लॉकडाउन का असर /मजदूरों की कमी से फॉर्च्यून ब्रांड वाली अडानी विल्मर का कारोबार हुआ प्रभावित, खाद्य तेल का उत्पादन 40 फीसदी घट गया

पैकबंद खाद्यतेल खंड में अडानी विल्मर के पास सर्वाधिक 20 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है पैकबंद खाद्यतेल खंड में अडानी विल्मर के पास सर्वाधिक 20 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है

  • ज्यादातर मजदूर अपने गांव लौटे, स्थानीय मजदूर बिमारी से बचने के लिए काम करने को तैयार नहीं
  • अडानी विल्मर के खाद्य तेल की बिक्री में भी 25 फीसदी की गिरावट

Moneybhaskar.com

Apr 11,2020 05:35:00 PM IST

नई दिल्ली. फॉर्च्यून ब्रांड के साथ खाद्य तेल बेचने वाली कंपनी, अडानी विल्मर ने शनिवार को कहा कि मौजूदा लॉकडाऊन में मजदूरों की कमी के कारण उसके खाद्य तेलों के उत्पादन में 40 फीसदी की गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप इस आवश्यक वस्तु की बाजार में आपूर्ति घट गई है। कंपनी के डिप्टी सीईओ आंग्शु मल्लिक ने कहा कि कोविद -19 संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण सभी होटल, रेस्तरां और कैफेटेरिया बंद हैं। इसके कारण खाद्य तेलों की बिक्री में भी 25 फीसदी की गिरावट आई है। पैकबंद खाद्यतेल खंड में अडानी विल्मर के पास सर्वाधिक 20 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है।

ज्यादातर मजदूर अपने गांव लौटे, स्थानीय मजदूर बिमारी से बचने के लिए काम करने को तैयार नहीं

मल्लिक ने कहा कि हम प्रतिदिन लगभग 8,000 टन खाद्य तेल का प्रसंस्करण और उत्पादन करते थे। लेकिन मजदूरों की कमी के कारण उत्पादन लगभग 40 फीसदी घट गया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने पैतृक स्थान लौट गये हैं, जबकि स्थानीय लोग इस बीमारी से संक्रमित होने के डर से काम करने को तैयार नहीं हैं।

मजदूरों की कमी के चलते ट्र्रकों से माल भेज रही है कंपनी

देश के विभिन्न राज्यों में कंपनी के लगभग 25 प्रसंस्करण संयंत्र हैं। कंपनी ट्रकों के माध्यम से खाद्य तेल का परिवहन कर रही है, क्योंकि रेलवे से माल भेजने के लिए अधिक मजदूरों की आवश्यकता होती है। मल्लिक ने कहा कि मांग में भी 25 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने कहा कि मांग के मुकाबले उत्पादन में ज्यादा कमी आई है। इसलिए मांग की तुलना में आपूर्ति कम रहेगी।

कंपनी ने खुदरा कीमत में अभी तक बढ़ोतरी नहीं करने का दावा किया

मूल्य स्थिति के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि कंपनी ने लॉकडाउन के बाद खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की है, हालांकि मजदूरी और माल ढुलाई लागत में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल का आयात आसानी से हो रहा है और वैश्विक बाजार में खाद्य तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे राज्यों में सरसों की फसल की कटाई अगले सप्ताह से बढ़ेगी। इससे घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

फॉर्च्यून ब्रांड के अन्य उत्पादों की बिक्री में भारी तेजी

फॉर्च्यून ब्रांड के तहत अन्य खाद्य पदार्थों की मांग के बारे में उन्होंने कहा कि ब्रांडेड गेहूं का आटा, टूटी हुई बासमती, दालें, बेसन। और सोयाबीन की बिक्री में भारी तेजी आई है। लॉकडाउन को देखते हुए अदानी विल्मर ने खाद्य पदार्थो की होम डिलीवरी के लिए स्विगी के साथ साझेदारी की है। देश में खाद्य तेल की सालाना मांग 230 लाख टन है। इसकी अधिकांश पूर्ति आयात से होती हैमार्केटिंग वर्ष 2018-19 (नवंबर-अक्टूबर) में वनस्पति तेल (खाद्य व अखाद्य तेल) का कुल आयात 3.5 फीसदी बढ़ कर 155.5 लाख टन रहा।

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