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भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करने वाली टेक्नोलॉजी:अमेरिकी वैज्ञानिकों का नवाचार; 31 साल से रिकॉर्ड किए जा रहे डेटा से मिली मदद

वॉशिंगटन4 महीने पहले
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साइलेंट क्वेक और वर्चुअल डेटा से मशीन लर्निंग सिस्टम को प्रशिक्षित किया। फोटो- सैन एंड्रियाज फॉल्ट। - Money Bhaskar
साइलेंट क्वेक और वर्चुअल डेटा से मशीन लर्निंग सिस्टम को प्रशिक्षित किया। फोटो- सैन एंड्रियाज फॉल्ट।

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे से अक्सर पूछा जाता है कि क्या भूकंप की भविष्यवाणी संभव है। एजेंसी की वेबसाइट पर कहा गया है कि किसी भी वैज्ञानिक ने किसी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की है। लेकिन जल्द ही एजेंसी के इस जवाब में बदलाव होने वाला है। दशकों की कोशिशों और विफलताओं के बाद लॉस एलोमोस नेशनल लैबोरेटरी में भूभौतिक विज्ञानी डॉ. पॉल जॉनसन की टीम ने ऐसा उपकरण विकसित किया है जो भूकंप के पूर्वानुमान को संभव बना सकता है। स्पीच को टैक्स्ट में बदलने से लेकर कैंसर तक का पता लगाने में काम आ रही मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी को अब सिस्मोलॉजी पर लागू किया जा रहा है। डॉ. जॉनसन बताते हैं कि मशीन लर्निंग की प्रणाली को प्रशिक्षित करने के लिए भूकंप के 10 चक्रों (साइकिल) के डेटा की जरूरत पड़ती है। यह मुश्किल काम है। उदाहरण के लिए कैलिफोर्निया में सैन एंड्रियास फाल्ट हर 40 साल में बड़ा भूकंप पैदा करता है। लेकिन इसे समझने के लिए पर्याप्त रूप से उपयोगी डेटा पिछले 20 साल का (यानी आधा चक्र) ही उपलब्ध है। इस पर डॉ. जॉनसन और उनकी टीम ने 2017 में मशीन लर्निंग की अलग तरह की गतिविधियों (धीमी गति की घटनाएं, जिन्हें साइलेंट क्वेक भी कहा जाता है) पर लागू किया। भूकंप आमतौर में कुछ ही सेकंड में खत्म हो जाता है। पर साइलेंट क्वेक में घंटे, दिन या महीने भी लग सकते हैं। मशीन लर्निंग के नजरिए से यह बेहतर है, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर डेटा देता है। वैसे भी डॉ. जॉनसन की लैब टेक्टोनिक विविधता वाले क्षेत्र सैन एंड्रियाज में है। यहां हर 14 माह में प्लेट्स में हल्की फिसलन होती है, 1990 से वैज्ञानिक इन्हें रिकॉर्ड करते आ रहे हैं। यानी डेटा के बहुत सारे फुल साइकिल हैं। मशीन लर्निंग सिस्टम इस आधार पर यह बताने में सफल रहा कि वे दोबारा कब होंगी।

बच सकती थीं 45 हजार जिंदगियां: अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के मुताबिक पिछले एक दशक में दुनियाभर में भूकंप से 45 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। इनमें 2011 में जापान का भूकंप, 2015 में नेपाल में आया भूकंप, 2018 में इंडोनेशिया का भूकंप शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन्हें लेकर भविष्यवाणी संभव हो पाती, तो ये 45 हजार जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

वास्तविक भूकंप का अनुमान लगाने के लिए संवेदी जोन में इस्तेमाल
लैब क्वेक ऐसे मिनिएचर भूकंप हैं, जिन्हें लैब में कांच के मोतियों पर हल्के दबाव से पैदा किया जाता है। टीम ने एक सिमुलेशन (कंप्यूटर मॉडल) भी तैयार किया है, जो इन हलचलों को कैप्चर करने में सक्षम है। टीम इस पर अपने मशीन लर्निंग सिस्टम को भूकंप के अनुमान के लिए प्रशिक्षित कर रही है। इसे वास्तविक भूगर्भीय दोष पता लगाने के लिए सैन एंड्रियाज फॉल्ट में लगाएंगे। वहां 2004 में 6 रिक्टर स्केल का भूकंप आया था। तीन से छह माह में नतीजे मिलने लगेंगे। जॉनसन बताते हैं कि यह एक क्रांतिकारी खोज होगी।’