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विलय-अधिग्रहण /कोरोनावायरस के कारण कम कीमत पर उपलब्ध अच्छी कंपनियों को खरीदने की ताक में बैठी टीसीएस, इन्फोसिस व विप्रो

मौजूदा समय में किया गया अधिग्रहण आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों को रणनीतिक क्षमता और बड़ा बाजार हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ये अधिग्रहण इन कंपनियों को तेजी से विकास करने में भी मदद करेंगे मौजूदा समय में किया गया अधिग्रहण आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों को रणनीतिक क्षमता और बड़ा बाजार हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ये अधिग्रहण इन कंपनियों को तेजी से विकास करने में भी मदद करेंगे

  • 2008-09 के वित्तीय संकट के समय टीसीएस ने सिटी ग्रुप के भारतीय बिजनेस प्रोसेस सेंटर को खरीदा था
  • मार्च अंत में टीसीएस के पास 5.9 अरब डॉलर, इन्फोसिस के पास 3.6 अरब डॉलर और विप्रो के पास 3.53 अरब डॉलर की नकदी थी

Moneybhaskar.com

Apr 25,2020 07:51:00 PM IST

नई दिल्ली. आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो कई कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती हैं, क्योंकि नए कोरोनावायरस के असर के कारण कई कंपनियों का वैल्यूएशन काफी कम हो गया है। तीनों कंपनियों के पास कुल 13 अरब डॉलर (करीब एक लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की नकदी है। कंपनियों का अधिग्रहण करने से उन्हें रणनीतिक क्षमता और बड़ा बाजार हासिल करने में मदद मिल सकती है। साथ ही सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ये अधिग्रहण इन कंपनियों को तेजी से विकास करने में भी मदद करेंगे। ये कंपनियां कॉग्नीटिव और सेल्फ हीलिंग आईटी प्लेटफॉर्म्स और क्लाउड आधारित साइबर सुरक्षा उत्पादों में खरीदारी का अवसर तलाश सकती हैं, क्योंकि ग्राहकों के बीच इनकी काफी मांग है।

2008-09 के वित्तीय संकट के समय टीसीएस ने सिटी ग्रुप के भारतीय बिजनेस प्रोसेस सेंटर को खरीदा था

तिमाही नतीजे के बाद विश्लेषकों के साथ हुई चर्चा में टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश गोपीनाथ ने कहा कहा कि अब तक हमने जो सबसे बड़ा विलय व अधिग्रहण सौदा किया है, वह तब किया था जब वैश्विक वित्तीय संकट अपने चरम पर था। हम विलय व अधिग्रहण (एमएंडए) से संकोच नहीं करते। हमारा मानना है कि इसके लिए सबसे अच्छा समय तब होता है, जब कोई और अधिग्रहण नहीं करना चाहता। 2008-09 का वित्तीय संकट जब चरम पर था, तब टीसीएस ने सिटी ग्रुप के भारतीय बिजनेस प्रोसेस सेंटर को 50.5 करोड़ डॉलर में खरीदा था। इससे टीसीएस को इस वैश्विक बैंक से 10 वर्षीय 2.5 अरब डॉलर का ठेका हासिल करने में मदद मिली। सही संपत्ति यदि सही कीमत पर मिले, तो हम सदा इसके लिए तैयार रहते हैं। यदि वर्तमान स्थिति हमें यह अवसर देगी, तो हम जरूर इसका लाभ उठाएंगे।

मार्च अंत में टीसीएस के पास 5.9 अरब डॉलर, इन्फोसिस के पास 3.6 अरब डॉलर और विप्रो के पास 3.53 अरब डॉलर का नकद कोष था

मार्च के अंत में टीसीएस के पास 5.9 अरब डॉलर, इन्फोसिस के पास 3.6 अरब डॉलर और विप्रो के पास 3.53 अरब डॉलर का नकद कोष था। टीसीएस देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी है और उसने पहले कंसल्टेंसी कंपनी ब्रिजपॉइंट ग्रुप व डिजाइन कंपनी डब्ल्यू12 तथा जनरल मोटर्स के भारतीय तकनीक केंद्र की कुछ संपत्तियों का अधिग्रहण किया है।

भारतीय आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों में सबसे ज्यादा अधिग्रहण विप्रो करती है

भारतीय आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों में सबसे ज्यादा अधिग्रहण विप्रो करती है। विप्रो देश की चौथी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी है। विप्रो के मुख्य वित्तीय अधिकारी जतिन दलाल ने कहा कि सही कीमत पर मिल रही संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए यह सही अवसर है। इस वक्त यह चिंता करने की भी जरूरत नहीं कि हमारे पास समुचित कैश है या नहीं।

2016 के बाद से विप्रो ने कई संपत्तियों का अधिग्रहण किया

2016 के बाद से विप्रो ने कई संपत्तियों का अधिग्रहण किया है और इसके लिए उसने एक अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। उनके द्वारा खरीदी गई संपत्तियों में हेल्थप्लान सर्विसेज (एचपीएस), क्लाउड एनबलमेंट कंपनी एपीरियो, डिजाइन कंसल्टेंसी कंपनियों जैसे - डिजिग्निट और कूपर भी शामिल हैं। इसके अलावा इनमें इन्फोसर्वर आौर इंटरनेशनल टेक्नीग्रुप जैसी छोटी कंपनियां भी शामिल हैं। विश्लेषकों के मुताबिक आर्थिक मंदी के समय कंपनियों का वैल्यूएशन कम हो जाता है, इसलिए यह उन्हें खरीदने का बहुत अच्छा अवसर होता है।

इन्फोसिस ने मार्च में 25 करोड़ डॉलर में अपनी सेल्सफोर्स इंप्लीमेंटेशन साझेदार सिंप्लस का अधिग्रहण पूरा किया

इन्फोसिस ने मार्च में 25 करोड़ डॉलर में सिंप्लस का अधिग्रहण पूरा किया। सिंप्लस इन्फोसिस की सेल्सफोर्स इंप्लीमेंटेशन साझेदार है। इससे पहले इन्फोसिस ने करीब 1,000 करोड़ रुपए में एबीएन एमरो से स्टेटर एनवी में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी थी। स्टेटर एनवी मॉरगेज एडमिनिस्ट्रेशन का कारोबार करती है। उसने फिनलैंड की सेल्सफोर्स कंसल्टिंग कंपनी फ्लूडो का भी अधिग्रहण किया था। इन्फोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कहा कि यदि कोई संपत्ति हमें पसंद आएगी, तो हमारे पास अभी काफी क्षमता है। लेकिन इस वक्त हम हर तरह की खरीदारी करने के लिए तैयार हैं।

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मौजूदा समय में किया गया अधिग्रहण आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों को रणनीतिक क्षमता और बड़ा बाजार हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ये अधिग्रहण इन कंपनियों को तेजी से विकास करने में भी मदद करेंगेमौजूदा समय में किया गया अधिग्रहण आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों को रणनीतिक क्षमता और बड़ा बाजार हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ये अधिग्रहण इन कंपनियों को तेजी से विकास करने में भी मदद करेंगे

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