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सवाल-जवाब:कोरोना के किन मरीजों को होम आइसोलेशन में रखें, निमोनिया की वैक्सीन कोरोना से कितना बचाती है; एक्सपर्ट से जानिए इनके जवाब

एक महीने पहले
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  • सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों को 25 हिस्सों में बांटा जाता है, उनमें से कितने हिस्से प्रभावित हुए हैं यह पता चलता है

क्या निमोनिया की वैक्सीन कोरोना से बचाती है, किस तरह के मरीजों को होम आइसोलेशन में रहना चाहिए, क्या मास्क लगाने के बाद खांसने पर वायरस दूसरे को संक्रमित कर सकते हैं, कोरोना से जुड़े ऐसे कई सवालों के जवाब राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के सीनियर जनरल फिजिशियन डॉ. ए. के. वार्ष्णेय ने दिए। कोरोना की दूसरी लहर के बीच इन सवालों को समझें और अलर्ट रहें...

कोरोना संक्रमण होने के बाद फेफड़ों में कितना संक्रमण है, इसे जानने के लिए क्या सीटी स्कैन जरूरी है?
अगर आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव है और ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है तो खुद से सीटी स्कैन कराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर के पास जाएं, उन्हें पता है कि कैसे इलाज करना है। अगर बुखार नहीं उतर रहा है तो कई बार कुछ ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं।

यदि आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव है, कोविड के लक्षण हैं और ऑक्सीजन लेवल गिरता है तो उस समय निमोनिया का खतरा बढ़ता है, तब डॉक्टर्स सीटी स्कैन कराते हैं। सीटी स्कैन की मदद से फेफड़ों में निमोनिया का क्या स्तर है, ये पता चलता है। सीटी स्कैन में दोनों लंग्स (फेफड़े) को 25 हिस्सों में बांटा जाता है। उनमें से कितने हिस्से प्रभावित हुए हैं यह पता चलता है।

होम आइसोलेशन में रहने के लिए किन मरीजों को सलाह दी जाती है?
कोरोना में 90 प्रतिशत मरीजों में अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन होता है यानि सिर्फ बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, स्वाद या खुशबू का न मिलना जैसे लक्षण दिखते हैं। ऐसे व्यक्ति 10 से 15 दिन तक घर पर रह कर ही ठीक हो सकते हैं लेकिन उसके लिए घर में एक अलग से कमरा हो, पल्स ऑक्सीमीटर, बुखार नापने वाला थर्मामीटर हो तब होम आइसोलेशन दिया जाता है।

जो लोग बुजुर्ग, डायबिटीज, हार्ट मरीज हैं उन्हें तभी होम आइसोलेशन देते हैं, जब वो लगातार डॉक्टर से संपर्क में रहते हैं या परिवार में कोई उनकी देखभाल करने वाला हो, तो ही ऐसा किया जा सकता है।

क्या निमोनिया से बचाने के लिए वैक्सीन लगाने पर कोरोनावायरस का असर फेफड़े पर नहीं होगा?
फेफड़ों में इंफेक्शन कई कारणों से होता है, जिसे निमोनिया कहते हैं। कुछ लोग जैसे बुजुर्गों, सीओपीडी, अस्थमा डायबिटीज वाले लोगों में न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा से भी फेफड़ों में निमोनिया होने का खतरा रहता है।

इससे बचने के लिए न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन लगाई जाती है। यह उन्हें फेफड़ों के इंफेक्शन से बचाने में मदद करती हैं। जहां तक कोरोना का सवाल है, इससे बचने के लिए अलग वैक्सीन उपलब्ध हो गई है। यही वैक्सीन कोरोना से बचाव का उपाय है।

आइसोलेशन खत्म होने के बाद क्या कोई इंसान वायरस ट्रांसमिट कर सकता है?
अगर किसी संक्रमित में लक्षण नहीं दिख रहे हैं या हल्के लक्षण हैं तो आइसोलेशन के 10 दिन में 3 से 6 दिन तक बुखार नहीं है तो उससे संक्रमण का खतरा कम होता है। लेकिन अगर दवा ले रहे हैं या बीच में बुखार या खांसी जैसे लक्षण हैं तो वायरस का संक्रमण फैल सकता है। इसलिए आइसोलेशन पूरा करें। रिपोर्ट निगेटिव आने तक लोगों से दूरी बनाकर रखें। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद संक्रमण का खतरा नहीं होता।

अगर कोई मास्क लगाकर खांसता या बोलता है तो क्या वायरस बाहर आ सकते हैं?
ये निर्भर करता है कि इंसान ने किस तरह का मास्क लगाया है। अगर किसी ने एन-95 मास्क लगाया है तो 95 प्रतिशत सुरक्षा मिलती है। एन-95 को काफी अच्छा माना जाता है। इसके बाद आता है सर्जिकल मास्क। ये ज्यादातर लोग ढीला लगाते हैं। लेकिन इसे इस तरह लगाएं कि मास्क लगाने के बाद मुंह की भाप या हवा बाहर न जाएं क्योंकि अगर हवा बाहर आ रही है तो अंदर भी जा सकती है। इससे वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है।

अब आता है कॉटन का मास्क जो थोड़ा इन दोनों से कम या 50 प्रतिशत तक प्रोटेक्शन देते हैं। ऐसे में अब डबल मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है। अगर बाहर जा रहे हैं तो नीचे सर्जिकल मास्क लगाएं और ऊपर से कॉटन मास्क लगाएं। ऊपर कॉटन मास्क इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उसे धो सकते हैं। लेकिन एन-95 मास्क लगाया तो डबल मास्क की जरूरत नहीं है।

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