• Home
  • Economy
  • Prime Minister’s Vision; Rs 3 lakh crores Collateral free Automatic Loans for Businesses, including MSMEs

सरकार का राहत पैकेज /MSME को उबारने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान, दो लाख एमएसएमई को लाभ होने की संभावना

कोविड-19 की वजह से बिजनेस और एमएसएमई बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, ऐसे में इन्हें कच्चा माल खरीदने और व्यवसाय को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता है। कोविड-19 की वजह से बिजनेस और एमएसएमई बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, ऐसे में इन्हें कच्चा माल खरीदने और व्यवसाय को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता है।

  • एमएसएमई और बिजनेस के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन
  • 45 लाख यूनिट अपनी व्यावसायिक गतिविधि फिर से शुरू कर पाएंगे नौकरियां सुरक्षित होंगी

Moneybhaskar.com

May 13,2020 08:03:00 PM IST

नई दिल्ली. मंगलवार, 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया था। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पैकेज के ब्रेकअप की जानकारी दी। वित्त मंत्री ने कहा कि स्पेशल पैकेज में से लघु एवं मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का लोन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह गारंटी फ्री लोन 4 साल के लिए होगा और पहले साल मूलधन नहीं चुकाना होगा। हम यहां एमएसएमई को मिले पैकेज के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।एमएसएमई और बिजनेस के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन

  • कोविड-19 की वजह से बिजनेस और एमएसएमई बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में इन्हें कच्चा माल खरीदने और व्यवसाय को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता है।
  • 25 करोड़ रुपए तक के बकाया और 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले इलेजिबल होंगे।
  • 4 साल के कार्यकाल के ऋण पर प्रिंसिपल रिपेमेंट पर 12 महीने की मोहलत मिलेगी।
  • मूल और ब्याज पर बैंकों और NBFC को 100 क्रेडिट गारंटी कवर।
  • योजना का लाभ 31 अक्टूबर, 2020 तक लिया जा सकता है।
  • कोई गारंटी फीस और कोई फ्रेश कोलैटरल नहीं चाहिए।
  • 45 लाख यूनिट अपनी व्यावसायिक गतिविधि फिर से शुरू कर पाएंगे नौकरियां सुरक्षित होंगी।

एमएसएमई को उबारने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान

  • तनावग्रस्त MSME को इक्विटी सपोर्ट की आवश्यकता है।

  • सरकार अधीनस्थ ऋण के रूप में 20,000 करोड़ रुपए के प्रावधान की सुविधा देगी।
  • दो लाख एमएसएमई को लाभ होने की संभावना है।
  • कार्यशील एमएसएमई जो एनपीए हैं या तनावग्रस्त हैं इसके लिए इलेजिबल होंगे।
  • सरकार CGTMSE को 4000 करोड़ रुपए का समर्थन प्रदान करेगी।
  • CGTMSE बैंकों को आंशिक क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करेगा।

फंड ऑफ फंड्स के जरिए एमएसएमई में 50,000 करोड़ का इक्विटी इन्फ्यूजन करेगी सरकार

  • MSME को इक्विटी की भारी कमी का सामना करना पड़ा है।

  • 10,000 करोड़ रुपए के कोष के साथ फंड ऑफ फंड्स की स्थापना की जाएगी।
  • विकास क्षमता और व्यवहार्यता के साथ एमएसएमई के लिए इक्विटी फंडिंग प्रदान की जाएगी।
  • फंड ऑफ फंड्स का संचालन मदर फंड और कुछ डॉटर फंडों के माध्यम से किया जाएगा।
  • फंड संरचना, डॉटर फंड के लेवल पर 50,000 करोड़ रुपए के फंड का लाभ उठाने में मदद करेगी।
  • एमएसएमई के आकार के साथ-साथ क्षमता का विस्तार करने में मदद करेगा।
  • एमएसएमई को स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य बोर्ड में सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

एमएसएमई की नई परिभाषा

  • सरकार की स्कीम का फायदा पहुंचाने के लिए सभी छोटे उद्योगों को शामिल किया जाएगा। एमएसएमई की परिभाषा को बदलकर उसमें इस तरह के उद्योगों को शामिल किया जाएगा, जिससे उन्हें फायदा हो।

  • एमएसएमई सेक्टर में निवेश की सीमा को संशोधित किया जाएगा।

घोषणा:

  • एमएसएमई की परिभाषा को संशोधित किया जाएगा।
  • निवेश सीमा को बढ़ाकर संशोधित किया जाएगा।
  • टर्नओवर के अतिरिक्त मानदंड भी पेश किए जा रहे हैं।
  • निर्माण और सेवा क्षेत्र के बीच के अंतर को समाप्त करना।
  • कानून में आवश्यक संशोधन लाया जाएगा।

ग्लोबल ट्रेंडर्स 200 करोड़ रुपए से कम का नहीं होगा

  • सरकारी खरीद के लिए 200 करोड़ रुपए तक नहीं होगी ग्लोबल टेंडर की जरूरत।

  • इससे एमएसएमई को अपना व्यवसाय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  • सिर्फ देसी कंपनियों को ही मिलेंगे ये टेंडर।
  • यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम होगा।

MSMEs को सरकार ने दी राहत के साथ सुविधा भी

  • मौजूदा संकट के कारण MSMEs को मार्केटिंग और लिक्विडिटी की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • अब सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों को ई मार्केट से जोड़ा जाएगा।
  • इसके तहत इन उद्योगों को उत्पादों को ई कॉमर्स कंपनियों के जरिए भी बेचने में मदद मिलेगी।
  • वर्तमान हालात में छोटे उद्योगों के लिए ट्रेड फेयर लगाना संभव नहीं हैं, ई-ट्रेड फेयर लगाए जाएंगे।
  • सरकारी पैसा कोई भी बकाया है, उसे अगले 45 दिनों में पूरा कर दिया जाएगा।

EPF में 2500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा

  • आर्थिक संकट से जुझ रहें कारोबार/बिजनेस को वापस पटरी पर लाया जाएगा।

  • 3 महीने और व्यापार और श्रमिकों के लिए 2500 करोड़ रुपए का EPF समर्थन मिलेगा
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में एक सुविधा दी गई थी कि 12-12 प्रतिशत ईपीएफ कर्मचारी और नौकरी देने वाले को केंद्र सरकार देगी।
  • ये पहले तीन महीनों के लिए किया गया था जिसे बढ़ाकर अगले तीन महीने जून, जुलाई और अगस्त तक कर दिया गया है।
  • ईपीएफ में सरकारी मदद से इसका 3.67 लाख कंपनियों और 72.22 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

6,750 करोड़ रुपए का लिक्व्डिटी सपोर्ट मिलेगा

  • सरकार ने संस्थानों और कर्मचारियों के लिए अगले तीन महीने तक ईपीएफ योगदान को 12-12 फीसदी से घटाकर 10-10 फीसदी कर दिया गया है।

  • सरकारी कंपनियों के लिए यह 12-12 फीसदी ही रहेगा, इससे 6750 करोड़ रुपए का लिक्विडटी सपोर्ट मिलेगा।
  • ईपीएफओ में कवर होने वाली लगभग 6.5 लाख कंपनियों और 4.3 करोड़ कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।
  • यह स्कीम उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो पीएम गरीब कल्याण पैकेज और उसके विस्तार के तहत 24 फीसदी का ईपीएफ सपोर्ट नहीं ले रहे हैं।
  • इसका मकसद कर्मचारियों की घर ले जाने वाली सैलरी को बढ़ाना और नियोक्ताओं को पीएफ बकाया के भुगतान के मोर्चे पर राहत देना है।

NBFC और एमएफआई के लिए सरकार लॉन्च करेगी 30,000 करोड़ की 'विशेष लिक्विडिटी स्कीम'

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय निगमों (NBFC), HFC तथा MFI को ऋण बाजारों में राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है
  • सरकार की ओर से एनबीएफसी के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम का ऐलान किया गया है।
  • इसकी पूरी गारंटी भारत सरकार देगी।
  • इस स्कीम से एनबीएफसी, एचएफसी, एमएफआई और म्युचुअल फंड को तरलता संबंधी समर्थन मिलेगा और बाजार में लोगों का भरोसा बढ़ेगा।

एनबीएफसी के लिए 45,000 करोड़ रुपए की आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम की घोषणा

  • NBFC आंशिक ऋण गारंटी योजना के तहत 45,000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
  • भारत सरकार इसकी गारंटी लेगी और 20% तक नुकसान वहन करेगी।
  • इसमें AA पेपर्स और इसके नीचे के रेटिंग वाले पेपर्स को भी कर्ज मिलेगा।
  • अनरेटेड पेपर्स के लिए भी इसमें प्रावधान किया गया है, इससे नई लेंडिंग को बढ़ावा मिलेगा।

देश के पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को 9000 करोड़ रुपए की सहायता राशि

  • पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनीज (DISCOMs) के रेवेन्यू में गिरावट आई है।
  • मांग में कमी से अप्रत्याशित नकदी प्रवाह समस्या।
  • पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन कंपनीज को DISCOM वर्तमान में 94,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।
  • सरकारी कंपनी पीएफसी और आरईसी के जरिए DISCOM को 90 हजार करोड़ का फंड प्रदान किया जाएगा।
  • DISCOM से Gencos को देनदारियों के निर्वहन के विशेष उद्देश्य के लिए राज्य की गारंटी के खिलाफ ऋण दिए जाएगा।
  • विशिष्ट गतिविधियों / सुधारों से जुड़ाव: उपभोक्ताओं के लिए डिस्कॉम द्वारा डिजिटल भुगतान की सुविधा, राज्य सरकारों के बकाया का परिसमापन, वित्तीय और परिचालन घाटे को कम करने की योजना
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां डिस्कॉम को छूट देगी जो अंतिम उपभोक्ताओं (उद्योगों) को दी जाएगी।

सरकारी कॉन्ट्रैक्टर को राहत

  • 6 माह तक के विस्तार: (ठेकेदार की लागत के बिना) सभी केंद्रीय एजेंसियों (जैसे रेलवे, सड़क परिवहन और राजमार्ग, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, आदि) द्वारा प्रदान किए जाने के लिए 6 महीने तक का विस्तार।
  • निर्माण / कार्यों और माल और सेवाओं के अनुबंध को शामिल
  • काम पूरा करने, मध्यवर्ती मील के पत्थर आदि जैसे दायित्वों और पीपीपी अनुबंधों में रियायत अवधि का विस्तार
  • नकदी प्रवाह को आसान बनाने के लिए सरकारी एजेंसियां आंशिक रूप से बैंक गारंटी रिलीज करती है, जब तक अनुंबध आंशिक रूप से पूर्ण होते हैं।

RERA के तहत रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण और समापन तिथि का विस्तार

  • कोविड के कारण परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और वो डिफ़ॉल्ट होने का जोखिम है। ऐसे में समय सीमा को बढ़ाया गया है।

  • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के लिए

निम्नलिखित प्रभाव के लिए उनके विनियामक प्राधिकरण:

  • COVID -19 को RERA के तहत 'फोर्स मैज्योर' की घटना के रूप में मानें
  • सभी पंजीकृत परियोजनाएँ जिनकी डेट 25 मार्च, 2020 को या उसके बाद समाप्त होने वाली है कि रजिस्ट्रेशन और कम्पलीशन डेट 6 महीने के लिए बढ़ाएं
  • जरूरत पड़ने पर इन्हें 3 महीने के लिए और आगे बढ़ाया जाए।
  • रिवाइज्ड टाइमलाइन के साथ ऑटोमैटिकली फ्रेश प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्रदान करें।
  • RERA के तहत विभिन्न प्रतिमा अनुपालन के लिए समय सीमा बढ़ाएं समवर्ती।

टीडीएस / टीसीएस दर कटौती से 55 हजार करोड़ रुपए का लाभ

  • करदाताओं को अधिक धनराशि प्रदान करने के लिए, गैर-वेतनभोगियों के लिए (TDS) की दरों में कटौती और (TCS) की दरों 25% तक कम किया जाएगा।
  • अनुबंध, पेशेवर शुल्क, ब्याज, किराया, लाभांश, कमीशन, ब्रोकरेज आदि सभी TDS दर की कटौती के पात्र होंगे।
  • यह कटौती 31 मार्च 2021 से बाकी वित्तीय वर्ष 2020-21 तक लागू रहेगी।
  • इससे 50 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा।

अन्य डायरेक्ट टैक्स के लिए उपाय

  • धर्मार्थ ट्रस्टों और गैर-व्यवसायिक व्यवसायों और व्यवसायों सहित स्वामित्व, साझेदारी, एलएलपी और सहकारी समितियों के सभी लंबित रिफंड तुरंत जारी किया जाएगा।
  • वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सभी आयकर रिटर्न की देय तिथि को 31 जुलाई, 2020 और 31 अक्टूबर, 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर, 2020 कर दी जाए, और टैक्स ऑडिट की तारीख 30 सितंबर, 2020 से 31 अक्टूबर, 2020 की जाए।
  • 30 सितंबर, 2020 को वर्जित होने की तिथि को 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ाया गया जाए और जो 31 मार्च, 2021 को वर्जित हो रही है उन्हें 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ाया जाए।
  • विवाद से विश्वास योजना की अवधि, अतिरिक्त राशि के बिना भुगतान करना की अवधि को 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ाया जाएगा

X
कोविड-19 की वजह से बिजनेस और एमएसएमई बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, ऐसे में इन्हें कच्चा माल खरीदने और व्यवसाय को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता है।कोविड-19 की वजह से बिजनेस और एमएसएमई बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, ऐसे में इन्हें कच्चा माल खरीदने और व्यवसाय को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता है।

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.