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  • After reducing the repo rate of RBI, there will be savings of Rs 960 in monthly installment, the effect will be seen in next month's EMI

रेपो रेट घटने का असर /40 लाख के कर्ज पर हर महीने की किश्त में 960 रुपए की बचत होगी, अगले महीने की ईएमआई में असर दिखेगा

  • रिटेल लोन में होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन आदि आते हैं
  • इस तरह के लोन की किश्त में सालाना 11,520 रुपए की होगी बचत

Moneybhaskar.com

May 22,2020 03:29:21 PM IST

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को रेपो रेट में 40 बीपीएस की कटौती के बाद तमाम तरह के कर्ज लेने वाले ग्राहकों को राहत मिली है। अगर किसी ने 40 लाख रुपए का 20 साल का कर्ज लिया है तो उसकी मासिक किश्त में 960 रुपए की कमी आएगी। यानी आरबीआई के फैसले से सालाना 11,520 रुपए की बचत होगी।

ईबीएलआर से जुड़ने पर ही मिलेगा फायदा

उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने 40 लाख रुपए का कर्ज लिया है। उसे इस 40 बीपीएस के आधार पर 960 रुपए मासिक बचत होगी। उसकी ईएमआई अगर 40 हजार रुपए है तो अब जून महीने से उसे 39,040 रुपए का भुगतान करना होगा। हालांकि बैंकों में यह फायदा तब होगा जब ग्राहक ईबीएलआर से जुड़ा होगा और साथ ही उसका सिबिल स्कोर बेहतर होगा। जैसे यूनियन बैंक के ग्राहक को यह फायदा इसी आधार पर होगा। इस फैसले से उन लोगों को ज्यादा राहत मिलेगी जिनका खुद का रोजगार है या जो सैलरी पेशा वाले हैं।

मार्च में 75 बीपीएस कटौती से 1,533 रुपए का हुआ था फायदा

इस कटौती का फायदा रिटेल लोन के सभी ग्राहकों को मिलेगा। इसमें हाउसिंग लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन जैसे वे सभी लोन हैं, जो रिटेल लोन में आते हैं। बता दें कि बैंकों के लिए रिटेल लोन सबसे बड़ा फायदे का सौदा है। इससे पहले मार्च में आरबीआई ने 75 बीपीएस की कटौती की थी। उस समय किसी ने अगर 35 लाख रुपए का लोन 15 साल के लिए लिया होगा तो उसे मासिक 1,533 रुपए का फायदा ईएमआई में होगा। यानी सालाना 18,396 रुपए का लाभ होगा।

अक्टूबर 2019 में ईबीएलआर हुआ था लागू

बता दें कि अक्टूबर 2019 से सभी तरह के रिटेल लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क लैंडिंग रेट (ईबीएलआर) से जोड़ दिए गए हैं। अगर किसी ग्राहक ने इसका फैसला नहीं लिया तो उसे यह लाभ नहीं मिल पाएगा। बता दें कि आरबीआई के फैसले के बाद अब रेपो रेट 4 प्रतिशत हो गया है। रेपो रेट वह दर होती है, जिस दर पर बैंक आरबीआई से पैसा लेते हैं। जबकि इसी के साथ रिवर्स रेपो में भी कटौती हुई है। रिवर्स रेपो यानी बैंक जिस दर पर आरबीआई के पास पैसा रखते हैं। इस तरह से आरबीआई के फैसले के बाद एफडी और सेविंग के साथ कर्ज की ब्याज दरों में भी कटौती होगी।

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