केबिनेट मंजूरी /कोयले की कमर्शियल माइनिंग करने वाली कंपनी को कमाई का कम से कम 4 फीसदी हिस्सा सरकार को देना होगा, इससे अधिक के लिए लगेगी बोली

कंपनियों को 4 फीसदी प्लोर प्राइस के ऊपर और अधिकतम 10 फीसदी की रेवेन्यू शेयरिंग तक कमाई के 0.5 फीसदी के मल्टीपल में बोली लगानी होगी। 10 फीसदी के ऊपर कमाई के 0.25 फीसदी के मल्टीपल में बोली स्वीकार की जाएगी कंपनियों को 4 फीसदी प्लोर प्राइस के ऊपर और अधिकतम 10 फीसदी की रेवेन्यू शेयरिंग तक कमाई के 0.5 फीसदी के मल्टीपल में बोली लगानी होगी। 10 फीसदी के ऊपर कमाई के 0.25 फीसदी के मल्टीपल में बोली स्वीकार की जाएगी

  • रेवेन्यू शेयरिंग आधार पर कोयले की बिक्री व कमर्शियल माइनिंग की प्रक्रिया हुई तय
  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को हुई बैठक में प्रक्रिया को दी मंजूरी

Moneybhaskar.com

May 20,2020 05:07:00 PM IST

नई दिल्ली. सरकार ने रेवेन्यू शेयरिंग आधार पर कोयले की कमर्शियल माइनिंग की प्रक्रिया तय कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बुधवार को हुई बैठक में प्रक्रिया को मंजूरी दी गई। मंजूर की गई प्रक्रिया के तहत कोयले की कमर्शियल माइनिंग करने वाली कंपनी को कमाई का कम से कम 4 फीसदी हिस्सा निश्चित तौर पर सरकार को देना होगा। इससे अधिक राजस्व सरकार को देने के लिए कंपनियां नीलामी में बोली लगाएंगी।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत कोयले की कमर्शियल माइनिंग को मिली इजाजत

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीसीईए ने रेवेन्यू शेयरिंग आधार पर कोयले व लिग्नाइट की बिक्री के लिए कोयला व लिग्नाइट खदान/ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह आत्मनिर्भर भारत पैकेज की कई चरणों की घोषणा में कहा था कि आयात पर से निर्भरता कम करने के लिए सरकार कोयले का घरेलू उत्पादन बढ़ाएगी। कोयला खदान में कमर्शियल माइनिंग को अनुमति दी जाएगी और इसके लिए खदानों को निजी कंपनियों को नीलाम किया जाएगा।

सरकार के साथ रेवेन्यू शेयरिंग के लिए कमाई का 4 फीसदी होगा नीलामी का फ्लोर फ्लोर प्राइस

सीसीईए द्वारा मंजूर की गई प्रक्रिया के मुताबिक खदानों के लिए बोली लगाने वाले अपनी बोली में यह बताएंगे कि खदानों से होने वाली कमाई का कम से कम कितना कितना हिस्सा वे सरकार को देंगी। कोयला मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक खदान की नीलामी में फ्लोर प्राइस कुल कमाई का 4 फीसदी होगा। इसका मतलब यह है कंपनी को कमाई का कम से कम 4 फीसदी हिस्सा सरकार को देना होगा।

कोयले की बिक्री व उपयोग पर सरकार नहीं लगाएगी कोई शर्त

मंत्रालय के बयान के मुताबिक 4 फीसदी प्लोर प्राइस के ऊपर और अधिकतम 10 फीसदी तक 0.5 फीसदी के मल्टीपल में बोली लगानी होगी। 10 फीसदी के ऊपर कमाई के 0.25 फीसदी के मल्टीपल में बोली स्वीकार की जाएगी। कमर्शियल माइनिंग के तहत कोयले की खदान से निकले कोयले की बिक्री और/या उपयोग पर सरकार की ओर से किसी प्रकार की शर्त नहीं लगाई जाएगी।

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कंपनियों को 4 फीसदी प्लोर प्राइस के ऊपर और अधिकतम 10 फीसदी की रेवेन्यू शेयरिंग तक कमाई के 0.5 फीसदी के मल्टीपल में बोली लगानी होगी। 10 फीसदी के ऊपर कमाई के 0.25 फीसदी के मल्टीपल में बोली स्वीकार की जाएगीकंपनियों को 4 फीसदी प्लोर प्राइस के ऊपर और अधिकतम 10 फीसदी की रेवेन्यू शेयरिंग तक कमाई के 0.5 फीसदी के मल्टीपल में बोली लगानी होगी। 10 फीसदी के ऊपर कमाई के 0.25 फीसदी के मल्टीपल में बोली स्वीकार की जाएगी

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