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कोरोना का टीका इसलिए भी जरूरी:वैक्सीन ले चुके लोगों को कोरोना का खतरनाक वैरिएंट B.1.617 संक्रमित तो कर सकता है लेकिन हालात जानलेवा नहीं बनेंगे

एक महीने पहले
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  • भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों की संयुक्त रिसर्च में किया गया दावा

वर्तमान में कोरोना के जिस खतरनाक वैरिएंट से संक्रमण फैल रहा है, उसे B.1.617 नाम दिया गया है। यह फाइजर और कोविशील्ड वैक्सीन ले चुके लोगों को भी संक्रमित कर रहा है। भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना का यह रूप वैक्सीन ले चुके लोगों को संक्रमित तो कर सकता है लेकिन हालत जानलेवा नहीं बना पाएगा। वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों पर इसका जानलेवा असर नहीं होगा।

यह दावा इंडियन सार्स-कोव-2 जिनोमिक कनसोर्शिया और ब्रिटिश वैज्ञानिकों की संयुक्त रिसर्च में किया गया है।

मार्च-अप्रैल में इस वैरिएंट में संक्रमण फैलाया
शोधकर्ता और CSIR इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के हेड अनुराग अग्रवाल के मुताबिक, रिसर्च मार्च और अप्रैल में हुई है। शोधकर्ताओं ने वैक्सीन के पूरे डोज ले चुके स्वास्थ्यकर्मियों पर रिसर्च की। ब्लड सैम्पल के जरिए इनकी जांच हुई।

शोधकर्ता अनुराग अग्रवाल के मुताबिक, मार्च और अप्रैल के दौरान ही सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले कोरोना के इसी वैरिएंट के कारण बढ़े हैं, लेकिन जिन लोगों ने वैक्सीन की पूरी डोज ली हैं उनमें इसका संक्रमण जानलेवा नहीं हुआ।

WHO ने भी इसलिए इसे चिंताजनक बताया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में कोरोना के इस वैरिएंट B.1.617 को लेकर चिंता जताई थी। WHO ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न कहा है। जिसका मतलब है, यह काफी संक्रामक है। मौजूदा दवाओं और वैक्सीन का इस पर असर कम हो रहा है।

भारत में मामले बढ़ने के लिए यही वैरिएंट जिम्मेदार
WHO ने बुधवार को कहा, भारत में कोरोना के मामले बढ़ने के लिए कोरोना का यही वैरिएंट जिम्मेदार है। कोरोना का यह वैरिएंट भारत के समेत दुनिया के 44 देशों में मिला है। भारत में पहली बार B.1.617 वैरिएंट पिछले साल अक्टूबर में मिला था, जब 44 देशों के 4,500 से अधिक सैम्पल की जांच हुई थी।

तीन म्यूटेशन्स की पहचान

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) ने अपने वीकली रिव्यू में इससे संबंधित जानकारी दी है। इसे वैरिएंट ऑफ कन्सर्न (VOC) कैटेगरी में रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वैरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था। इस वैरिएंट में लगातार बदलाव यानी म्यूटेशन होता है, लिहाजा यह जल्द पकड़ में नहीं आता।

पीएचई की रिपोर्ट में कहा गया है कि B.1.617 वैरिएंट के अब तक तीन म्यूटेशन की पहचान की गई है। तकनीकि तौर पर इन्हें E484Q,L452R और P681R नाम दिया गया है।

इससे ज्यादा खतरा क्यों

रिपोर्ट के मुताबिक, नए स्ट्रेन में म्यूटेशन ज्यादा तेजी से होते हैं और यही वजह है कि इसके एक म्यूटेशन की पहचान हो पाती है तब तक दूसरा म्यूटेशन सामने आ जाता है। कई मामलों में देखा गया है कि यह बहुत तेजी से फैलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को खत्म कर देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए यही वैरिएंट जिम्मेदार हो सकता है। इसकी वजह से ही वहां दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित हो रही है।

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