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उपलब्धि /कोरोना संकट के बावजूद गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल के स्तर को पार कर गई

सरकार ने 2020-21 में 4.07 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है सरकार ने 2020-21 में 4.07 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है

  • चालू मार्केटिंग सत्र में अब तक सरकारी एजेंसियों ने कुल 3.415 करोड़ टन गेहूं की खरीदारी कर ली
  • पिछले कारोबारी साल में कुल 3.413 करोड़ टन गेहूं की सरकारी खरीदारी हुई थी

Moneybhaskar.com

May 25,2020 07:16:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिए यातायात पर लागू पाबंदियों के बाद भी चालू मार्केटिंग सत्र में अब तक हुई गेहूं की सरकारी खरीद पिछले सत्र के स्तर को पार कर चुकी है। चालू मार्केटिंग सत्र 2020-21 में अब तक सरकारी एजेंसियों ने कुल 3.415 करोड़ टन की खरीदारी कर ली है। पिछले साल कुल 3.413 करोड़ टन गेहूं की सरकारी खरीदारी हुई थी। सरकार ने 2020-21 में 4.07 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। गेहूं का मार्केटिंग सत्र अप्रैल से मार्च तक चलता है। लेकिन अधिकतर खरीदारी पहले तीन महीनों (अप्रैल-जून) में ही हो जाया करती है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदने का कार्य करती हैं।

पंजाब में 1.258 करोड़ टन गेहूं की खरीदारी हुई

खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चालू विपणन वर्ष में 24 मई तक कुल गेहूं खरीदारी 3.415 करोड़ टन हो गई है, जो पिछले साल की 3.413 करोड़ टन की खरीद से ज्यादा है। इसमें से पंजाब में 1.258 करोड़ टन, मध्य प्रदेश में 1.133 करोड़ टन, हरियाणा में 70.6 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 20.3 लाख टन, उत्तराखंड में 31,000 टन, गुजरात में 21,000 टन, चंडीगढ़ में 12,000 टन और हिमाचल में 3,000 टन गेहूं की खरीदारी हुई है।

इस साल अधिकतर राज्यों में 15 अप्रैल से सरकारी खरीदारी का काम शुरू हुआ

मंत्रालय ने कहा कि गेहूं की कटाई आम तौर पर मार्च के अंत में शुरू होती है। खरीदारी का काम अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू होता है। लेकिन इस बार 24 मार्च से लॉकडाउन लागू हो गया। इसके कारण सभी तरह की गतिविधियां रुक गईं। इस समय तक फसल पक गई थी और वो कटने के लिए तैयार थी। इसे देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कृषि व सहायक गतिविधियों को लॉकडाउन से छूट दे दी। इसके बाद जिन राज्यों में खरीदारी होती है, उनमें से अधिकतर राज्यों में 15 अप्रैल से सरकारी खरीदारी का काम शुरू हो पाया। हरियाणा में खरीदारी थोड़ी देर से 20 अप्रैल को शुरू हुई।

केंद्रों पर किसानों की भीड़ कम करने के लिए क्रय केंद्रों की संख्या में काफी वृद्धि की गई

मंत्रालय ने कहा कि खरीदारी में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि महामारी के दौरान इसे सुरक्षित तरीके से कैसे अंजाम दिया जाए। मंत्रालय ने कहा कि यह काम जागरूकता सृजन, सामाजिक दूरी कायम रखने और प्रौद्योगिकी उपयोग जैसी बहु-आयामी रणनीति के माध्यम से किया जा सका। क्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़ कम करने के लिए ऐसे केंद्रों की संख्या में काफी वृद्धि की गई। ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध हर सुविधा का उपयोग किया गया। पंजाब में खरीद केन्द्रों की संख्या 1,836 से बढ़कर 3,681,हरियाणा में 599 से बढ़ाकर 1,800 तथा मध्य प्रदेश में यह संख्या 3,545 से बढ़ाकर 4,494 रखी गई थी।

खरीद के दौरान तीन बड़ी चुनौतियों से निपटने का काम किया गया

पंजाब में, प्रत्येक किसान को स्टॉक लाने के लिए निर्धारित विशिष्ट स्थान आवंटित किए गए थे और किसी और को उस स्थान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। केवल वे लोग जो प्रक्रिया से सीधे जुड़े हुए थे, उन्हें दैनिक नीलामी के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति दी गई थी। मंत्रालय ने कहा कि वायरस के प्रसार के खतरे के अलावा, खरीद एजेंसियों को तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें से एक थी जूट बोरियों की अनुपलब्धता, क्योंकि सभी जूट मिलें बंद थीं। इसे अधिक प्लास्टिक बैग के उपयोग के जरिए दूर किया गया।

बेमौसमी बरसात से गेहूं को संरक्षित किया गया

दूसरी समस्या बेमौसम की बरसात के कारण गेहूं फसल को संरक्षित करना था। इसने किसानों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया, क्योंकि सामान्य मानक नियमों के तहत ऐसे फसल की खरीद में दिक्कत आ सकती थी। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार और एफसीआई ने तुरंत हस्तक्षेप किया और विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण करने के बाद, मानकों को फिर से तय किया गया ताकि किसी भी किसान को संकट में नहीं फंसना पड़े, और उनकी उपज न्यूनतम गुणवत्ता आवश्यकताओं को भी पूरा कर सके।

वायरस से मजदूरों की सुरक्षा के लिए पूरे इंतजाम किए गए

तीसरी चुनौती, मजदूरों की कमी के साथ साथ वायरस के बारे में जनता के बीच सामान्य भय था। मजदूरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मास्क, सैनिटाइटर आदि प्रदान करने के साथ-साथ अन्य एहतियाती उपाय भी किए गए। मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार, एफसीआई, राज्य सरकारें और उनकी एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के साथ, सभी गेहूं उत्पादक राज्यों में इस अनाज की खरीद का काम बहुत सुचारू रूप से किया जा सका। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने तीसरे अनुमान में इस बार गेहूं उत्पादन के 10 करोड़ 71.8 लाख टन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। फसल वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में 10.36 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ था।

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