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वायरस से आर्थिक जंग /कोरोनावायरस से डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने हाल में घटाई हैं मुख्य ब्याज दरें

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.40% की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40% से घटकर 4% हो गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 3.75% से घटाकर 3.35% पर आ गया है आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.40% की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40% से घटकर 4% हो गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 3.75% से घटाकर 3.35% पर आ गया है

  • अमेरिका की ब्याज दर 2.5 फीसदी से घटकर 0.25 फीसदी पर आई
  • ब्रिटेन की मुख्य ब्याज दर 0.75 फीसदी से घटकर 0.1 फीसदी पर आई

Moneybhaskar.com

May 22,2020 03:59:23 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस से डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दुनियाभर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने हाल में अपनी मुख्य ब्याज दरों में कटौती की है। इधर देश में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.40% की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40% से घटकर 4% हो गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 3.75% से घटाकर 3.35% पर आ गया है। भारत की मुख्य ब्याज दर ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है। दूसरे देशों में भी मुख्य ब्याज दरों का यही हाल है। यहां हम देखते हैं कि अन्य प्रमुख देशों में मुख्य ब्याज दरें क्या चल रही हैं और उनकी ब्याज दरों का रुझान किस ओर है। अधिकतर देशों की ब्याज दरों का ग्राफ बताता है कि उन्होंने कोरोनावायरस की महामारी से इकॉनोमी को बचाने के लिए मुख्य ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है।

प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदा मुख्य ब्याज दरें

देश

मुख्य ब्याज दर (फीसदी में) दर निर्घारण की तारीख
अमेरिका 0.250 15 मार्च 2020
ऑस्ट्र्रेलिया 0.250 19 मार्च 2020
ब्राजील 3.000 6 मई 2020
ब्रिटेन 0.100 19 मार्च 2020
कनाडा 0.250 27 मार्च 2020
चीन 3.850 20 अप्रैल 2020
यूरोपीय संघ 0.000 10 मार्च 2016
जापान -0.100 01 फरवरी 2016
रूस 5.500 24 अप्रैल 2020
दक्षिण अफ्रीका 4.250 14 अप्रैल 2020

स्रोत : ग्लोबल रेट्स डॉट कॉम

क्या होती है रेपो दर व रिवर्स रेपो दर

रेपो दर वह दर होती है, जिसके आधार पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को छोटी अवधि के लिए कर्ज देता है। रिवर्स रेपो दर वह दर होती है, जिस दर पर वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा आरबीआई में पार्क करते हैं। ये दोनों सरकार के प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण हैं। इनके आधार पर रिजर्व बैंक बाजार में नकदी की उपलब्धता को जरूरत पड़ने पर कम या अधिक करता है। रेपो दर के आधार पर वाणिज्यिक बैंकों के द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न कर्जों की ब्याज दरें भी तय होती हैं। हर देश में मुख्य ब्याज दरों के अलग-अलग नाम होते हैं।


अमेरिका के फेडरल रिजर्व की मुख्य ब्याज दर एक साल में 2.5 फीसदी से घटकर 0.25 फीसदी पर आई

कोरोनावायरस का असर सामने आने से पहले पहले अक्टूबर 2019 में अमेरिका के फेडरल रिजर्व की मुख्य ब्याज दर 1.75 फीसदी थी, जो दो किस्तों में घटकर शून्य से 0.25 फीसदी के दायरे में आ गई है।

गत एक साल में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का ग्राफ

1991 से अब तक फेड की ब्याज दरों का ग्राफ


ऑस्ट्र्रेलिया की ब्याज दरों का एक साल का ग्राफ

ब्राजील की मुख्य ब्याज दर का एक साल का ग्राफ


ब्रिटेन की मुख्य ब्याज दर 0.75 फीसदी से घटकर 0.1 फीसदी पर आई


कनाडा की ब्याज दर 1.75 फीसदी से गिरकर 0.25 फीसदी पर आई


चीन की ब्याज दर 4.25 फीसदी से घटकर 3.85 फीसदी पर आई


रूस की गत एक साल में ब्याज दर

दक्षिण अफ्रीका की ब्याज दर पिछले साल के 6.5 फीसदी से घटकर 3.75 फीसदी पर आई



यूरोपीय संघ और जापान की ब्याज दरें पहले से शून्य और इसके नीचे हैं

कोरोनावायरस के कहर के बीच यूरोपीय संघ और जापान की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यूरोपीय संघ की मुख्य ब्याज दर 2014 के बाद से लगातार शून्य फीसदी पर है। उधर जापान की मुख्य ब्याज दर फरवरी 2016 के बाद से (-)0.1 फीसदी है।

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आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.40% की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40% से घटकर 4% हो गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 3.75% से घटाकर 3.35% पर आ गया हैआरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.40% की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40% से घटकर 4% हो गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी 3.75% से घटाकर 3.35% पर आ गया है

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