चुके हैं। ये आ गए तो यहूदी अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इससे फिर धर्मयुद्ध छिड़ने का डर है। - Money Bhaskar
इजरायल बनने के बाद 7 लाख फिलीस्तीनी रिफ्यूजी हो गए। ये 70 लाख हो चुके हैं। ये आ गए तो यहूदी अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इससे फिर धर्मयुद्ध छिड़ने का डर है।

अल अक्सा मस्जिद में झड़प के बाद इजरायल और फिलीस्तीन के बीच तनाव और भड़क गया है। हिंसक झड़प से शुरू हुआ विवाद अब रॉकेट हमलों तक पहुंच गया है। ऐसे में जानते हैं कि आखिर क्या है इस विवाद की जड़, क्यों बार-बार यह विवाद बढ़ता है और इसे लेकर दुनिया के दूसरे देशों का क्या रुख है-

मौजूदा विवाद की वजह क्या है?
इसकी वजह पूर्वी यरूशलम के शेख जर्राह डिस्ट्रिक्ट से फिलीस्तीनी परिवारों को बाहर निकालना है। यहां यहूदी सेटलर्स को बसाने की योजना बनाई गई है। फिलीस्तीनी लोग इसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

दोनों देशों के बीच असली विवाद क्या है?
1947 में यूएन ने दो देशों की योजना बनाई- इजरायल और फिलीस्तीन। यरूशलम को यूएन प्रशासित रखा गया। इसी बीच युद्ध छिड़ गया और ज्यादातर इलाके पर इजरायल ने कब्जा कर लिया। उसी की लड़ाई है।

यरूशलम को लेकर विवाद क्यों है?
यरूशलम लड़ाई का धार्मिक पहलू है, जो बाद में जुड़ा। यह इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र जगह है। वहीं टेम्पल माउंट की पश्चिमी दीवार यहूदियों की सबसे पवित्र जगह है। ईसाई भी इसे पवित्र शहर मानते हैं।

ओल्ड सिटी क्या है, जहां ज्यादातर विवाद हो रहा है?
यह यरूशलम का पुराना शहर है और चार हिस्सों में बंटा है। ये 4 क्वार्टर ईसाई, यहूदी, मुसलमानों और आर्मेनियाई लोगों के हैं। चूंकि आर्मेनियाई भी ईसाई ही हैं, तो ज्यादा हिस्सा ईसाई धर्म से प्रभावित है।

दोनों के बीच बातचीत और शांति क्यों नहीं स्थापित हो पा रही है?
इसमें दो दिक्कतें हैं

1. इजरायल यरूशलम के बड़े हिस्से को छोड़ेगा नहीं।

2. इजरायल बनने के बाद 7 लाख फिलीस्तीनी रिफ्यूजी हो गए। ये 70 लाख हो चुके हैं। ये आ गए तो यहूदी अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इससे फिर धर्मयुद्ध छिड़ने का डर है।

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