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तालिबान के हाथ लगा खजाना:पाकिस्तान से सटी चौकी पर कब्जा किया तो मिले 300 करोड़ रुपए, यह पैसा अफगानिस्तान की सेना छोड़कर भागी थी

काबुल3 महीने पहले
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अफगानिस्तान की 85% जमीन कब्जा चुका अफगान तालिबान दिन-ब-दिन अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। तालिबान के लड़ाके रोजाना अफगानिस्तान की सेना की चौकियों पर कब्जा कर रहे हैं। पाकिस्तान से सटी ऐसी ही एक चौकी पर कब्जा करने जब तालिबान के आतंकी पहुंचे तो उनकी किस्मत खुल गई। यहां उन्हें 3 अरब पाकिस्तानी रुपए (300 करोड़) मिले।

पाकिस्तानी मीडिया जियो न्यूज के मुताबिक तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने स्टेटमेंट जारी कर ये बात कबूली है। घटना कंधार जिले के बोल्डाक में पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर क्रॉसिंग पर बनी चेक पोस्ट की है। जियो न्यूज के अनुसार तालिबानियों को अपनी तरफ आता देख अफगानिस्तान की सेना चेक पोस्ट छोड़कर भाग गई।

अफगानिस्तान का झंडा हटाकर तालिबानी झंडा लगाया
चौकी पर कब्जा करते ही तालिबानी लड़ाकों ने सबसे पहले अफगानिस्तान का झंडा हटाया और अपना झंडा लगा दिया। इस चौकी को रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से अफगानिस्तान और पाकिस्तान की बॉर्डर को आसानी से क्रॉस किया जा सकता है। इसे बोल्डाक-चमन-कंधार रोड कहा जाता है। अब इस पर तालिबान का कब्जा हो गया है।

तालिबान ने लूटा स्मगलर्स से लिया पैसा
पाकिस्तान की सेना ने भी कंफर्म कर दिया है कि चौकी पर तालिबान काबिज हो चुका है। अफगानिस्तान ने रक्षा मंत्रालय ने भी इस घटना पर बयान जारी किया है। उनका कहना है कि वे मामले पर नजर बनाए हैं।

पाकिस्तानी जियो न्यूज का कहना है कि आतंकियों के हाथ जो पैसा लगा है, वह स्मगलर्स से लिया गया है। जब भी इस रूट पर कोई स्मगलर पकड़ा जाता था तो अफगानिस्तान के सैनिक उससे रिश्वत ले लेते थे।

भारत ने कंधार दूतावास से 50 डिप्लोमेट्स बुला लिए थे
इससे पहले 11 जुलाई को भारत के 50 डिप्लोमेट्स और कर्मचारियों ने कंधार का दूतावास खाली कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि दूतावास को बंद नहीं किया गया है। कंधार में तालिबान और अफगानिस्तान की आर्मी में चल रही लड़ाई को देखते हुए स्टाफ को कुछ दिनों के लिए बुलाया है। इसके बाद दूतावास के स्टाफ को एयरफोर्स के विमान से भारत लाया गया था। वहां जाने और वापस आने के लिए पाकिस्तान के रूट का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

क्या और कैसा है तालिबान? कंधार विमान अपहरण में क्या रोल था?

  • 1979 से 1989 तक अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का शासन रहा। अमेरिका, पाकिस्तान और अरब देश अफगान लड़ाकों (मुजाहिदीन) को पैसा और हथियार देते रहे। जब सोवियत सेनाओं ने अफगानिस्तान छोड़ा तो मुजाहिदीन गुट एक बैनर तले आ गए। इसको नाम दिया गया तालिबान। हालांकि, तालिबान कई गुटों में बंट चुका है।
  • तालिबान में 90% पश्तून कबायली लोग हैं। इनमें से ज्यादातर का ताल्लुक पाकिस्तान के मदरसों से है। पश्तो भाषा में तालिबान का अर्थ होता हैं छात्र या स्टूडेंट।
  • पश्चिमी और उत्तरी पाकिस्तान में भी काफी पश्तून हैं। अमेरिका और पश्चिमी देश इन्हें अफगान तालिबान और तालिबान पाकिस्तान के तौर पर बांटकर देखते हैं।
  • 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत रही। इस दौरान दुनिया के सिर्फ 3 देशों ने इसकी सरकार को मान्यता देने का जोखिम उठाया था। ये तीनों ही देश सुन्नी बहुल इस्लामिक गणराज्य थे। इनके नाम थे- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और पाकिस्तान।
  • 1999 में जब इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को हाईजैक किया गया था, तब इसका आखिरी ठिकाना अफगानिस्तान का कंधार एयरपोर्ट ही बना था। उस वक्त पाकिस्तान के इशारे पर तालिबान ने भारत सरकार को एक तरह से ब्लैकमेल किया। तीन आतंकियों को रिहा किया गया और तब हमारे यात्री देश लौट सके थे।
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