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कम वेतन और दुर्व्यवहार का आरोप:न्यूजर्सी में मंदिर का निर्माण रुका, भारत से गए मजदूरों का आरोप-पैसे कम दे रहे, काम ज्यादा है, मुकदमा दर्ज

न्यूजर्सी (अमेरिका)एक महीने पहलेलेखक: एमी कोरेल
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रॉबिंसविले में बन रहा हिंदू मंदिर - Money Bhaskar
रॉबिंसविले में बन रहा हिंदू मंदिर

न्यूजर्सी (अमेरिका) के रॉबिंसविले में बन रहा हिंदू मंदिर विवादों में घिर गया है। यहां काम कर रहे भारतीय श्रमिकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें प्रतिघंटे के हिसाब से कम पैसे दिए जा रहे हैं और ज्यादा काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस शिकायत पर अमेरिकी एजेंसियों ने मंदिर का निर्माण कार्य रुकवा दिया है।

यह मंदिर बोचनवासी पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बाप्स) बनवा रही है। मंगलवार को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के अधिकारियों ने मंदिर परिसर में पहुंच कर जांच की और करीब 90 मजदूरों के बयान लेकर उन्हें साइट से बाहर निकाला। इस कार्यवाही में एफबीआई के अलावा होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और श्रम विभाग भी शामिल हुए।

जानकारी के मुताबिक, मंदिर प्रशासन इन मजदूरों को प्रति घंटे 1 डॉलर (73 रुपए) दे रहा था, जबकि अमेरिका में न्यूनतम मजदूरी 7 डॉलर प्रति घंटे तय है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में इसे बढ़ाकर 15 डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। मजदूरों का कहना है कि भारत में हुए रोजगार समझौते के तहत उन्हें रिलीजस वीजा (आर-1) पर यहां लाया गया था। जब वे यहां पहुंचे, तो उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। उन्हें सुबह 6.30 बजे से लेकर शाम 7.30 बजे तक मंदिर में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। साथ ही तय पारिश्रमिक से कम पैसे दिए जाते हैं।

उन्हें हर महीने केवल 50 डॉलर (3500 रुपए से कुछ ज्यादा) दिए जाते हैं, बाकी भारत में उनके खातों में जमा करने की बात कही गई। इधर, मंदिर के चीफ एक्जीक्यूटिव कनु पटेल ने कहा है कि मजदूरों के मेहनताने को लेकर किए गए दावे निराधार हैं।

आरोपः श्रमिकों से कहा-दूतावास को बताना कि तुम अच्छे कारीगर और चित्रकार हो

श्रमिकों के वकील का कहना है कि न्यूजर्सी के कोर्ट में मेहनताने के लिए मंदिर प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि मंदिर प्रशासन ने अंग्रेजी में तैयार कई दस्तावेजों पर इन मजदूरों के हस्ताक्षर लिए हैं। साथ ही अमेरिका दूतावास को यह बताने के लिए कहा गया कि वे सभी कुशल कारीगर और चित्रकार हैं। जबकि यह सामान्य श्रमिक हैं और इन्हें कारीगर या चित्रकारों के काम नहीं आते। इन्हें गलत तरह से यहां लाया गया है। अप्रवासी मामलों की वकील स्वाति सावंत ने कहा कि इन मजदूरों ने सोचा था कि वे अमेरिका में अच्छी नौकरी करेंगे। लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जाएगा।

आरोप गलत, कोर्ट में जवाब देंगेः बाप्स

बाप्स के प्रवक्ता लेनिन जोशी का कहना है कि इन लोगों ने नक्काशी वाले पत्थरों को जोड़ने का जटिल काम किया है। यह आरोप गलत हैं कि ये सामान्य श्रमिक हैं। जोशी के मुताबिक, सभी तथ्य सामने आने के बाद हम कोर्ट में उत्तर देंगे और बताएंगे कि यह सभी आरोप गलत हैं।

2014 में बनना शुरू हुआ यह मंदिर

यह मंदिर तकरीबन 1000 करोड़ की लागत से बन रहा है। इसका काम 2014 में शुरू हुआ था। बाप्स की योजना इसे अमेरिका का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बनाने की है। प्रिंसटन के नजदीक बन रहा यह मंदिर 4 लाख हिंदुओं के लिए था, जो इस इलाके में सबसे बड़ी जनसंख्या है।