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लघु उद्योग /वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई, कुटीर व गृह उद्योग को राहत देने के लिए 6 बड़ी घोषणाएं कीं

देशभर में करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में काम कर रही हैं। इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान है। वित्तवर्ष 2016-17 में नॉमिनल जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 30 फीसदी था। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग आउटपुट में योगदान करीब 45 फीसदी था देशभर में करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में काम कर रही हैं। इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान है। वित्तवर्ष 2016-17 में नॉमिनल जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 30 फीसदी था। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग आउटपुट में योगदान करीब 45 फीसदी था

  • घोषणा में तीन लाख करोड़ रुपए के लोन से लेकर क्रेडिट गारंटी, लोन मोराटोरियम जैसी कई बातें शामिल
  • वित्तमंत्री की इस घोषणा से मुश्किलों से जूझ रहे इस सेक्टर को काफी राहत मिलने की उम्मीद है

Moneybhaskar.com

May 13,2020 07:55:26 PM IST

नई दिल्ली. एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए बुधवार को सरकार ने छह कदमों की घोषणा की। इसमें तीन लाख करोड़ रुपए के लोन से लेकर क्रेडिट गारंटी, लोन मोराटोरियम जैसी कई बातें शामिल हैं। वित्तमंत्री की इस घोषणा से मुश्किलों से जूझ रहे इस सेक्टर को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। कुछ समय पहले ही कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि एमएसएमई सेक्टर तबाह होने की कगार पर पहुंच गया है। एमएसएमई सेक्टर की मदद के लिए फिक्की ने 4.5 लाख करोड़ रुपए की मदद की मांग की थी। संगठन ने यह भी मांग की थी, सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपए के बिल जल्दी क्लियर करे।


सरकार द्वारा मदद की लिए घोषित प्रमुख बातें :

  • एमएसएमई, कुटीर व गृह उद्योग के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का कोलैटरल मुक्त ऑटोमैटिक लोन की सुविधा। 45 लाख छोटी कारोबारी गतिविधियों को इसका लाभ मिलेगा और इससे कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा मिलेगी। 25 करोड़ रुपए तक बकाए और 100 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली इकाइयों को ये लोन मिलेंगे। कारोबारी इकाई पर 29 फरवरी 2020 तक जितना बकाया था, उसका अधिकतम 20 फीसदी सरल लोन के रूप में इन इकाइयों को बैंक और एनबीएफसी से मिलेगा। लोन का भुगतान 4 साल में करना होगा और मूल धन के भुगतान पर एक साल का मोरेटोरियम होगाा। योजना का फायदा कारोबारी इकाइयां 31 अक्टूबर 2020 तक ले सकेंगी।
  • 20 हजार करोड़ रुपए की सबोर्डेनेट डेट (अधिनस्थ ऋण) स्कीम। ये संकटग्रस्त एमएसएमई के लिए हैं। 2 लाख एमएसएमई को मिल सकता है लाभ। एनपीए और संकटग्रस्त एमएसएमई सभी को मिलेगा लाभ।

  • बेहतर काम कर रहे एमएसएमई में निवेश के लिए फंड ऑफ फंड बनेगा। एमएमसएमई में 50 हजार करोड़ रुपए की इक्विटी का होगा निवेश। 10 हजार करोड़ रुपए के साथ बनेगा कोष।

  • एमएसएमई की परिभाषा एममएसएमई के हित में बदली। ताकि आकार बढ़ने के बाद भी एमएसएमई को लाभ मिलता रहे। इसलिए एमएसएमई में निवेश सीमा बढ़ी। यानी ज्यादा निवेश होने पर भी यूनिट एमएसएमई के दायरे में रहेंगी। अब इसमें टर्न ओवर के आकार को भी जोड़ा गया। मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के एमएसएमई में अंतर को समाप्त कर दिया गया। पहले 25 लाख के निवेश को माइक्रो यूनिट कहा जाता था। अब 1 करोड़ तक के निवेश के बाद भी माइक्रो यूनिट बने रहेंगे। सेवा में भी माइक्रो यूनिट के लिए निवेश सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया। अब 5 करोड़ रुपए के टर्नओवर के बाद भी माइक्रो यूनिट बने रहेंगे। स्मॉल के लिए निवेश की सीमा 10 करोड़ रुपए और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए कर दी गई। मीडियम एंटरप्राइज के लिए निवेश की समी बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर दी गई।

  • सरकारी खरीद में 200 करोड़ रुपए तक के टेंडर के लिए ग्लोबल टेंडर की बाध्यता को समाप्त कर दी गई। इससे एमएसएमई भरोसे के साथ कारोबार कर पाएंगे।

  • सभी एमएसएमई के लिए ई-मार्केट लिंकेज। केंद्र सरकार और सीपीएसई अगले 45 दिनों में एमएसएमई के सभी बकाए का भुगतान कर देंगी।

3 लाख करोड़ के लोन से हर यूनिट औसत 6-6.5 लाख रुपए मिलने की उम्मीद

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संजय अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपए के लोन से हर यूनिट को औसतन 6-6.5 लाख रुपए मिलने की उम्मीद है। यह आज की सबसे बड़ी घोषणा है। महामारी के कारण कई कंपनियों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं हैं। इस घोषणा से उन्हें कारोबार का संचालन करने के लिए पूंजी मिल गई। केंद्र सरकार और सीपीएसई को अगले 45 दिनों में एमएसएमई के सभी बकाए का भुगतान करने के लिए कहना भी एक बड़ी घोषणा है।

ग्लोबल टेंडर की बाध्यता समाप्त करने से भारतीय कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

संजय अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई की परिभाषा उतनी व्यापक नहीं हुई है जितने की उम्मीद थी। सरकार दो साल से जिस एमएसएमई कानून को संसद में पारित कराने की कोशिश कर रही है, उसमें स्मॉल व मीडियम यूनिट के लिए इससे व्यापक परिभाषा है। सरकारी खरीद में 200 करोड़ रुपए तक के टेंडर के लिए ग्लोबल टेंडर की बाध्यता को समाप्त किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई को पूरा फायदा तो नहीं मिलेगा, क्योंकि भारत में भी बड़े आकार वाली कंपनियां हैं, लेकिन इतना तो कहा जा सकता है कि इससे भारतीय कंपनियों को बढ़ावा जरूर मिलेगा।

परिभाषा व्यापक किए जाने से एमएसएमई को मिला विकास का नया कैनवास

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष और केंट आरओ सिस्टम्स लिमिटेड के सीएमडी डॉ महेश गुप्ता ने कहा कि आज एमएसएमई के लिए 2 बड़े फैसले आज लिए गए हैं। पहला, एमएसएमई की परिभाषा को अधिक व्यापक कर उसे विकास के लिए एक नया कैनवास प्रदान करना और दूसरा है 200 करोड़ रुपए से कम के टेंडर में ये सुनिश्चित करना की सिर्फ घरेलु कंपनियां ही टेंडरिंग में भाग ले पाए। इससे एमएसएमई के लिए एक नया बाजार खुल जाएगा। ये दोनों घोषणाएं इस वक्त अर्थव्यवस्था में एक नई जान डालने में सक्षम हैं। 20 लाख करोड़ रुपये जब अर्थव्यवस्था में इंजेक्ट किया जाएगा तो मांग को बढ़ावा मिलेगा और इससे उद्योग जगत का पहिए घूमेगा।

गारंटी रहित लोन एमएसएमई को फिर से उत्पादन शुरू करने में मदद करेगा

गुजरात डायस्टफ मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश पारिख ने कहा कि बिना किसी गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपए का ऋण मिलने से एमएसएमई को काफी लाभ मिलेगा। यह उद्योगों को उत्पादन फिर से शुरू करने में मदद करेगा। उन्होंने साथ ही कहा कि 200 करोड़ रुपये की वैश्विक निविदा प्रक्रिया को बंद करने से केवल देश के उद्योग ही निविदा भर पाएंगे। इससे स्थानीय उद्योग के लिए वैश्विक उद्योग बनना बहुत आसान हो जाएगा। यह आत्मनिर्भर भारत को साकार करने में बहुत मददगार होगा।


करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में

देशभर में करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में काम कर रही हैं। इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने में प्रमुख योगदान है। वित्तवर्ष 2016-17 में नॉमिनल जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 30 फीसदी था। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग आउटपुट में योगदान करीब 45 फीसदी था।

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देशभर में करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में काम कर रही हैं। इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान है। वित्तवर्ष 2016-17 में नॉमिनल जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 30 फीसदी था। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग आउटपुट में योगदान करीब 45 फीसदी थादेशभर में करीब 6.3 करोड़ इकाईयां एमएसएमई सेक्टर में काम कर रही हैं। इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान है। वित्तवर्ष 2016-17 में नॉमिनल जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 30 फीसदी था। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग आउटपुट में योगदान करीब 45 फीसदी था

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