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परेशानी /लॉकडाउन से ऑटो सेक्टर को रोजाना 2,300 करोड़ रुपए का नुकसान होगा, सैकड़ों ऑटो डीलर्स की दुकानें बंद

70 प्रतिशत भारतीय कार खरीदार डीलरशिप पर जाने को लेकर डिजिटल रूट लेना पसंद कर सकते हैं 70 प्रतिशत भारतीय कार खरीदार डीलरशिप पर जाने को लेकर डिजिटल रूट लेना पसंद कर सकते हैं

  • अप्रैल में ऑटो सेक्टर की बिक्री जीरो थी
  • मई में थोड़ी बहुत बिक्री की शुरुआत हो चुकी है

Moneybhaskar.com

May 20,2020 07:56:00 PM IST

मुंबई. ऑटो सेक्टर के लिए इस साल अप्रैल का महीना काफी बुरा था। यह भारतीय ऑटो सेक्टर के इतिहास में पहला महीना था जब इसने जीरो बिक्री दर्ज की थी। Covid-19 और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने इस क्षेत्र को परेशानी में लाकर खड़ा कर दिया है। इससे रोजाना 2,300 करोड़ रुपए का नुकसान इस सेक्टर को हो रहा है। साथ ही सैकड़ों ऑटो डीलर्स ने दुकानें बंद कर दी हैं।

कुछ सेगमेंट में 35 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है

लॉकडाउन का इस क्षेत्र को जोर का झटका लगा है। ऑटो सेक्टर की संस्था सियाम का अनुमान है कि लॉकडाउन के कारण ऑटो उद्योग को हर दिन 2,300 करोड़ रुपए का कारोबार का नुकसान होगा। इसने अनुमान लगाया है कि देश इस साल ऑटो बिक्री में भारी गिरावट का गवाह बनेगा। जिसमें कुछ सेगमेंट के लिए यह 35 प्रतिशत तक हो सकता है। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020 में यह 18 प्रतिशत की डी-ग्रोथ है।

ऑटो सेक्टर 15 महीनों की मंदी के बाद रिकवरी कर रहा था

लगभग दो महीने के लिए बंद शोरूम से ऑटो डीलरों का भविष्य अंधकार में लग रहा है। भारत में ऑटोमोबाइल खुदरा विक्रेताओं की राष्ट्रीय संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (एफएडीए) का मानना है कि यह महामारी ऐसे समय में प्रभावित की, जब यह सेक्टर मंदी के 15 महीने बाद रिकवरी की तैयारी कर रहा था। हाल के दिनों में, वायरस के प्रकोप की बदौलत 275 से अधिक डीलरशिप को बंद करना पड़ा।

खराब समय पर चोट पहुंचाया है लॉकडाउन ने

फाडा के अध्यक्ष आशीष हर्षराज काले का मानना है कि वायरस और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने उद्योग को "सबसे खराब समय" पर चोट पहुंचाई है। काले के अनुसार, ऑटो की मांग को पुनर्जीवित करने का उपाय करना सरकार के हित में है। क्योंकि सेक्टर का पूरी अर्थव्यवस्था पर कई गुना प्रभाव पड़ता है। अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने की जरूरत को स्वीकार करते हुए सरकार ने लॉकडाउन 3 शुरू करते समय कई छूट दी। लेकिन ज्यादातर का मानना है कि इनके परिणामस्वरूप ऑटो डीलरों के लिए जमीन स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

सप्लाई चेन बड़ा मुद्दा है

एक ऑटोमोटिव अधिकारी के मुताबिक मुझे नहीं लगता कि अभी कुछ सुधार होगा। क्योंकि सप्लाई चेन बड़ा मुद्दा है। अधिकारी के मुताबिक कारखानों के साथ केवल गतिविधियां शुरू होती हैं। मुझे तब तक कोई बड़ा सुधार नहीं दिखता जब तक कि बड़े इकोसिस्टम तंत्र में चीजें समग्र रूप से नहीं सुधरतीं। सिर्फ सप्लाई ही चिंता का कारण नहीं है। कई लोगों को डर है कि लाइसेंस राज की वापसी और लालफीताशाही तथा नौकरशाही जैसी अन्य महत्वपूर्ण बाधाएं हैं। वर्तमान में इस सेक्टर के किसी भी संभावित आर्थिक सुधार के दायरे को उपरोक्त प्रतिबंध सीमित कर रहे हैं।

लॉकडाउन 3 में कोई छूट नहीं थी

ऑटोमोबाइल डीलरशिप चेन लैंडमार्क ग्रुप की एमडी गरिमा मिश्रा के मुताबिक, इस सेक्टर के लिए लॉकडाउन 3 में कोई छूट नहीं थी और हमारी मदद नहीं हुई। गृह मंत्रालय के दिशा निर्देश कागज पर अच्छे थे, लेकिन मंजूरी वास्तव में नहीं आ रही थी। "वह कहती हैं, हर राज्य को आपस मे जोड़ने गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया। मिश्रा कहती हैं कि शोरूम में चाहे कम मैनपावर हो या ज्यादा, कोई भी मैन्युफैक्चरर शोरूम खोलने में दिलचस्पी कम ही दिखायेगा। लॉकडाउन 4.0 के साथ उम्मीद है कि स्थिति धीरे-धीरे बदल सकती है।

40 लाख से अधिक लोगों को मिलता है रोजगार

FADA ने कहा, ऑटो डीलर्स सेगमेंट में देश भर में 40 लाख से अधिक कर्मचारियों को रोजगार मिलता है। इसमें 25 लाख प्रत्यक्ष कर्मचारी और अन्य 15 लाख अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए डीलरशिप पर निर्भर हैं। काले का कहना है कि ऑटो डीलरशिप के बहुमत परिवार के प्रत्येक के साथ छोटे पैमाने पर कारोबार चला रहे हैं, जहां औसतन 70-150 लोगों को रोजगार मिलता है। इसने आशंका जताई है कि जैसे-जैसे कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का आंकड़ा ऊपर जाएगा वैसे ही यह इंडस्ट्री और बुरी तरह से पिटेगी।

भविष्य को भी लेकर परेशान हैं ऑटो डीलर

ऑटो डीलर सिर्फ वर्तमान से ही नहीं परेशान हैं बल्कि वह भविष्य को लेकर भी काफी चिंतित हैं। अब एक तरीका उनके पास यह हो सकता है कि वाहनों की सेलिंग ऑनलाइन करनी शुरू करें। मारुति सुजुकी, हुंडई, होंडा और लग्जरी कार निर्माता कंपनियां पहले से ही ग्राहकों को इस विकल्प की अनुमति दे रही हैं। कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, 70 प्रतिशत भारतीय कार खरीदार डीलरशिप पर जाने को लेकर डिजिटल रूट लेना पसंद कर सकते हैं। यह चिंता का कारण है।

किराया और मजदूरी हैं बड़े खर्च

ग्रुप लैंडमार्क की मिश्रा इस बात को उजागर करती हैं कि ऑटो डीलर बिक्री पर 1.5 से 2 प्रतिशत के नाममात्र रिटर्न (आरओ) मार्जिन पर काम करते हैं। ऑटो डीलरों के लिए दो सबसे बड़ा खर्च किराया और मजदूरी है। वेतन और मजदूरी हमारी कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत होता है। जब सेल शून्य हो तो हम उन विशाल लागतों को कैसे सहन कर सकते हैं।

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70 प्रतिशत भारतीय कार खरीदार डीलरशिप पर जाने को लेकर डिजिटल रूट लेना पसंद कर सकते हैं70 प्रतिशत भारतीय कार खरीदार डीलरशिप पर जाने को लेकर डिजिटल रूट लेना पसंद कर सकते हैं

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