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अपनों का विरोध:भारत के बुरे वक्त में लंबे समय तक चुप्पी साधने पर भारतीय अमेरिकी कमला हैरिस से निराश- कहते हैं, उनसे ताे ऐसी उम्मीद न थी

एक महीने पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली
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प्रवासी कार्यक्रम में हैरिस बोलीं- हम भारत की मदद के लिए संकल्पित। - Money Bhaskar
प्रवासी कार्यक्रम में हैरिस बोलीं- हम भारत की मदद के लिए संकल्पित।
  • आखिरकार अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला देवी हैरिस ने भारत में कोरोना की तबाही पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है

आखिरकार अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला देवी हैरिस ने भारत में कोरोना तबाही पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने सोमवार को एक प्रभावी एशियन अमेरिकन ग्रुप में कहा कि भारत में कोविड से लगातार बढ़ती मौतें किसी सदमे से कम नहीं है। ऐसे वक्त में अमेरिका अपने मित्र के साथ मजबूती के खड़ा है।

बीते 28 अप्रैल को बाइडेन प्रशासन ने भारत की 750 करोड़ से अधिक की मदद की घोषणा की थी। बाइडेन प्रशासन ने कमला हैरिस को भारतीय संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम जिम्मेदारी दी है। फिर भी, जैसे ही कोरोना के चलते भारतीय हेल्थ सिस्टम चरमराने लगा, इस पर हैरिस और बाइडेन प्रशासन ने काफी धीमी प्रतिक्रिया दी।

ऐसे में उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी लोगों ने स्पष्ट रूप से महसूस की। मयो क्लीनिक में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया संपथकुमार कहती हैं, ‘चित्तीस को मदद की जरूरत है।’ हैरिस ने शपथग्रहण के दौरान भारतीय महिलाओं को धन्यवाद देने के लिए तमिल शब्द चित्तीस (आंटी) का इस्तेमाल किया था।

इस संकट पर 25 अप्रैल को पहली बार हैरिस की तरफ से संक्षिप्त बयान जारी किया गया था, ‘हम भारत के लोगों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।’ बाद में अमेरिका ने मदद की घोषणा की थी। इसमें हैरानी की बात नहीं है कि कई भारतीय-अमेरिकी इस रवैए से बहुत निराश और दुखी हैं। कमला हैरिस के राज्य कैलिफोर्निया में भारतीय अमेरिकन डॉक्टर प्रिया नागार्जुन कहती हैं, ‘भारत की मदद के लिए उन्होंने काफी देरी से कदम उठाए।

मैं यह नहीं कह रही हूं कि कमला को भारत की वजह से तेजी से चैंपियन बनना चाहिए था। मैं सिर्फ इतना कह रही हूं कि वे पूरे चुनाव के दौरान भारतीय विरासत से जुड़े होने का दंभ भरती रहीं। चार हफ्ते से कम से कम हजारों भारतीय दम तोड़ रहे हैं। यहां तक उनके राज्य तमिलनाडु में भी स्थिति खराब है। उन्हें बोलना तो चाहिए था। लेकिन वे शांत रहीं।

यहां तक कि कई भारतीय अमेरिकी सांसद जैसे प्रेमा जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति मजबूती से बाइडेन प्रशासन के सामने आवाज उठाते रहे। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी आवाज उठाई। लेकिन कमला हैरिस शांत रहीं।’ नागार्जुन की तरह अमेरिका में 48 लाख भारतीय प्रवासी काफी चिंतित और निराश है। क्योंकि करीब हर भारतीय अमेरिकी परिवार ने कोविड में अपने किसी न किसी प्रियजन को खोया है। इस निराशा के समय में भारतीय अमेरिकी अपने स्तर पर भारत को हरसंभव मदद भेज रहे हैं। फंडिंग कर रहे हैं।

ऑक्सीजन कन्संट्रेटर्स भेज रहे हैं। टीके पर से पेटेंट हटाने के लिए बाइडेन प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। मदुरई से आकर न्यूयॉर्क में बसे परवेज अहमद कहते हैं कि बाइडेन प्रशासन ने मदद करने में हिचकिचाहट दिखाई। मेरे परिवार ने उन्हें वोट दिया। इस बुरे वक्त में भारतीय अमेरिकी चाहते हैं कि उपराष्ट्रपति को कोविड से जूझ रहे भारतीयों की आवाज बनना चाहिए था। कमला हैरिस के खिलाफ कई भारतीय अमेरिकियों का गुस्सा अहम है, क्योंकि वे इस वर्ग में काफी लोकप्रिय हैं।

दैनिक भास्कर ने भारतीय अमेरिकियों से बात की। वे निशाना बनाए जाने की आशंका से नाम उजागर नहीं करना चाहते। न्यूजर्सी में भारतीय मूल की डॉक्टर कहती हैं कि भारतवंशियों को कमला हैरिस से बड़ी उम्मीदें थी। हम उनसे इससे अच्छे की उम्मीद कर रहे थे। कुरई हेल्थ फाउंडर नील खोसला कहते हैं, ‘ओ कमला हैरिस तुमसे ऐसी उम्मीद ना थी?’ वहीं, ऑनडेक प्रोग्राम के डायरेक्टर लिखते हैं कि कमला हैरिस की चुप्पी हमें चौंकाती है।

  • मेरी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। मां श्यामला भारत में ही पली। अमेरिका के लिए भारत का कल्याण अहम है। जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके लिए दुख प्रकट करती हूं। महामारी की शुरुआत में भारत ने अमेरिका की मदद की थी। आज हम भारत की मदद के लिए संकल्पित हैं।’ - कमला देवी हैरिस, उपराष्ट्रपति अमेरिका (एक प्रवासी कार्यक्रम में सोमवार को कहा)
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