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चुनावी राज्यों में बेकाबू कोरोना:PM से लेकर CM तक की रैलियों में प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं, वैक्सीनेशन 41% घटा; बंगाल में 20 से ज्यादा पोलिंग ऑब्जर्वर पॉजिटिव मिले

नई दिल्लीएक महीने पहले
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  • रैलियों में खुलेआम कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन दिखता है, लेकिन कहीं कोई कार्रवाई नहीं
  • बंगाल में डॉक्टरों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा कि अगर सख्ती नहीं की गई तो हालात और बिगड़ेंगे

देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और रोज आने वाले नए केस पहले पीक के करीब आ चुके हैं। देश के अलग-अलग शहरों में लॉकडाउन, नाइट कर्फ्यू जैसे ऑप्शन इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, उनमें कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां खुद नेता उड़ा रहे हैं।

चुनावी राज्यों में सिर्फ केरल ही एकमात्र राज्य है, जहां कोरोना के केस कम हुए हैं। बंगाल में 1 मार्च तक औसतन 171 नए केस आ रहे थे, लेकिन 1 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 1274 हो चुकी है। तमिलनाडु में 1 मार्च तक औसतन 474 कोरोना केस आ रहे थे, लेकिन 1 अप्रैल को यह आंकड़ा 2817 पर पहुंच चुका है। असम में 1 मार्च को केसों की औसत संख्या 15 थी, लेकिन 1 अप्रैल में वहां भी 50 मरीज मिले।

पश्चिम बंगाल में 1 अप्रैल को हुए दूसरे फेज के चुनाव के बाद 20 से ज्यादा ऑब्जर्वर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने बताया कि पॉजिटिव पाए गए 20 लोगों में से कुछ की रिपोर्ट ड्यूटी जॉइन करने से पहले ही आ गई थी। इनमें से अधिकतर वोटिंग प्रोसेस का हिस्सा थे और अब आइसोलेशन में हैं।

देश के बाकी हिस्सों की तरह पश्चिम बंगाल में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शनिवार को यहां 1,736 नए केस दर्ज किए गए। राज्य में लगातार तीसरे दिन 1 हजार से ज्यादा केस मिले हैं।

पश्चिम बंगाल में साउथ 24 परगना में पीएम मोदी की एक सभा का नजारा है ये। भीड़ में दूर-दूर तक कोई मास्क पहना नजर नहीं आ रहा है।
पश्चिम बंगाल में साउथ 24 परगना में पीएम मोदी की एक सभा का नजारा है ये। भीड़ में दूर-दूर तक कोई मास्क पहना नजर नहीं आ रहा है।

चुनावी रैलियों में लापरवाही बड़ी वजह
चुनाव की शुरुआत के बाद से बंगाल में 50 से ज्यादा बड़ी रैलियां और रोड शो हो चुके हैं। आगे के चरणों के चुनाव में इससे भी ज्यादा जनसभाएं होनी हैं। अभी तक प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किसी की भी रैली में भीड़ कोविड नियमों का पालन करती नहीं दिखी है। डॉक्टर केस में इजाफे को इसकी बड़ी वजह बनाते हैं।

पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण इस कदर बढ़ रहा है कि वहां की डॉक्टर फोरम ने 10 दिन के भीतर चुनाव आयोग और मुख्य सचिव को दो बार पत्र लिखा है कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम (WBDF) के संस्थापक सचिव डॉ. कौशिक चाकी कहते हैं कि 'पिछली लहर के मुकाबले कोरोना संक्रमण की इस लहर की रफ्तार बहुत तेज है। चुनावी रैलियों और भीड़-भाड़ की वजह से बंगाल में हालात बदतर हो रहे हैं।'

डॉ. कौशिक कहते हैं, हमने चुनाव आयोग को पहले भी पत्र लिखकर जरूरी कदम उठाए जाने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने जवाब में सिर्फ इतना ही कहा था कि हम इस पर विचार कर रहे हैं। बंगाल में अभी कई चरणों का चुनाव बाकी है और अगर रैलियों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न किया गया तो हालात और खराब होंगे।

ममता बनर्जी लगातार रोड शो और सभाएं कर रही हैं। इस दौरान काफी भीड़ इकट्ठी हो रही है। इसमें भी इक्का-दुक्का लोग मास्क लगाए दिखते हैं।
ममता बनर्जी लगातार रोड शो और सभाएं कर रही हैं। इस दौरान काफी भीड़ इकट्ठी हो रही है। इसमें भी इक्का-दुक्का लोग मास्क लगाए दिखते हैं।

पश्चिम बंगाल के ज्वाइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर अरिंदम नियोगी कहते हैं कि '100.4 डिग्री से अधिक टेम्परेचर पाए जाने पर हम मतदाताओं से आखिरी घंटे में फिर से आने के लिए कह रहे हैं। हम बटन दबाने से पहले हर वोटर को सीधे हाथ में पहनने के लिए एक दस्ताना भी दे रहे हैं।' रैलियों में कोरोना नियमों के पालन की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की है। इसके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? इस पर बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी अरिंदम नियोगी कहते हैं कि 'हमने सभी पार्टियों को कोरोना नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।'

तमिलनाडु : कोविड से मौतों में दूसरे नंबर पर, लेकिन रैलियों में कहीं नहीं दिखता कोरोना प्रोटोकॉल

तमिलनाडु की एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी स्पीच देते हुए। यहां भी काफी संख्या में भीड़ इकट्ठी हुई है।
तमिलनाडु की एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी स्पीच देते हुए। यहां भी काफी संख्या में भीड़ इकट्ठी हुई है।

कोविड से होने वाली मौतों में तमिलनाडु का देश में दूसरा नंबर है, लेकिन राज्य में चुनाव के दौरान पार्टियों की रैलियों, रोड शो में कहीं भी प्रोटोकॉल नहीं दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी की मदुरई में हुई रैली में भी भीड़ खुले आम गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाती दिखी। गिने-चुने लोग ही मास्क लगाए नजर आए। मद्रास हाई कोर्ट ने भी चुनावी रैलियों पर रोक लगाने की जनहित याचिका पर, रैली शर्तों के साथ ही करने की अनुमति दी थी। चुनाव आयोग ने गाइडलाइन जारी की है, लेकिन यह खानापूर्ति ही साबित हो रही है क्योंकि गाइडलाइन धड़ल्ले से टूट रही है और कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है।

8.7 लाख संक्रमित और करीब 12800 मौतों के साथ तमिलनाडु, कोरोना डेथ के मामले में भारत में दूसरे नंबर पर है। कोविड की ताजा लहर के बावजूद सरकार का ट्रेस, ट्रैक और ट्रीटमेंट वाला 3-टी फार्मूला नदारद है, जबकि कोरोना की पहली लहर के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के लगभग 15 हजार मामले दर्ज किए गए थे। तमिलनाडु के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डॉ. जे. राधाकृष्णन कहते हैं कि हमने राज्य चुनाव आयोग से कोविड- प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

जिला कलेक्टरों और पुलिस से मामले दर्ज करने को कहा है। कितने मामले दर्ज हुए इस पर सभी अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। चुनाव आयोग ने कोविड के चलते पोलिंग बूथ की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ाकर करीब 87 हजार कर दी है। प्रशासनिक सूत्र कहते हैं कि तमिलनाडु के कुछ शहरों में संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि वहां लॉकडाउन लगना चाहिए। प्रशासनिक सूत्र भी दबी जबान से मानते हैं कि चुनाव खत्म होते ही यहां कुछ शहरों में कंप्लीट लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

चुनावी राज्यों में टीकाकरण घटा

चुनावी राज्यों में रैलियों के कारण कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। वहीं इन सभी राज्यों में कोविड टीकाकरण की दर घट गई है। बंगाल और तमिलनाडु में टीकाकरण की दर 1 अप्रैल को 27 फीसदी तक घट गई थी। टीकाकरण में सबसे ज्यादा कमी असम में आई है। यहां टीकाकरण की दर चुनाव के दौरान 41% तक घट गई है।

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