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सरकार ने सस्ता तेल खरीद कर अपने रणनीतिक भंडार को भरने का फैसला किया, इससे देश को 50-60 करोड़ डॉलर की होगी बचत

कोरोना वायरस और प्राइस वार के कारण क्रूड के भाव में आई है भारी गिरावट कोरोना वायरस और प्राइस वार के कारण क्रूड के भाव में आई है भारी गिरावट

  • रणनीतिक भंडार को भरने के लिए करीब 30 डॉलर मूल्य पर होगी क्रूड की खरीदारी
  • हाल में 70 डॉलर से गिरकर 30 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुका है क्रूड

Moneybhaskar.com

Mar 20,2020 02:26:00 PM IST

नई दिल्ली. भारत ने कच्चे तेल की कीमत में हाल में दर्ज की गई भारी गिरावट का बड़ा लाभ उठाने का फैसला किया है। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले दो सरकारी अधिकारियों ने कहा कि सरकार सस्ती दर पर कच्चे तेल की खरीदारी करेगी और अपने रणनीतिक तेल भंडार को भर लेगी। सरकार ने किसी भी आपात परिस्थितियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये रणनीतिक तेल भंडार बनाए हैं।

रणनीतिक भंडार को भरने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का क्रूड खरीदेगी सरकार

सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए (करीब 67 करोड़ डॉलर) मूल्य का तेल खरीदने का फैसला किया है। यह खरीदारी 30 डॉलर प्रति बैरल कीमत के आसपास होगी। एक बैरल 159 लीटर का होता है। इस सौदे की डिलीवरी अप्रैल-मई में होगी। इस आपूर्ति से तीन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भर लिया जाएगा। इन तीनों भंडार की क्षमता 53.3 लाख टन की है। इनका निर्माण इंडिया स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) ने किया है।

पहले अरैमको और एडनॉक से रणनीतिक भंडार को भरने के लिए कहा जाएगा

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि योजना के मुताबिक पहले अरैमको और एडनॉक से रणनीतिक भंडार को भरने के लिए कहा जाएगा। इस भंडार के तेल का वह बाद में वाणिज्यिक उपयोग कर सकता है। यदि कंपनी इस वक्त भंडार में तेल डालने से मना करेगी, तो आईएसपीआरएल सरकार से जरूरी रकम मिलने के बाद खुद तेल खरीदेगी। इसके अलावा इंडियन ऑयल कंपनी, बीपीसीएल जैसी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों से भी कहा जा सकता है कि वे भंडार को भरने के लिए अपनी ओर से ठेका जारी करें।

सस्ती दर पर तेल खरीदने से 50-60 करोड़ डॉलर की बचत हो सकती है

माना जा रहा है कि मौजूदा रणनीतिक भंडार को यदि खाड़ी देशों के तेल से आधा भी भर लिया जाए, तो सरकार को 50-60 करोड़ डॉलर की बचत हो सकती है। सरकार को सिर्फ मौजूदा सस्ती कीमत का ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने तेल पर अच्छी छूट देने की भी पेशकश की है।

भंडार में पूरा तेल भरने से देश की 9.5 दिनों की जरूरत की पूर्ति होगी

53.3 लाख टन के रणनीतिक भंडार अभी करीब आधे भरे हुए हैं। यदि इसे पूरा भर लिया जाता है, तो इतने तेल से भारत के 9.5 दिनों की तेल जरूरतों की पूर्ति हो सकेगी। ये तीन भंडार विशाखापत्तनम, मंगलोर और पादुर में हैं। इसके अलावा पादुर और चांदीखोल में 65 लाख टन क्षमता के अन्य भंडार भी बन रहे हैं। जल्द ही बीकानेर और राजकोट में दो अन्य भंडार बनाने पर भी काम शुरू होगा। इनका निर्माण पूरा होने के बाद यदि इन्हें भी भर लिया जाए, तो इससे एक महीने से अधिक की घरेलू जरूरत की पूर्ति हो जाएगी। इसके अलावा तेल मंत्रालय ने आईएसपीआरएल से कहा है कि वह अन्य जगहों पर भी भंडार बनाने की कोशिश करे, ताकि किसी भी वक्त 90-100 दिनों की घरेलू जरूरत की पूर्ति हो सके। इन दिनों सस्ते में मिल रहे तेल से भंडार को भरने से सरकार को बचत तो होगी ही, बाद में इसका वाणिज्यिक लाभ भी उठाया जा सकता है। मौजदा भंडार आधा भरे हुए हैं और 5,000 करोड़ रुपए के बजट से 53.3 लाख टन के भंडार को बाकी आधार भी भरा जा सकता है।

रणनीतिक भंडार को भरने के लिए पहले ही हो चुके हैं कई समझौते

आईएसपीआरएल ने 25 लाख टन के पादुर भंडार को आधे के किराए के लिए एडनॉक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर लिया है। पिछले साल इसने पादुर भंडार की एक चौथाई क्षमता को किराया पर देने के लिए सऊदी अरैमको के साथ भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। आईएसपीआरएल ने मैंगलोर के 15 लाख टन के भंडार के आधे हिस्से को पहले ही एडनॉक को किराए पर दे दिया है। इसने विशाखापत्तनाम के 10.3 लाख टन के भंडार को भी इराक के बासरा तेल से भर लिया है।

ढाई महीने में 57 फीसदी गिर चुका है क्रूड का भाव

कच्चे तेल की कीमत मार्च में अब तक करीब 40 फीसदी गिर चुकी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड दोपहर के कारोबार में करीब 6 फीसदी तेजी के साथ 29.75 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के मामले की शुरुआत के बाद से तेल कीमत में करीब 57 फीसदी की गिरावट चल रही है। 6 जनवरी को ब्रेंट क्रूड 68.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। शुक्रवार 18 मार्च को यह गिरकर 24.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। इस स्तर से सिर्फ दो दिनों में क्रूड करीब 20 फीसदी महंगा हो चुका है।

कोरोना वायरस और प्राइस वार के कारण आसमान से जमीन पर आया क्रूड

पहले चीन और अब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से उद्योग धंधे ठप्प हो गए। इससे क्रूड की मांग घट गई और इसकी कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 68 डॉलर से घटकर करीब 50 डॉलर पर आ गया था। इसके बाद क्रूड का भाव बढ़ाने के लिए पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और रूस सहित कुछ अन्य देशों में उत्पादन घटाने को लेकर चर्चा हुई। इस चर्चा में रूस ने उत्पादन घटाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अपनी तरफ से उत्पादन बढ़ाने का एलान कर दिया और क्रूड का भाव भी घटा दिया। इससे बाजार में मांग कम रहने के बावजूद आपूर्ति बढ़ गई और प्राइस वार भी शुरू हो गया। इससे क्रूड के भाव को फिर एक बड़ा झटका लगा और यह 30 डॉलर से भी नीचे आ गया।

सस्ते तेल के और भी कई फायदे

वित्तीय घाटा कम होगा : क्रूड का भाव घटने से भारत को और भी कई फायदे हैं। भारत अपनी 80 फीसदी क्रूड जरूरत की आपूर्ति आयात से करता है। इसके कारण देश के एक बड़ी पूंजी बाहर चली जाती है। तेल कीमत यदि निचले स्तर पर बनी रही, तो कम पूंजी बाहर जाएगी। इससे व्यापार घाटा कम होगा। इसके साथ ही वित्तीय घाटा भी कम होगा।

घटेगी पेट्रोल-डीजल की कीमत : पेट्रोल-डीजल की कीमत क्रूड के भाव पर निर्भर करती है। क्रूड सस्ता होगा, तो पेट्रोल-डीजल और विमान ईंधन भी सस्ता होगा। इसका फायदा आम लोग व उद्योग सभी को होगा।

उत्पाद शुल्क बढ़ाकर सरकार बढ़ा सकती है अपनी आय : आम तौर पर सरकार क्रूड सस्ता होने पर पेट्रोल-डीजल व विमान ईंधन पर उत्पाद शुल्क बढ़ा देती है। इससे इन उत्पादों की कीमत ज्यादा नहीं घटती। यानी थोड़ा लाभ पब्लिक व उद्योग को होता है। थोड़ी कमाई सरकार की भी बढ़ जाती है।

महंगाई में गिरावट : क्रूड सस्ता होने से डीजल सस्ता होता है। डीजल का असर सभी चीजों की कीमत पर पड़ता है। इसलिए क्रूड सस्ता होने पर महंगाई भी घटती है।

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