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साझेदारी /जियो प्लेटफॉर्म्स की 2.32% हिस्सेदारी खरीदेगी अमेरिकी इन्वेस्टमेंट फर्म केकेआर, 11,367 करोड़ का करेगी निवेश

  • एक महीने में पांचवां बड़ा निवेश, अब तक 78562 करोड़ रुपए निवेश के रूप में जुटाए
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में अब तक 17.12 फीसदी हिस्सेदारी के लिए निवेश की घोषणा

Moneybhaskar.com

May 22,2020 10:30:53 AM IST

मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के जियो प्लेटफॉर्म्स में अमेरिका की निजी इक्विटी कंपनी केकेआर ने शुक्रवार को 11367 करोड रुपए निवेश करने का ऐलान किया। फेसबुक, सिल्वरलेक, विस्टा पार्टनर्स और जनरल अटलांटिक के बाद एक माह में जियो प्लेटफॉर्म्स में यह पांचवा बड़ा निवेश है।

जियो प्लेटफॉर्म्स में अब तक 78562 करोड़ रुपए का निवेश

केकेआर को मिलाकर एक माह में कुल 78562 करोड रुपए निवेश की डील हो चुकी है। केकेआर का एशिया में किसी कंपनी में यह सर्वाधिक राशि का निवेश है। जियो प्लेटफॉर्म्स में केकेआर का निवेश 4.91 लाख करोड रुपए के इक्विटी मूल्यांकन और 5.16 लाख करोड रुपये के उद्यम पूंजी मूल्यांकन पर हुआ है। केकेआर को 11367 करोड रुपए के निवेश के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स में अब तक 17.12 फीसदी हिस्सेदारी के लिए निवेश की घोषणा हो चुकी है।

जियो प्लेटफॉर्म्स में किसका कितना निवेश और हिस्सेदारी

कंपनी निवेश (करोड़ रु. में) हिस्सेदारी
फेसबुक 43574 9.99%
सिल्वर लेक 5656 1.15%
विस्टा इक्विटी 11,367 2.32%
जनरल अटलांटिक 6598 1.34%
केकेआर 11367 2.32%
कुल 78562 17.12%

केकेआर का बाइटडांस और गोजेक जैसी कई कंपनियों में निवेश

1976 में स्थापित केकेआर के पास वैश्विक निजी उद्यमों में निवेश का लंबा अनुभव है। निजी इक्विटी और टेक्नोलॉजी ग्रोथ फंड के माध्यम से KKR ने बीएमसी सॉफ्टवेयर, बाइटडांस और गोजेक सहित कई प्रौद्योगिकी कंपनियों में सफलतापूर्वक निवेश किया है। फर्म ने तकनीकी कंपनियों में 30 बिलियन डॉलर (कुल उद्यम मूल्य) से अधिक का निवेश किया है। अब फर्म के टेक पोर्टफोलियो में प्रौद्योगिकी, मीडिया और दूरसंचार क्षेत्रों की 20 से अधिक कंपनियां हैं।

केकेआर भारतीय डिजिटल इको सिस्टम में बदलाव का हमसफर बनेगा : मुकेश

इस निवेश का स्वागत करते हुए आरआईएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि KKR भारतीय डिजिटल इको सिस्टम में बदलाव की हमारी यात्रा का हमसफर बनेगा। यह सभी भारतीयों के लिए लाभप्रद होगा। KKR भारत में एक प्रमुख डिजिटल सोसाइटी के निर्माण के हमारे महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साझा करता है। एक महत्वपूर्ण भागीदार होने का KKR का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार है। हम जियो को आगे बढ़ाने के लिए KKR के वैश्विक प्लेटफॉर्म, इंडस्ट्री की जानकारियां और परिचालन विशेषज्ञता का लाभ उठाने की उम्मीद करते हैं।

जियो एक सच्चा स्वदेशी प्लेटफॉर्म: हेनरी

केकेआर के सह-संस्थापक और Co-CEO हेनरी क्राविस ने कहा कि कुछ कंपनियों के पास ही देश के डिजिटल इको सिस्टम को बदलने की ऐसी क्षमता होती है, जैसा जियो प्लेटफॉर्म्स भारत में और संभवतः दुनिया भर में कर रहा है। जियो प्लेटफॉर्म्स एक सच्चा स्वदेशी प्लेटफॉर्म है जो भारत में डिजिटल क्रांति कर रहा है। इसके पास देश को प्रौद्योगिकी समाधान और सेवाएं देने की बेजोड़ क्षमता है। हम जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रभावशाली गति, विश्वस्तरीय इनोवेशन और मजबूत नेतृत्व टीम के कारण निवेश कर रहे हैं। इस निवेश को हम भारत और एशिया प्रशांत में अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों के समर्थन के लिए KKR की प्रतिबद्धता के रूप में देखते हैं।

अमेरिकी कंपनियों की पसंद बना जियो प्लेटफॉर्म्स

निवेश के लिहाज से आरआईएल का जियो प्लेटफॉर्म्स अमेरिकी कंपनियों की पहली पसंद बना हुआ है। यही कारण है कि अभी केवल अमेरिकी कंपनियों ने ही जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश की घोषणा की है। अभी तक निवेश करने वाली फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक और अब केकेआर एंड कंपनी सभी अमेरिकी कंपनी हैं। हालांकि, आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी पहले कह चुके हैं कि कई वैश्विक निवेशक जियो प्लेटफॉर्म में निवेश करने के इच्छुक हैं।

आरआईएल की डिजिटल सब्सिडियरी है जियो प्लेटफॉर्म

जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सब्सिडियरी है। यह कंपनी आरआईएल ग्रुप के डिजिटल बिजनेस एसेट्स जैसे रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड, जियो ऐप्स और हैप्टिक, रिवायर, फाइंड, नाउफ्लोट्स, हैथवे और डैन समेत कई अन्य एंटीटी में निवेश का संचालन करती है।

इस साल दिसंबर तक कर्ज मुक्त कंपनी बन सकती है रिलायंस इंडस्ट्रीज

रिलायंस इंडस्ट्र्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में आरआईएल को मार्च 2021 तक नेट आधार पर कर्ज मुक्त कंपनी बनाने का लक्ष्य तय किया था। फेसबुक सौदा, 53,125 करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू, निजी इक्विटी निवेश और सऊदी अरैमको सहित कई और कंपनियों को हिस्सेदारी बेचे जाने से कर्ज मुक्ति का लक्ष्य इस साल दिसंबर में ही पूरा हो जाने की उम्मीद है।

रिलायंस इंडस्ट्र्रीज पर मार्च में था 1,61,035 करोड़ रुपए का शुद्ध कर्ज

मार्च तिमाही के अंत में रिलायंस पर 3,36,294 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया था। उस समय कंपनी के पास 1,75,259 करोड़ रुपए की नकदी थी। कर्ज को नकदी के साथ एडजस्ट करने के बाद कंपनी का नेट कर्ज 1,61,035 करोड़ रुपए था। कंपनी पर जो कर्ज बकाया है, उसमें से 2,62,000 करोड़ रुपए का कर्ज रिलायंस के बैलेंसशीट पर है और 23,000 करोड़ रुपए का कर्ज जियो पर है।

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