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  • China, the father of Kovid 19, lagged behind the cut in interest rates between March and May, with India reducing 115 bps to ninth position.

मॉनिटरी पॉलिसी /कोविड-19 का जनक चीन मार्च से मई के बीच ब्याज दरों की कटौती में सबसे पीछे, भारत 115 बीपीएस कम करने के साथ नौवें क्रम पर

  • चीन ने मार्च से मई के दौरान केवल 20 बीपीएस की कटौती दरों में की है
  • अमेरिका और कनाडा ने 150 बीपीएस की कटौती इस दौरान की है

Moneybhaskar.com

May 23,2020 06:52:55 PM IST

मुंबई. कोविड-19 के जनक चीन से आज पूरी दुनिया परेशान है। लेकिन दूसरी हकीकत यह है कि जब पूरी दुनिया के देश अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं, ऐसे में चीन सबसे पीछे है। मार्च से लेकर मई तक के अब तक की अवधि में चीन के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में महज 20 बीपीएस की कटौती की है। भारत इस मामले में 9 वें क्रम पर है। इसने 115 बीपीएस की कटौती की है।

ज्यादातर बड़े देशों ने 100 बीपीएस से ज्यादा की कटौती की

इस दौरान भारत के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने दो बार मौद्रिक नीति की समीक्षा की है और इसने दोनों बार रेपो रेट में कटौती की है। मार्च में 75 बीपीएस की कटौती के बाद शुक्रवार को आरबीआई ने फिर से 40 बीपीएस की कटौती कर दी है। यानी मार्च से मई के बीच भारत ने 115 बीपीएस या 1.15 प्रतिशत की कटौती की है। आंकड़े बताते हैं कि मई में 16 प्रमुख देशों ने अपनी नीतिगत दरों में कटौती की है। इन देशों में से ज्यादातर बड़े देशों ने 100 बीपीएस से ज्यादा की ही कटौती की है।

अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की एक नंबर पर

आंकड़े बताते हैं कि अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की ने 200-200 बीपीएस यानी 2 प्रतिशत की कटौती ब्याज दरों में की है। इसके बाद आइसलैंड ने 175 बीपीएस की कटौती ती और वह चौथे नंबर पर रहा। कनाडा और अमेरिका ने 150-150 बीपीएस की कटौती दरों में की है। जबकि ब्राजील और सउदी अरबिया ने 125-125 प्रतिशत की कटौती की है। उसके बाद भारत 9 वें क्रम पर आता है, जिसने 115 बीपीएस की कटौती की है।

ऑस्ट्रेलिया और रसिया 50 बीपीएस के साथ एक साथ

इनके अलावा हांगकांग ने 89 बीपीएस की कटौती की है। जबकि यूके ने 65 बीपीएस की कटौती की है। ऑस्ट्रेलिया और रसिया ने 50-50 बीपीएस की कटौती की। लेकिन चीन का नंबर इसके बाद आता है। इसने महज 20 बीपीएस की ही कटौती की है। एसबीआई ने शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमारे अनुमान से रीयल जीडीपी की वृद्धि वित्तीय वर्ष 2021 में 6.8 प्रतिशत गिरेगी।

पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों पर 50 प्रतिशत असर

लॉकडाउन ने पहली तिमाही में करीबन 50 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियों पर असर डाला है। एसबीआई ने रिपोर्ट में कहा है कि वर्तमान में जो ब्याज दरें कम होने का सिलसिला शुरू हुआ है, वह आगे भी जारी रह सकता है। भारत में फरवरी से रेट कट हो रहा है और अब तक 250 बीपीएस की कटौती हुई है। एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि सरकारी बैंकों ने जहां डिपॉजिट पर दरों में कटौती कम की है, वहीं निजी बैंकों ने डिपॉजिट की ब्याज दरों में ज्यादा आक्रामक तरीके से कटौती की है। सरकारी बैंकों ने एमसीएलआर में कटौती पर फोकस किया, जो निजी बैंकों ने नहीं किया।

पूरी दुनिया को 8.8 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है नुकसान

एडीबी ने अनुमान लगाया है कि पूरी दुनिया को कोविड-19 से 5.8 से 8.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान वैश्विक स्तर पर जीडीपी के अनुपात में 6.4 से 9.7 प्रतिशत होगा। एशिया में इकोनॉमिक नुकसान 1.7 ट्रिलियन डॉलर के करीब रह सकता है। यह तब होगा जब तीन महीने की अवधि पकड़ी जाए। अगर इसे 6 महीने के हिसाब से देखें तो यह नुकसान 2.5 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है।

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