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लॉकडाउन का असर /अप्रैल महीने में राज्यों को अलग-अलग तरह के राजस्व से हुआ 97,100 करोड़ रुपए का नुकसान- इंडिया रेटिंग

इन राज्यों में से गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। क्योंकि इसका अपना राजस्व सबसे अधिक 76 प्रतिशत है इन राज्यों में से गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। क्योंकि इसका अपना राजस्व सबसे अधिक 76 प्रतिशत है

  • कुछ राज्यों ने पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाया है
  • कुछ राज्यों ने शराब पर भी टैक्स बढ़ाया है

Moneybhaskar.com

May 13,2020 10:35:00 PM IST

मुंबई. कोविड-19 की वजह से जारी लॉकडाउन से देश के राज्यों को अप्रैल महीने में 97,100 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह अनुमान इंडिया रेटिंग एजेंसी ने लगाया है। एजेंसी के अनुसार, यह नुकसान राज्यों को प्राप्त होनेवाले अलग-अलग तरह के राजस्व के रूप में हुआ है।

अप्रैल नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत करता है

एजेंसी ने कहा कि अप्रैल को आम तौर पर उस महीने के रूप में देखा जाता है जो पिछले वर्ष के अनुभवों के आधार पर वर्ष के बाकी के एजेंडे को निर्धारित करता है। नए वित्तीय वर्ष में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों के लिए एक नया राजस्व और खर्च का लक्ष्य तय होता है। हालांकि, देश भर में लॉकडाउन के बीच इस साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत हुई जिसने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।

नकदी प्रवाह को लेकर सरकार कर रही है संघर्ष

वास्तव में, प्रोडक्शन में अड़चन, आपूर्ति, बिजनेस चैनलों के टूटने, एविएशन, पर्यटन, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में गतिविधियों पर इसका बुरा असर दिखा है। आर्थिक दिक्कत ने व्यवसायों और सरकार के राजस्व को समान रूप से प्रभावित किया है। केंद्र और राज्य दोनों सरकारें नकदी प्रवाह के कारण संघर्ष कर रही हैं। लेकिन राज्यों की समस्याएं अधिक हैं क्योंकि COVID-19 और उससे संबंधित खर्चे के खिलाफ उन्हें लड़ना पड़ रहा है।

राज्य सरकारों को अस्थाई राहत मिलेगी

बढ़ते तरलता दबाव को कम करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार ने कई उपायों की घोषणा की है। एजेंसी ने कहा है कि इससे राज्य सरकारों को केवल अस्थायी राहत मिलेगी। अब जब हम मई के महीने में हैं और राज्यों ने पूरे एक महीने तक लॉक़डाउन की है, तो अपने स्वयं के स्रोतों से राज्यों को राजस्व के नुकसान का आंकलन करना होगा।

सात तरह से आता है राजस्व

राज्यों का राजस्व मुख्य रूप से सात तरह से आता है। इसमें जीएसटी, राज्य वैट (मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद), राज्य उत्पाद शुल्क (मुख्य रूप से शराब), टिकट और रजिस्ट्रेशन शुल्क, वाहन पर कर और बिजली और अन्य कर का समावेश है। लॉकडाउन का उन राज्यों पर अधिक नेगेटिव प्रभाव पड़ा है जिनका कुल मिले -जुले रेवेन्यू में स्वयं की ज्यादा हिस्सेदारी है। इस संबंध में गोवा, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्य आते हैं क्योंकि उनके राजस्व का 65-76 प्रतिशत अपने ही स्रोतों से आता है।

ये राज्य होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

इन राज्यों में से गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। क्योंकि इसका अपना राजस्व सबसे अधिक 76 प्रतिशत है। इसके बाद तेलंगाना 75.6 प्रतिशत, हरियाणा 74.7 प्रतिशत, कर्नाटक 71.4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 70.4 प्रतिशत, महाराष्ट्र 69.8 प्रतिशत, केरल 69.6 प्रतिशत और गोवा 66.9 प्रतिशत पर है। अप्रैल के लिए इन राज्यों का सामूहिक जीएसटी से रेवेन्यू 26,962 करोड़ रुपए, वैट से 17,895 करोड़ रुपए, एक्साइज ड्यूटी से 13,785 करोड़ रुपए, स्टांप ड्यूटी और रेजिस्ट्रेशन शुल्क से 11,397 करोड़ रुपए, ऑटो टैक्स से 6,055 करोड़ रुपए, बिजली पर कर और शुल्क से 3,464 करोड़ रुपए और उनका स्वयं का गैर-कर राजस्व 17,595 करोड़ रुपए था।

मई में थोड़ा सुधार दिख सकता है

एजेंसी का मानना है कि मई 2020 में कुछ प्रतिबंधों में ढील के कारण हालात में सुधार हो सकता है। जिसमें शराब की बिक्री सबसे प्रमुख है। कारण यह है कि शराब की बिक्री की अनुमति देते समय कई राज्यों ने उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। साथ ही, कुछ राज्यों ने पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाया है। हालांकि, लॉकडाउन सभी राज्यों के राजस्व प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है।

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इन राज्यों में से गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। क्योंकि इसका अपना राजस्व सबसे अधिक 76 प्रतिशत हैइन राज्यों में से गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। क्योंकि इसका अपना राजस्व सबसे अधिक 76 प्रतिशत है

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