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  • If the work is fully started, there will be a shortage of laborers on a large scale, currently there is some problem in some sectors.

प्रवासी कामगारों की कमी /काम पूरी तरह से चालू हुआ तो बड़े पैमाने पर लेबर्स की होगी कमी, फिलहाल कुछ सेक्टर्स में थोड़ी बहुत है दिक्कत

  • अभी तक 10-20 प्रतिशत ही काम शुरू हो पाया है
  • कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में 3 करोड़ कामगार दूसरे राज्यों के 

Moneybhaskar.com

May 16,2020 08:16:59 PM IST

मुंबई. एक ओर जहां सरकार चौथे चरण के लॉकडाउन की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर अभी भी हर सेक्टर में पूरी तरह से काम शुरू करने की तैयारी नहीं हो पाई है। इसका कारण यह है कि एक तो डिमांड नहीं है। दूसरा पूंजी और लेबर की कमी है। फिलहाल जिन सेक्टर्स में थोड़े बहुत काम शुरू हुए हैं, वहां भी लेबर्स की दिक्कत है। काम 10-20 प्रतिशत ही शुरू है। इसलिए अभी लेबर की बहुत ज्यादा कमी नहीं है।

कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में 5 करोड़ कामगार

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आनंद गुप्ता कहते हैं कि देश के रियल इस्टेट, इंफ्रा सहित कुल मिलाकर कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में 5 करोड़ लोग काम करते हैं। महाराष्ट्र की बात करें तो 50 लाख लोग इसमें शामिल हैं। मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में 10 लाख और गुजरात में 25 लाख लोग काम करते हैं। इसमें से करीबन 3 करोड़ कामगार यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओड़ीसा से आकर गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडू में काम करते हैं।

35 प्रतिशत कामगार साइट पर हैं

वे कहते हैं कि वर्तमान में करीबन 35 प्रतिशत कामगार साइट पर हैं। जबकि बाकी लोग डर की वजह से अपने गांव चले गए हैं। हालांकि अगर लॉकडाउन खत्म होता है तो ये कामगार वापस आएंगे। लेकिन एक समस्या यह है कि क्या इन कामगारों के ठेकेदारों, बिल्डरों के पास पैसा है जो उन्हें नियमित रूप से दे सकेंगे? इस पर सोचना होगा।

जेम्स एंड ज्वेलरी में सूरत और मुंबई ज्यादा प्रभावित

जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल (जीजेसी) के चेयरमैन अनंथा पद्मनाभन ने बताया कि मुंबई में 3 लाख बंगाली कारीगर हैं जो गोल्ड इंडस्ट्री से जुड़े हैं। इसमें से 50 प्रतिशत लोग गांव जा चुके हैं। जबकि बाकी लोगों को ट्रेड बॉडी सपोर्ट करके रोक रखी है। सूरत और गुजरात में अधिकतर लोग डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री में हैं और ये सभी वापस गांव जा चुके हैं।

प्लास्टिक क्षेत्र में 50 लाख कामगार
ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के हितेन गाड़ा ने बताया कि 50 लाख कामगार इस पूरे सेक्टर में जुड़े हैं। इसमें से हेल्पर्स और ऑपरेटर्स जैसे कामों के लिए प्रवासी कामगार रखे जाते हैं। उनका कहना है कि कल ही हमने एक ट्रक को सवा लाख रुपए देकर 25 बिहारी मजदूरों को उनके गांव भेजा है।

वे कहते हैं कि करीबन 30 प्रतिशत प्रवासी मजदूर हैं। इसमें से 7-8 लाख कामगार वापस गांव जा चुके हैं। मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद जैसे रेड जोन में अभी भी काम शुरू होने में समय लगेगा। हालांकि कुछ गांव जैसे क्षेत्रों में थोड़ा बहुत काम शुरू हो चुका है।

गारमेंट में 1.2 करोड़ कामगार

क्लोथिंग मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राहुल मेहता कहते हैं कि मास्क जैसे उत्पादों के लिए थोड़ा बहुत काम शुरू हुआ है। लेकिन पूरे काम को शुरू करने के लिए सरकार की नीतियों का इंतजार है। बंगलुरू, लुधियाना, तिरुपुर जैस इलाकों में थोड़ा काम शुरू है और आगे तमिलनाडू और कर्नाटक में काम शुरू हो सकता है।

उनका कहना है कि काम तब शुरू होगा जब रिटेल से मांग आएगी। अभी तक रिटेल से कोई मांग नहीं आ रही है। गारमेंट सेक्टर में 1.2 करोड़ कामगार हैं। मुंबई से करीबन 30 प्रतिशत कामगार वापस गांव जा चुके हैं। हालांकि इसकी दिक्कत तब आएगी जब काम 100 प्रतिशत शुरू होगा। अभी 10 प्रतिशत काम शुरू हुआ है।

राजस्थान में 30 लाख कामगार

राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल कहते हैं कि यहां कुल 30 लाख इंडस्ट्रीयल लेबर हैं। राजस्थान में 28000 रजिस्टर्ड एमएसएमई हैं। इसमें से 8,000 इंडस्ट्रियल एमएसएमई फूल प्रोडक्शन कर रही थीं। यहां 70 प्रतिशत लेबर राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से हैं। उनमें से 70 प्रतिशत वापस चले गए हैं। राजस्थान के बाहर की अन्य राज्यों से 20 प्रतिशत लेबर हैं। उनमें से 60 से 80 प्रतिशत वापस चले गए हैं। जो अभी बचे हैं उनमें से लगभग सभी ने जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। राजस्थान में अभी तक 20,000 से 25,000 इंडस्ट्री ही चालू हो पाई है। जो चालू हुई हैं उनके भी 15-20 प्रतिशत लेबर यानी 5 लाख कामगार काम पर आए हैं।

कर्नाटक ने प्रवासी कामगारों को रोकने के लिए ट्रेन कैंसल किया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कामगारों के पलायन की डर से पहले ही यहां इंटरस्टेट ट्रेन को कैंसल कर दिया है। यहां बिहार के 53,000 से ज्यादा कामगारों ने वापस जाने के लिए अपना नाम दर्ज कराया था। जैसे ही इस बात का पता चला, सरकार ने ट्रेन कैंसल कर दिए। इसका कारण यह है कि बंगलुरू की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर बाहरी कामगार काम करते हैं।

बिहार से 25 लाख कामगार जाते हैं दूसरे राज्यों में

आंकड़े बताते हैं कि पूरे देश में अकेले बिहार से 25 लाख कामगार काम के लिए जाते हैं। इसमें से ज्यादातर कामगार बिहार वापस जा चुके हैं। जो बचे हैं, वह जाने के लिए तैयार हैं। पंजाब में बिहार से सबसे ज्यादा वर्कर्स आते हैं। उसके बाद यूपी और झारखंड से यहां लोग काम करने आते हैं। यहां से करीबन 8 लाख बिहारी कामगारों ने वापस जाने के लिए अपने नाम दर्ज कराए हैं। जबकि पंजाब में इस समय धान की फसलों की तैयारी हो रही है जो 30 लाख हेक्टेयर्स में करने की तैयारी है।

इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के सिद्धार्थ गुप्ता कहते हैं कि यहां कुल कारीगरों में से करीबन 30 प्रतिशत लोग गांव जा चुके हैं। जबकि 20 प्रतिशत लोग जो पंचकुला और मोहाली से आते हैं वे कंटेनमेंट जोन में फंसे हैं।

तेलंगाना में 90 प्रतिशत कामगार दूसरे राज्यों से आते हैं

तेलंगाना में ज्यादातर प्रवासी कामगार कंस्ट्रक्शन सेक्टर में कार्यरत हैं। यहां रियल इस्टेट और इंफ्रा सेक्टर में करीबन 90 प्रतिशत कामगार दूसरे राज्यों से आते हैं। क्रेडाई के तेलंगाना के चेयरमैन जी. राम रेड्‌डी कहते हैं कि अधिकतर कामगार यहां रियल्टी सेक्टर में दूसरे राज्यों से आते हैं। करीबन 6 लाख प्रवासी मजदूर यहां पर हैं। रियल्टी के प्रोजेक्ट में काफी निवेश हो चुका है। लेकिन काम करने के लिए कामगार नहीं हैं। काफी वादे किए गए हैं। लेकिन अब लगता है कि इस सेक्टर में ट्रबल आ सकता है।

30,000 मजदूर खम्मम जिले से गांव गए

तेलंगाना के खम्मम जिले में 42,581 कामगार काम करते हैं। इसमें से 30,000 कामगार दूसरे राज्यों से आते हैं। ये सब कंस्ट्रक्शन में कार्यरत हैं। यब सब गांव चले गए हैं। जो बचे हैं वे अथॉरिटी के पास नाम दर्ज कराए हैं। यहां के जनरल सेक्रेटरी के वेंकटेश्वर राव कहते हैं कि हमने शुरू में सभी को 7,500 रुपए दिए। यह सभी मजदूर ग्रेनाइट सेक्टर में काम करते हैं। इसी तरह केरल में इलाइची के सेक्टर में 5438 प्रवासी मजदूर काम करते हैं जो वापस गांव चले गए हैं।

गुरुग्राम से 1.9 लाख मजदूर गांव जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराए

उधर गुरुग्राम में स्थिति और खराब है। पहली ट्रेन से हिसार से बिहार के कटिहार में 1,200 कामगारों को वापस भेजा गया। जिसके बाद यहां गांव जानेवालों की लाइन लग गई है। पिछले हफ्ते 1.9 लाख प्रवासी कामगारों ने गांव वापस जाने के लिए संबंधित अथॉरिटी के पास नाम दर्ज कराया। यहां कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 15 लाख प्रवासी कामगार काम करते हैं। इसमें से ज्यादातर कामगार अलग-अलग रास्तों से गांव जा चुके हैं।

महाराष्ट्र में केवल 2.41 लाख कामगार मौजूद

महाराष्ट्र लेबर डिपार्टमेंट के मुताबिक कुल 36,523 रजिस्टर्ड फैक्टरी हैं। इसमें 28.54 लाख कामगार काम करते हैं। फिलहाल 5,458 फैक्टरी चालू है और इसमें 2.41 लाख लेबर काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि मुंबई, पुणे जैसे रेड जोन में अभी काम शुरू नहीं हुआ है। जब स्थिति सही होगी, तब उन रेड इलाकों में काम शुरू होगा।

महाराष्ट्र सरकार के कोस्टल प्रोजेक्ट के लिए सामग्री की सप्लाई करनेवाले आरडी एंड संस ट्रांसपोर्ट के अनूप सिंह कहते हैं कि लॉकडाउन में हमें स्पेशल परमिशन मिली है। लेकिन हालात यह है कि हमारे पास न तो ड्राइवर हैं न क्लीनर हैं। हम ड्राइवरों और क्लीनरों को दोगुना पेमेंट दे रहे हैं, पर सभी लोग वापस जाने की जिद पर हैं। कुछ लोग जा चुके हैं तो कुछ लोग जाने की तैयारी में है।

इसी तरह लद्दाख में 14,800 लेबर हैं जो विभिन्न रोड प्रोजेक्ट में काम करते हैं। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक इस समय केवल 1,000 लेबर काम कर रहे हैं और वो भी स्थानीय हैं।

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