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  • The OTT Rights Of Amitabh's 'Jhund' Were Sold For 33 Crores, The Story Of Maharashtra Itself, So It Will Be Released Only After The Theater Opens Here.

बिग बी का बिग इंतजार:अमिताभ की 'झुंड' के OTT राइट्स 33 करोड़ में बिके, कहानी महाराष्ट्र की इसलिए यहां थिएटर खुलने के बाद होगी रिलीज

मुंबई3 महीने पहलेलेखक: मनीषा भल्ला
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  • मराठी फिल्म 'सैराट' के डायरेक्टर नागराज मंजुले इस फिल्म से करेंगे बॉलीवुड डेब्यू, अमिताभ फिर विजय के किरदार में

मेगास्टार अमिताभ बच्चन की 'झुंड' की थिएटर रिलीज पर सस्पेंस बना हुआ है। फिल्म के OTT राइट्स 33 करोड़ में बेचे जाने की खबर है। माना जा रहा है कि अगर महाराष्ट्र में थिएटर खोलने में और देरी हुई तो शायद ‘झुंड’ अमिताभ की ऐसी दूसरी फिल्म बनेगी, जो सीधे OTT पर जाएगी। इससे पहले अमिताभ की 'गुलाबो सिताबो' OTT पर रिलीज हुई थी।

यह हफ्ता बॉलीवुड के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। अक्षय कुमार की ‘बेल बॉटम’ रिलीज हो गई है। इसके बाद अमिताभ-इमरान हाशमी की ‘चेहरे’ 27 अगस्त को रिलीज हो रही है।

महाराष्ट्र में थिएटर बंद हैं, तेलंगाना के अलावा दूसरे राज्यों में थिएटर 50% ऑक्यूपेंसी के साथ ही खुले हैं। फिल्मों के थिएटर बिजनेस के लिए महाराष्ट्र काफी महत्वपूर्ण है। माना जाता है फिल्म की कमाई का करीब 25% हिस्सा महाराष्ट्र से ही निकलता है। बेल बॉटम और चेहरे के मेकर्स ने महाराष्ट्र से होने वाली कमाई छोड़ने का फैसला किया और फिल्म थिएटर में रिलीज कर रहे हैं, लेकिन 'झुंड' के लिए यह संभव नहीं है।

सुपरहिट मराठी फिल्म 'सैराट' के डायरेक्टर नागराज मंजुले 'झुंड' से बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं। यह महाराष्ट्र के फुटबॉल कोच विजय बारसे की बायोपिक है। यही कारण है कि फिल्म की 25% नहीं, बल्कि उससे ज्यादा कमाई अकेले महाराष्ट्र से हो सकती है। कहानी, डायरेक्टर और कॉमर्शियल एंगल इस सबको ध्यान में रखते हुए इस फिल्म को महाराष्ट्र के दर्शकों को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में रिलीज करने का कोई खास फायदा नहीं है।

'झुंड' अमिताभ की बहुप्रतीक्षित फिल्म है, जिसमें वे झोपड़पट्टी के बच्चों को फुटबॉल सिखाते दिखाई देंगे। ये फिल्म फुटबॉल कोच विजय बारसे की बायोपिक है।
'झुंड' अमिताभ की बहुप्रतीक्षित फिल्म है, जिसमें वे झोपड़पट्टी के बच्चों को फुटबॉल सिखाते दिखाई देंगे। ये फिल्म फुटबॉल कोच विजय बारसे की बायोपिक है।

OTT का रास्ता भी खुला है

अमिताभ भारतीय सिनेमा के आइकॉन हैं, बॉलीवुड में स्पोर्ट्स बायोपिक भी बहुत चलती है। नागराज मंजुले की 'सैराट' मराठी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म थी। इतना ही नहीं, उसे क्रिटिकल एक्लेम भी बहुत मिला। यह सारे भारत में देखी गई थी। फिर इस फिल्म की हिंदी रिमेक 'धड़क' भी बनी, जिससे जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर ने डेब्यू किया था।

'झुंड' के इतने सारे प्लस पॉइंट हैं, लेकिन कॉमर्शियल वायबिलिटी भी अहम है। बाजार के सूत्रों के अनुसार अनुमानित 20 करोड़ में बनी इस फिल्म के OTT राइट्स 33 करोड़ में बेचकर मेकर्स ने कॉमर्शियल रिस्क टाल दिया है।

‘चेहरे’ और महाराष्ट्र का इंतजार

फिल्म 'झुंड' के एक प्रोड्यूसर संदीप सिंह ने बताया कि हम 'चेहरे' का रिस्पॉन्स देखेंगे। महाराष्ट्र में सिनेमा खोलने की अनुमति का भी इंतजार है। फिल्म थिएटर में कब रिलीज करनी है या फिर ये सीधे OTT पर जाएगी, इसका फैसला बाद में होगा।

फिल्मों को समझने वाले ‘झुंड’ का इंतजार करेंगे

फिल्म ट्रेड एनालिस्ट और प्रोड्यूसर गिरीश जौहर ने बताया कि जो लोग फिल्म की आर्ट, स्टोरी और क्रिएटिविटी की बातें समझते हैं, वे 'झुंड' का इंतजार जरूर करेंगे। नागराज मंजुले ‘सैराट’ में अपने आपको साबित कर चुके हैं।

यह फिल्म थिएटर के लिए ही बनी है। आज की स्थिति में दूसरे फिल्म मेकर्स की तरह ‘झुंड’ के मेकर्स भी बेल बॉटम और चेहरे का रिस्पांस देखेंगे। उम्मीद है कि इस हफ्ते के अंत में कोई फैसला हो जाए।

सितंबर के पहले हफ्ते से उम्मीद

चेहरे के प्रोड्यूसर आनंद पंडित ने बताया कि हम 27 अगस्त से फिल्म रिलीज कर रहे हैं। उम्मीद है कि महाराष्ट्र में भी सितंबर के पहले हफ्ते में थिएटर खोलने की अनुमति मिल जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो हमें और बेहतर बिजनेस मिल जाएगा।

अमिताभ फिर से विजय

झुंड सिर्फ कॉमर्शियल नहीं, और कई मायनों में भी खास है

  • विजय नाम अमिताभ की खास पहचान है। ‘झुंड’ स्लम फुटबॉल कोच विजय बारसे की बायोपिक है। यहां अमिताभ फिर से विजय बने हैं।
  • फिल्म लवर्स में झुंड के इंतजार की एक और वजह है नागराज मंजुले। इनके डायरेक्शन में बनी सैराट ने देश-दुनिया में झंडे गाड़े थे। वह इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं।
  • अमिताभ जैसे एक्टर को बेहतर डायरेक्टर मिलना, यानी सोने पे सुहागा। यह फिल्म अमिताभ की इस पारी का एक और माइलस्टोन साबित हो सकती है।
  • किरदार के लिए अमिताभ की प्रिपरेशन आज भी बेमिसाल है। उन्होंने इस उम्र में फुटबॉल की सारी टेक्नीक मैदान में ही विजय बारसे से सीखी है। TV पर घंटों तक फुटबॉल देखकर भी उसकी बारीकियां जानी हैं।

नॉन एक्टिंग बैकग्राउंड से सारे बच्चे

फिल्म में फुटबॉल टीम के बच्चे नॉन एक्टिंग बैकग्राउंड से हैं। सारे मिडिल क्लास फैमिली से हैं और खुद कहीं न कहीं काम करते हैं। इंडस्ट्री में आज भी बड़े-बड़े एक्टर अमिताभ के सामने नर्वस हो जाते हैं, फिर इन बच्चों से एक्टिंग करवाना बिल्कुल आसान नहीं था।

इसलिए, अमिताभ ने इन बच्चों के साथ सीधे शूटिंग शुरू नहीं की। उन्होंने बच्चों के साथ काफी समय गुजारा। उनके साथ खेले, साथ में खाना खाया, ढेर सारी बातें करते रहे। सबने साथ मिलकर फुटबॉल की प्रैक्टिस की। इस तरह बच्चों का कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ाया गया।

बॉक्स ऑफिस या OTT​​​​​​​, अमिताभ की फिल्में खास होती हैं

अमिताभ आज भी बॉलीवुड के सबसे व्यस्त कलाकार हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ OTT पर आई थी। इसमें अमिताभ की एक्टिंग की बहुत चर्चा हुई थी। इससे पहले उनकी 'बदला' सुपरहिट रही थी। जबकि ‘ठग ऑफ हिन्दुस्तान अपेक्षा के अनुसार बिजनेस नहीं कर पाई थी।

अब ‘चेहरे’ में भी अमिताभ ही वो स्टार हैं, जिन पर फिल्म की सफलता की जिम्मेदारी है। इसके अलावा उनकी ‘ब्रह्मास्त्र’ का भी काफी समय से इंतजार है।

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