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सिर्फ एक मिनट में मूवी रिव्यू:कहानी फीकी, लेकिन शादी और तलाक के सीरियस मुद्दे को मजाकिया अंदाज में पेश करती है जुग जुग जियो

3 महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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शादी को कैसे निभाया जाए, वैवाहिक बंधन का सही मायने में अर्थ क्या होता है, शादी के सही बंधन को किसके साथ जोड़ा जाए, इन्हीं बातों को बड़ी खूबसूरती से हास्य और पारिवारिक ड्रामा के अंदाज में निर्देशक राज मेहता ने फिल्म में बताया है।

कैसी है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी पटियाला, 1998 से कुकू सैनी (वरुण धवन), नैना शर्मा (कियारा आडवानी), गुरप्रीत शर्मा (मनीष पॉल) के स्कूली दिनों से शुरू होती है। एक दिन क्लास में गुरपीत आकर कुकू से कहता है कि नैना बाहर अपने सहपाठियों के साथ बातें कर रही है, तब कुकू का पारा चढ़ता है और सहपाठियों को चेतावनी देते हुए अपने प्यार को दर्शाता है। यहां से कहानी में उछाल आता है और प्यार-रोमांस में तेजी के साथ आगे बढ़ते हुए कुकू और नैना पति-पत्नी के रूप में कनाडा जा पहुंचते हैं, जहां नैना HR की ऊंची पोस्ट पर होती है। दोनों के बीच अहम की टकराहट होती है, जिससे शादी के पांच सालों में ही प्यार-रोमांस छूमंतर होने के साथ डिवोर्स के फैसले पर आ पहुंचते है, लेकिन दोनों, कुकू की बहन गिन्नी (प्राजक्ता कोली) की शादी तक रुकने का वादा करके अच्छे पति-पत्नी का ढोंग रचाते हुए इंडिया शादी में शामिल होते हैं।

शादी की तैयारियां शुरू होती हैं, इस बीच नैना की कंपनी उसे बड़ी पोस्ट ऑफर करते हुए विदेश भेजना चाहती है, तब वह कुकू से घर में अपने तलाक के बारे में बताने का दबाव डालती है। कुकू अपनी बात पिता भीम (अनिल कपूर) के सामने रख पाए, उससे पहले शराब के नशे में भीम, कुकू को बताता है कि वह शादी के 30 सालों बाद भी पत्नी गीता सैनी (नीतू कपूर) के साथ खुश नहीं है और मीरा (टिस्का चोपड़ा) से प्यार करता है। यह सुनकर कुकू के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।

यहीं से कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है और कहानी में चार-चांद तब लगता है, जब इन्हें आइडल शादी मानने वाली गिन्नी अपने दिल का राज खोलती है। इतनी गहरी और गंभीर बातों को मजाकिया अंदाज पर्दे पर देखने का मजा पर्दे पर ही आएगा।

फिल्म फर्स्ट हाफ में बड़े हास्य अंदाज में तेजी के साथ बढ़ती है और सेकेंड हाफ आते-आते कहानी गंभीरता में लिपट जाती है। कहानी हंसाती-गुदगुदाती, इमोशनल करते हुए आगे बढ़ती है, तब बीच-बीच में कुछ ऐसे सीन भी हैं, जो समझ से परे हैं। जैसे गिन्नी अपनी शादी के बीच बाहर निकलकर जाती है और अपने प्रेमी को किस करके वापस आ जाती है। वहीं नैना और कुकू के बेडरूम में आधी रात को पहले उनका भाई गुरपीत और फिर पिता भीम खिड़की से आ धमकते हैं, यह तार्किक नहीं लगता। इसी तरह जहां एक तरफ पारिवारिक कल्चर को बड़ी आधुनिकता के साथ दिखाया गया है, वहीं अपने प्यार और डिवोर्स के फैसले को एक-दूसरे के सामने रख पाने में काफी हिचक और लंबा वक्त लगाया है। कहानी के मुताबिक लोकेशन, सेटअप और शादी जैसे समारोह में बड़ी भव्यता के साथ दिखाया गया है।

आखिर में अभिनय की बात की जाए, तब वरुण धवन, कियारा आडवानी, नीतू कपूर, अनिल कपूर, मनीष पॉल, प्राजक्ता कोली आदि अपने कैरेक्टर को बड़ी खूबसूरती से निभाते नजर आए। पिंक कलर की साड़ी में डांस करते हुए कियारा की खूबसूरती साफ झलकती है। प्राजक्ता का काम औसत लगा, तो मनीष पॉल को अच्छा स्पेस मिला है और उन्होंने अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवाई है।

बाकी मंजे कलाकार अनिल कपूर और नीतू कपूर का अंग-अंग अभिनय करता दिखाई देता है। कॉमेडी, पारिवारिक ड्रामा को देखने के शौकीन जरूर थिएटर जाकर देखें। फिल्म को पांच में से तीन स्टारर दिए जा सकते हैं।